शासकीय महाविद्यालय आठनेर में हर्षोल्लास से मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, छात्र-छात्राओं ने फोड़ी दही-हांडी
संवाददाता : आशीष ठाकरे
आठनेर। शासकीय महाविद्यालय आठनेर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज पाटिल के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन एवं श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश पर सारगर्भित विचार-विमर्श किया गया, साथ ही पारंपरिक दही-हांडी फोड़ कार्यक्रम का भी भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में रंग गया और विद्यार्थियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन पर केंद्रित संगोष्ठी से हुई, जिसमें महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. गजानन ठाकरे ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके कर्मयोग तथा श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, विवेक एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि वे श्रीकृष्ण के आदर्शों एवं गीता के संदेश को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने वास्तविक जीवन में आत्मसात करने का प्रयास करें। डॉ. ठाकरे ने यह भी बताया कि गीता का ज्ञान आज के प्रतिस्पर्धी युग में विद्यार्थियों के लिए किस प्रकार मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।
कार्यक्रम के द्वितीय वक्ता डॉ. विकेश सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व एवं उनके द्वारा दिए गए ज्ञान, कर्म और भक्ति के संदेश की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन युवाओं को सकारात्मक सोच, कर्मशीलता और चुनौतियों का डटकर सामना करने की प्रेरणा देता है। डॉ. सिंह ने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि आज के युवाओं को अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों से घबराने के बजाय श्रीकृष्ण के कर्मयोग के सिद्धांत को अपनाकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि किस प्रकार ज्ञान, कर्म और भक्ति का समन्वय एक संतुलित एवं सफल जीवन जीने में सहायक होता है।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य महोदया डॉ. सरोज पाटिल ने भी सभी उपस्थित जनों को संबोधित किया। उन्होंने सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से विद्यार्थियों को जोड़ने वाले ऐसे आयोजन उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राचार्य महोदया ने विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए कहा कि वे श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर अनुशासन, सदाचार, कर्तव्यनिष्ठा एवं सामाजिक समरसता जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन विद्यार्थियों में अपनी जड़ों और परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव जागृत करते हैं।

छात्र-छात्राओं ने उत्साह से फोड़ी दही-हांडी
जन्माष्टमी समारोह का सबसे विशेष एवं आकर्षक हिस्सा दही-हांडी फोड़ कार्यक्रम रहा, जिसे देखने के लिए महाविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों और स्टाफ की भारी भीड़ जुट गई। महाविद्यालय परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार दही-हांडी को काफी ऊंचाई पर बांधा गया, ताकि प्रतिभागियों के लिए यह एक रोमांचक चुनौती बन सके। छात्र-छात्राओं ने बड़े ही उत्साह और जोश के साथ इस पारंपरिक आयोजन में हिस्सा लिया।
हांडी फोड़ने के लिए विद्यार्थियों ने सामूहिक प्रयास करते हुए एक-दूसरे का भरपूर सहयोग किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने मानव-पिरामिड बनाकर हांडी तक पहुंचने का प्रयास किया, जो कार्यक्रम का सबसे रोमांचक क्षण साबित हुआ। एक के ऊपर एक चढ़ते हुए विद्यार्थियों ने अद्भुत तालमेल और सहयोग का प्रदर्शन किया। इस दौरान परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा और उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं महाविद्यालय स्टाफ ने तालियां बजाकर तथा जयकारे लगाकर प्रतिभागियों का जमकर उत्साहवर्धन किया।
दही-हांडी फोड़ने के दौरान विद्यार्थियों में सामूहिकता, सहयोग, समन्वय एवं टीम भावना का बेहद सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला, जो इस बात का प्रमाण था कि किस प्रकार पारंपरिक आयोजन भी विद्यार्थियों में टीम वर्क और आपसी सहयोग की भावना विकसित करने का माध्यम बन सकते हैं। जैसे ही हांडी फूटी, वैसे ही समूचे परिसर में विद्यार्थियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। चारों ओर श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया। इस आयोजन ने जन्माष्टमी के पारंपरिक स्वरूप को न केवल जीवंत किया, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं लोक परंपराओं से भावनात्मक रूप से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।
कार्यक्रम का समापन एवं आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. शिव शंकर भरतपुरे ने औपचारिक आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन तभी सफल हो पाते हैं जब पूरा महाविद्यालय परिवार मिलकर एकजुटता के साथ प्रयास करता है, और इस अवसर पर सभी का सहयोग सराहनीय रहा।
इस भव्य कार्यक्रम में डॉ. सुरेंद्र जीतपुरे, डॉ. गजानन ठाकरे, डॉ. विकेश सिंह, प्रोफेसर हरिकिशन कोगे, प्रोफेसर आशीष धोटे, प्रोफेसर प्रमोद गायकवाड, डॉ. शिव शंकर भरतपुरे, सुश्री खुशबू कापसे, सुश्री सीमा अडलक, श्री राजेश ठाकरे, श्री अजय धुर्वे एवं श्री गौतम उबनारे सहित महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्य तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस पावन पर्व को सफल एवं यादगार बनाया।
कुल मिलाकर, शासकीय महाविद्यालय आठनेर में आयोजित यह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं का एक सुंदर संगम रहा। इस आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन और गीता के संदेशों से अवगत कराया, बल्कि दही-हांडी जैसे पारंपरिक खेल के माध्यम से उनमें एकता, सहयोग, अनुशासन एवं भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित की।
यह कार्यक्रम इस बात का एक जीवंत उदाहरण रहा कि किस प्रकार शैक्षणिक संस्थान अपने विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए, उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से भी जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। पूरे महाविद्यालय परिसर में हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ यह आयोजन सकुशल संपन्न हुआ, और विद्यार्थियों के चेहरों पर छाई खुशी इस बात का प्रमाण थी कि यह पर्व उनके लिए कितना विशेष और यादगार रहा।

