खरगौन में मना श्रीकृष्ण पर्व, नृत्य-नाट्य और कथा के जरिए जीवंत हुईं भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं
‘Krishnayan’ कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और अनकहे प्रसंगों का हुआ मंचन, बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग
लोकेशन : बरेली
ब्यूरो चीफ : रायसेन उमेश चौबे
रायसेन। जिले की बरेली तहसील के ग्राम जामगढ़ के निकट विंध्याचल क्षेत्र में स्थित जामवंत गुफा भगवान श्रीकृष्ण, जामवंत और स्यमंतक मणि से जुड़े पौराणिक प्रसंगों के कारण विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। इसी पौराणिक विरासत को केंद्र में रखते हुए बुधवार को खरगौन में मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा श्रीकृष्ण पर्व के तहत विशेष कार्यक्रम ‘Krishnayan’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन, उनकी विविध लीलाओं और उनसे जुड़े प्रसंगों को नृत्य, नाट्य और कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।
‘Krishnayan’ रहा कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘कृष्णायन : सुनो वो जो कभी कहा नहीं गया’ शीर्षक से प्रस्तुत श्रीकृष्ण केंद्रित संगीतमयी प्रस्तुति रही। कलाकारों ने संगीत, नृत्य और अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं को मंच पर साकार किया।
प्रस्तुति में श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े ऐसे भावों, प्रसंगों और दृष्टिकोणों को सामने लाने का प्रयास किया गया, जो उनकी विराट कथा के बीच अक्सर अनकहे रह जाते हैं। कलाकारों की प्रस्तुति और संगीत ने कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
इसके पूर्व श्रीकृष्ण केंद्रित महानाट्य का मंचन भी किया गया। महानाट्य का निर्देशन उज्जैन के शिरीष राजपुरोहित द्वारा किया गया। नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न चरणों और उनके व्यक्तित्व के विविध आयामों को दर्शाया गया।

नृत्य और नाट्य से जीवंत हुआ कृष्ण का जीवन दर्शन
‘कृष्णायन’ कार्यक्रम में श्रीकृष्ण को केवल धार्मिक पात्र के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उनके जीवन दर्शन, व्यक्तित्व और विचारों को भी मंच पर उकेरने का प्रयास किया गया। बाल्यकाल से लेकर उनके जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को नृत्य, संवाद, संगीत और अभिनय के माध्यम से दर्शाया गया।
कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन में मौजूद करुणा, प्रेम, वीरता, कर्तव्य, नीति और लोककल्याण जैसे विभिन्न भावों को दर्शकों तक पहुंचाया। कार्यक्रम का उद्देश्य श्रीकृष्ण की कथाओं को नई पीढ़ी तक सांस्कृतिक और कलात्मक माध्यम से पहुंचाना भी रहा।
जामगढ़ और जामवंत गुफा का पौराणिक महत्व
रायसेन जिले की बरेली तहसील के जामगढ़ के निकट स्थित जामवंत गुफा स्थानीय लोक मान्यताओं और श्रीकृष्ण से जुड़े पौराणिक प्रसंगों के कारण महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता के अनुसार स्यमंतक मणि की खोज के प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण का सामना जामवंत से इसी गुफा में हुआ था।
पौराणिक कथा के अनुसार स्यमंतक मणि की खोज करते हुए भगवान श्रीकृष्ण जामवंत की गुफा तक पहुंचे। यहां उनका जामवंत से सामना हुआ और दोनों के बीच लंबे समय तक युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान जामवंत ने भगवान श्रीकृष्ण में अपने आराध्य भगवान राम के स्वरूप का दर्शन किया।
इसके बाद जामवंत ने श्रीकृष्ण को स्यमंतक मणि सौंप दी। इसी प्रसंग से जुड़ी मान्यता के अनुसार जामवंत ने अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह भगवान श्रीकृष्ण से कराया। यही कारण है कि जामगढ़ और जामवंत गुफा को स्थानीय स्तर पर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में माना जाता है।

‘श्रीकृष्ण पाथेय’ में शामिल है जामगढ़
कार्यक्रम में स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में श्रीकृष्ण पर्व बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रवासियों के लिए गौरव की बात है कि उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में शामिल जामगढ़ को भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल के रूप में भी माना जाता है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने जामगढ़ को ‘श्रीकृष्ण पाथेय’ में भी शामिल किया है। इससे इस क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को व्यापक स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों और उनकी सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों से लोगों को अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का अवसर
श्रीकृष्ण पर्व के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ कला और संस्कृति को भी एक मंच प्रदान किया। नृत्य, संगीत, नाट्य और कथा के माध्यम से प्रस्तुत कार्यक्रम ने दर्शकों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके दर्शन से परिचित कराया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आमजन की मौजूदगी रही। स्थानीय लोगों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र की पौराणिक पहचान को भी करीब से महसूस किया।
जामगढ़ और जामवंत गुफा जैसे स्थलों की पौराणिक मान्यताओं को सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जोड़ने से क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को सामने लाने का प्रयास भी दिखाई दिया।

धार्मिक पर्यटन को मिल सकता है बढ़ावा
जामगढ़ और जामवंत गुफा से जुड़ी मान्यताओं के कारण क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं भी मौजूद हैं। श्रीकृष्ण पर्व जैसे आयोजनों के माध्यम से इन स्थलों की जानकारी प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकती है।
‘श्रीकृष्ण पाथेय’ में जामगढ़ को शामिल किए जाने के बाद क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को लेकर लोगों की रुचि बढ़ने की संभावना है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, लोक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।
खरगौन में आयोजित ‘कृष्णायन’ कार्यक्रम इसी दिशा में एक सांस्कृतिक प्रयास के रूप में सामने आया, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन को कला के विभिन्न माध्यमों के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया गया।
कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने आयोजन की सराहना की और कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित होने चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी अपने इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित हो सके।

