Krishna Janmashtami 2026: आज मनाई जा रही जन्माष्टमी, जानें श्रीकृष्ण पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
Krishna Janmashtami 2026 Shubh Muhurat: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी आज देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में धरती पर अवतार लिया था। इस दिन भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों और घरों में विशेष सजावट की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है। कई जगहों पर झांकियां सजाई जाती हैं और मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद उनका अभिषेक कर आरती की जाती है।
रात में किया जाता है श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी की पूजा के लिए रात का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
भक्त मध्यरात्रि के आसपास भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। इस दौरान बाल गोपाल को स्नान कराया जाता है और उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। इसके बाद उनका श्रृंगार करके उन्हें झूले में विराजमान किया जाता है।
जन्म के समय शंख और घंटियां बजाई जाती हैं। इसके बाद भगवान की आरती की जाती है और भक्तों में प्रसाद बांटा जाता है।
जन्माष्टमी पर कैसे करें पूजा?
जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या बाल गोपाल की मूर्ति स्थापित की जाती है।
पूजा के लिए सबसे पहले भगवान को पंचामृत से स्नान कराया जा सकता है। इसके बाद साफ जल से अभिषेक करके उन्हें पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं। भगवान को चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित किया जाता है।
श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है, इसलिए पूजा में माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद भी अर्पित किए जा सकते हैं।
मध्यरात्रि पूजा का विशेष महत्व
जन्माष्टमी की पूजा में मध्यरात्रि का समय सबसे खास माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी समय हुआ था। इसलिए भक्त रात में निर्धारित शुभ मुहूर्त में पूजा करते हैं।
मध्यरात्रि पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक, श्रृंगार और आरती की जाती है। इसके बाद जन्मोत्सव मनाया जाता है। कई भक्त भगवान को पालने में झुलाते हैं और श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में भजन-कीर्तन करते हैं।
पूजा समाप्त होने के बाद भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसके साथ उनका व्रत भी पूरा होता है।
जन्माष्टमी व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान और भजन करते हैं। कई लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार करके व्रत रखते हैं। व्रत की पद्धति व्यक्ति की धार्मिक परंपरा और क्षमता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
व्रत रखने वाले लोगों को सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए। पूजा के दौरान भगवान को तुलसी दल जरूर अर्पित करने की परंपरा है। हालांकि तुलसी दल हमेशा स्वच्छ और श्रद्धापूर्वक अर्पित करना चाहिए।
श्रीकृष्ण को क्या भोग लगाएं?
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके साथ ही धनिया पंजीरी, पंचामृत, फल, मिठाई और अन्य सात्विक व्यंजन भी भोग में रखे जा सकते हैं।
भगवान के बाल स्वरूप की पूजा करने वाले भक्त उन्हें प्रेमपूर्वक भोग लगाते हैं और फिर प्रसाद परिवार के सदस्यों तथा अन्य भक्तों में वितरित करते हैं।
पूजा में इन मंत्रों का कर सकते हैं जाप
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के दौरान भक्त उनके मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” श्रीकृष्ण का प्रमुख मंत्र माना जाता है। इसके अलावा भक्त हरे कृष्ण महामंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
मंत्र जाप के साथ भगवान श्रीकृष्ण की आरती और भजन करने से पूजा का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
देशभर में दिखेगा जन्माष्टमी का उत्साह
जन्माष्टमी के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं।
कुल मिलाकर जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी मनाने के साथ-साथ उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करने का भी पर्व है। इस दिन भक्त श्रद्धा, भक्ति और नियम के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करने से भक्तों को सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
