मनमाड़-इंदौर नई रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण तेज, नासिक में 81 और कसरावद में 37 हेक्टेयर जमीन की प्रक्रिया आगे बढ़ी
Manmad-Indore Railway Project: महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई तेज, नासिक में ₹71.15 करोड़ से अधिक का अंतिम मुआवजा निर्धारित; बड़वानी जिले में बड़े स्तर पर भूमि की जरूरत
सेंधवा/बड़वानी। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली महत्वाकांक्षी मनमाड़-इंदौर नई रेल लाइन परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। परियोजना के लिए दोनों राज्यों में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जारी है। नासिक जिले में 81.6441 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए अंतिम मुआवजा निर्धारित किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश के कसरावद तहसील के छह गांवों में 37.613 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की अंतिम घोषणा की गई है।
दोनों क्षेत्रों को मिलाकर फिलहाल 119.2571 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में बताई गई है। करीब 309.43 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के निर्माण के लिए अलग-अलग जिलों में बड़े स्तर पर जमीन की आवश्यकता होगी।
नासिक में 81.6441 हेक्टेयर भूमि के लिए मुआवजा तय
मनमाड़-इंदौर रेल लाइन परियोजना महाराष्ट्र के नासिक जिले से होकर गुजरेगी। यहां परियोजना के लिए 81.6441 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
इस जमीन के लिए 71 करोड़ 15 लाख 98 हजार 918 रुपये का अंतिम मुआवजा निर्धारित किया गया है। भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ने से रेल परियोजना के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने का रास्ता साफ होगा।
नई रेल लाइन के लिए जमीन उपलब्ध होना परियोजना का अहम चरण है, क्योंकि इसके बाद ट्रैक निर्माण और इससे संबंधित अन्य आधारभूत संरचनाओं के कार्यों को गति दी जा सकेगी।
कसरावद के छह गांवों में 37.613 हेक्टेयर जमीन
मध्य प्रदेश में भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कसरावद तहसील के छह गांवों में कुल 37.613 हेक्टेयर भूमि रेल परियोजना के लिए अधिग्रहित किए जाने की अंतिम घोषणा केंद्र सरकार द्वारा की गई है।
इस तरह नासिक की 81.6441 हेक्टेयर और कसरावद की 37.613 हेक्टेयर जमीन को जोड़ने पर कुल 119.2571 हेक्टेयर भूमि की प्रक्रिया सामने आती है।
रेल लाइन के प्रस्तावित मार्ग में आने वाले अन्य क्षेत्रों में भी भूमि अधिग्रहण परियोजना की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
करीब 309.43 किलोमीटर लंबी होगी नई रेल लाइन
मनमाड़ से इंदौर के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन की लंबाई करीब 309.43 किलोमीटर बताई गई है। इसे ब्रॉडगेज रेल लाइन के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और महाराष्ट्र के बीच नई रेल कनेक्टिविटी विकसित होने की उम्मीद है। विशेष रूप से रेल नेटवर्क से अपेक्षाकृत कम जुड़े क्षेत्रों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मनमाड़ पहले से देश के महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल है। इंदौर भी मध्य प्रदेश का प्रमुख व्यावसायिक और औद्योगिक केंद्र है। ऐसे में दोनों शहरों को नई रेल लाइन से जोड़ने की परियोजना यात्री और माल परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
बड़वानी जिले में बड़े स्तर पर जमीन की जरूरत
परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से भी जुड़ा है। प्रस्तावित रेल मार्ग के लिए यहां बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की जरूरत बताई गई है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण कार्य के लिए रास्ता तैयार होगा। जमीन के सर्वे, अधिग्रहण, मुआवजा निर्धारण और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाएं किसी भी नई रेल परियोजना के निर्माण से पहले महत्वपूर्ण चरण होती हैं।
स्थानीय स्तर पर भी इस परियोजना की प्रगति पर लोगों की नजर बनी हुई है, क्योंकि रेल लाइन बनने से क्षेत्र में यातायात के नए विकल्प विकसित होने की उम्मीद है।
निमाड़ क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही परियोजना
मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल के लिए विशेष महत्व रखती है। नई रेल लाइन से उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है जहां अभी सीधी रेल कनेक्टिविटी सीमित है।
रेल लाइन के शुरू होने के बाद यात्रियों को नए यात्रा विकल्प मिलने के साथ व्यापारिक गतिविधियों और माल परिवहन को भी लाभ मिलने की संभावना है। कृषि उत्पादों और स्थानीय व्यापार के लिए बड़े बाजारों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद भी इस परियोजना से जुड़ी हुई है।
हालांकि वास्तविक लाभ परियोजना पूरी होने, स्टेशनों की अंतिम स्थिति, ट्रेन संचालन और माल परिवहन संबंधी व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।
भूमि अधिग्रहण पूरा होना बड़ी चुनौती
इतनी लंबी नई रेल लाइन के लिए अलग-अलग जिलों और गांवों में जमीन की आवश्यकता होती है। इसलिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है।
महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के कसरावद में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में प्रस्तावित मार्ग के अन्य हिस्सों में भूमि अधिग्रहण और निर्माण से संबंधित गतिविधियों पर भी नजर रहेगी।
