NGT का सवाल- 168 से ज्यादा ईंट भट्टे आखिर किसकी अनुमति से चल रहे? कलेक्टर समेत 3 अधिकारियों से मांगा जवाब
नागदा क्षेत्र में ईंट भट्टों और प्रदूषण को लेकर एनजीटी सख्त, 3 मीटर की अनुमति के मुकाबले कुछ स्थानों पर 8 मीटर तक मिट्टी खोदने का उल्लेख; आबादी और आंगनवाड़ी के करीब भट्टों के संचालन पर भी चिंता
संवाददाता: प्रमोद कुमार जैन
नागदा। क्षेत्र में बड़ी संख्या में संचालित ईंट भट्टों और उनसे होने वाले संभावित पर्यावरणीय नुकसान को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी के समक्ष पेश संयुक्त समिति की रिपोर्ट में क्षेत्र में 168 से अधिक ईंट भट्टे संचालित होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के आधार पर अधिकरण ने इनके संचालन, मिट्टी के उत्खनन और प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
रिपोर्ट में इन भट्टों से करीब 4 करोड़ ईंटों के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। इसके लिए लगभग एक लाख टन मिट्टी और करीब 4 हजार टन कोयले के उपयोग की बात कही गई है। कई इकाइयों में आवश्यक नियामकीय व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
3 मीटर की अनुमति, कुछ जगह 8 मीटर तक खुदाई
मिट्टी के उत्खनन को लेकर रिपोर्ट में गंभीर स्थिति का उल्लेख किया गया है। इसमें कुछ स्थानों पर करीब 8 मीटर गहराई तक मिट्टी खोदे जाने की बात सामने आई, जबकि अनुमत सीमा 3 मीटर बताई गई है।
अधिक गहराई तक मिट्टी निकालने से उपजाऊ भूमि को नुकसान पहुंचने के साथ बड़े गड्ढे बनने और उनमें जलभराव जैसी समस्याओं का खतरा रहता है। एनजीटी ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया है।
आबादी के बेहद करीब मिले ईंट भट्टे
संयुक्त समिति की रिपोर्ट में कुछ ईंट भट्टों की रिहायशी क्षेत्रों से दूरी को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ भट्टे घरों से महज 10 मीटर, जबकि आंगनवाड़ी केंद्र से करीब 65 मीटर की दूरी पर संचालित पाए गए।
ईंट भट्टों से निकलने वाले धुएं और धूल के कारण आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। रिपोर्ट में सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषकों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।
कलेक्टर समेत तीन अधिकारियों से व्यक्तिगत शपथ-पत्र
एनजीटी ने मामले में उज्जैन कलेक्टर, माइनिंग ऑफिसर और संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी को व्यक्तिगत शपथ-पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को स्पष्ट करना होगा कि मौजूदा नियमों के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में ईंट भट्टे व्यावसायिक रूप से किस आधार पर संचालित हो रहे हैं और उनके संचालन पर प्रशासनिक एवं नियामकीय नियंत्रण की स्थिति क्या रही।
निर्धारित समय तक शपथ-पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना पड़ सकता है।
राज्य सरकार को कार्रवाई और SOP बनाने के निर्देश
एनजीटी ने राज्य सरकार को नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर ईंट भट्टा संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं को लागू कराने के लिए कहा गया है।
इसके साथ ही राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ईंट भट्टों के संचालन को व्यवस्थित और नियंत्रित करने के लिए SOP (Standard Operating Procedure) तैयार करने तथा उसकी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
एनजीटी की सख्ती के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि क्षेत्र में 168 से अधिक ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं तो उन्हें किन अनुमतियों के आधार पर चलाया जा रहा है और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई।
