संयम और आत्मशुद्धि का माध्यम है धार्मिक आराधना : आर्यिका संगममति
अम्बाह में निकली भव्य णमोकार महामंत्र आरती शोभायात्रा, जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा
मुरैना/अम्बाह (मनोज जैन नायक) । जैन बगीची अम्बाह में चातुर्मासरत परम पूज्य गुरु मां गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ने कहा कि धार्मिक आराधना का उद्देश्य केवल बाहरी अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, इंद्रिय संयम और जीवन में सदाचार को अपनाना है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि का जैन धर्म में विशेष महत्व है। इस अवसर पर उपवास, संयम और धार्मिक साधना के माध्यम से आत्मकल्याण की भावना को मजबूत किया जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धापूर्वक सहभागी बनने और संयम एवं सदाचार को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि धर्म की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब धार्मिक साधना का प्रभाव व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में दिखाई दे।
35 दिवसीय णमोकार महामंत्र जाप अनुष्ठान
जैन बगीची अम्बाह के विशाल प्रांगण में आचार्य श्री सिद्धांत सागर महाराज की शिष्या परम पूज्य गुरु मां गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य में 35 दिवसीय णमोकार महामंत्र जाप अनुष्ठान चल रहा है। इसी अनुष्ठान के अंतर्गत भव्य धार्मिक आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान नगर में णमोकार महामंत्र की भव्य आरती शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं और नागरिकों द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। धार्मिक जयघोष और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण धर्ममय नजर आया।

नगर में निकली भव्य आरती शोभायात्रा
णमोकार महामंत्र के पुण्यार्जक परिवार श्रीमती शकुंतला देवी जैन, धर्मपत्नी स्वर्गीय श्री खूबचंद जैन, दिलीप कुमार-श्रीमती मीना जैन, हेमंत कुमार-श्रीमती चंचल जैन, अभिलाष कुमार-श्रीमती शिवानी जैन, अमन जैन, सिद्धार्थ जैन एवं समस्त चडोसिया परिवार, अम्बाह की ओर से भव्य णमोकार महामंत्र आरती का आयोजन किया गया।
आरती शोभायात्रा नगर पालिका चौराहे से प्रारंभ हुई। इसके बाद यात्रा जश्ववर रोड और परेड चौराहा होते हुए जैन बगीची प्रांगण पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव से आरती करते हुए आगे बढ़े। नगर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या और धार्मिक जयघोष के कारण शोभायात्रा के दौरान पूरा मार्ग भक्तिमय नजर आया। महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने भी उत्साह के साथ धार्मिक आयोजन में सहभागिता की।
एक घंटे तक गूंजा णमोकार महामंत्र
शोभायात्रा के जैन बगीची प्रांगण पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीजी की आरती की। इसके पश्चात करीब एक घंटे तक सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप किया गया।
सामूहिक जाप के दौरान णमोकार महामंत्र की गूंज से पूरा जैन बगीची परिसर आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ जाप अनुष्ठान में सहभागिता की।
सामूहिक जाप के दौरान श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। धार्मिक आयोजन के कारण जैन बगीची परिसर में लंबे समय तक आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

धर्म और साधना में उमड़ा जनसमूह
35 दिवसीय णमोकार महामंत्र जाप अनुष्ठान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। अनुष्ठान के दौरान महिला-पुरुष, युवा, बच्चे और बुजुर्ग सभी वर्गों के लोग धर्म साधना में सहभागी बन रहे हैं।
सामूहिक जाप और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक चेतना, संयम और आत्मकल्याण की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि सामूहिक रूप से महामंत्र का जाप करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में चल रहे इस 35 दिवसीय अनुष्ठान के कारण अम्बाह में जैन समाज के बीच धार्मिक उत्साह का वातावरण बना हुआ है। विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में समाज के लोग बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
धार्मिक आयोजन का मुख्य संदेश यही रहा कि धर्म केवल पूजा और अनुष्ठान तक सीमित न रहे, बल्कि व्यक्ति के जीवन में संयम, सदाचार, आत्मशुद्धि और सकारात्मक आचरण के रूप में दिखाई दे। श्रद्धालुओं ने णमोकार महामंत्र का जाप करते हुए आत्मकल्याण और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

