कब्रों के ऊपर से गुजारी गई क्रेन और JCB? खंडवा के बड़ा कब्रिस्तान में विवाद, कमेटी भंग
पेड़ों की कटाई के दौरान भारी मशीनों के इस्तेमाल पर समाजजनों ने जताई नाराजगी, कई कब्रों को नुकसान पहुंचाने का आरोप; पुलिस और वन विभाग ने शुरू की जांच
खंडवा। शहर के बड़ा कब्रिस्तान में पेड़ों की कटाई के दौरान क्रेन, जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसी भारी मशीनों के इस्तेमाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। समाजजनों का आरोप है कि मशीनों को कब्रों के ऊपर और उनके बीच से गुजारा गया, जिससे कई कब्रों को नुकसान पहुंचा। कुछ कब्रों पर लगे नाम और पहचान के निशान भी कथित रूप से मिट गए। मामले के सामने आने के बाद समाज के लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई। विवाद बढ़ने पर कब्रिस्तान की देखरेख करने वाली कमेटी को भंग कर दिया गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने कब्रिस्तान परिसर का निरीक्षण करते हुए पेड़ों की कटाई, मशीनों के इस्तेमाल और कब्रों को पहुंचे कथित नुकसान से संबंधित जानकारी जुटाई। प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की जांच की जा रही है।
मां की कब्र पर पहुंचे व्यक्ति ने देखा नुकसान
बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह एक व्यक्ति अपनी मां की कब्र पर पहुंचा था। वहां कब्र की स्थिति देखकर उसने नाराजगी जताई और इसकी जानकारी समाज के अन्य लोगों को दी। इसके बाद बड़ी संख्या में समाजजन कब्रिस्तान पहुंचे। लोगों ने परिसर में मौजूद मशीनों और पेड़ों की कटाई को लेकर सवाल उठाए।
समाजजनों का कहना है कि पेड़ों को काटने और उनकी लकड़ियां बाहर ले जाने के लिए भारी मशीनों का उपयोग किया गया। आरोप है कि मशीनों के आवागमन के लिए कब्रों के बीच से रास्ता बनाया गया और इस दौरान कुछ कब्रों के ऊपर से भी वाहन निकाले गए। इससे कब्रों की मिट्टी दब गई तथा कई जगह उनके मूल स्वरूप और पहचान को नुकसान पहुंचा।
कब्रों के नाम और पहचान मिटने का आरोप
लोगों के अनुसार बड़ा कब्रिस्तान काफी पुराना है और यहां बड़ी संख्या में कब्रें मौजूद हैं। इनमें कई कब्रों पर नाम या पहचान से संबंधित निशान लगाए गए थे। मशीनें चलाए जाने के कारण कुछ निशान हटने अथवा मिटने की बात कही जा रही है। समाजजनों ने आशंका जताई कि पहचान मिटने से भविष्य में परिजनों को अपने दिवंगत सदस्यों की कब्र तलाशने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि कितनी कब्रों को नुकसान पहुंचा है, इसकी आधिकारिक संख्या अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
अनुमति और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद समाजजनों ने पेड़ों की कटाई की अनुमति और भारी मशीनों के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कब्रिस्तान परिसर में पेड़ों की कटाई आवश्यक थी, तो यह काम पूरी सावधानी और समाज के जिम्मेदार लोगों की निगरानी में किया जाना चाहिए था।
लोगों ने यह भी पूछा कि कब्रों के बीच मशीनें ले जाने की अनुमति किसने दी और काम शुरू करने से पहले कब्रों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। संवेदनशील स्थान होने के बावजूद कथित रूप से पर्याप्त सावधानी नहीं बरते जाने को लेकर समाज में आक्रोश है।
पेड़ों की कटाई को लेकर भी जांच शुरू
सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि कब्रिस्तान परिसर में कितने पेड़ काटे गए और उनके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
पेड़ों की कटाई नियमों के अनुसार हुई अथवा इसमें किसी तरह की अनियमितता बरती गई, इसकी स्थिति जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी। अधिकारियों द्वारा मौके पर मौजूद लकड़ी, कटे हुए पेड़ों और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आई है।
कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जुटाई जानकारी
विवाद की सूचना पर कोतवाली पुलिस भी बड़ा कब्रिस्तान पहुंची। पुलिस ने वहां उपस्थित लोगों से बातचीत की और घटना से संबंधित जानकारी ली। पुलिस का ध्यान इस बात पर भी है कि मशीनें किसके निर्देश पर बुलाई गई थीं और पेड़ों की कटाई का काम किस संस्था अथवा व्यक्ति द्वारा कराया जा रहा था।
मामला धार्मिक भावनाओं और कब्रों की गरिमा से जुड़ा होने के कारण पुलिस स्थिति पर नजर रख रही है। समाजजनों से शांति बनाए रखने तथा जांच में सहयोग करने की अपील भी की गई है।
विवाद के बाद कब्रिस्तान कमेटी भंग
मामले को लेकर समाज में बढ़ती नाराजगी के बीच बड़ा कब्रिस्तान की देखरेख करने वाली कमेटी को भंग कर दिया गया। बताया जा रहा है कि कमेटी की कार्यप्रणाली, पेड़ों की कटाई के निर्णय और मशीनों के इस्तेमाल को लेकर समाजजनों ने असंतोष जताया था।
कमेटी को भंग किए जाने के बाद कब्रिस्तान की आगामी व्यवस्था किसके हाथ में रहेगी और नई कमेटी का गठन कब होगा, इसे लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। समाज के वरिष्ठ लोगों द्वारा व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने और भविष्य में किसी भी कार्य से पहले सामूहिक सहमति लेने की मांग की जा रही है।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल कब्रों को पहुंचे नुकसान, पेड़ों की कटाई की अनुमति और भारी मशीनों के इस्तेमाल की जिम्मेदारी को लेकर जांच जारी है। आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। समाजजनों ने दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई, क्षतिग्रस्त कब्रों को दोबारा व्यवस्थित करने तथा उनकी पहचान सुरक्षित करने की मांग की है।
यह घटना कब्रिस्तान जैसे संवेदनशील स्थल पर किसी भी निर्माण, सफाई या पेड़ कटाई के कार्य के दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। अब पुलिस और वन विभाग की जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
