MP के किसानों के लिए CM मोहन यादव के बड़े ऐलान, उद्यानिकी पर 2 लाख की मदद; दिन में मिलेगी 10 घंटे बिजली
MP Farmers News: ग्वालियर में बलराम जयंती महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए की कई घोषणाएं, एक एकड़ में उद्यानिकी फसल लगाने पर 2 लाख रुपये तक सहायता की बात; KCC पोर्टल और कवच योजना की भी शुरुआत
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। ग्वालियर के मेला मैदान में आयोजित बलराम जयंती महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए अब रात के बजाय दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई किसान अपने एक एकड़ खेत में उद्यानिकी फसल लगाता है तो सरकार की ओर से उसे 2 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ अधिक आय देने वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े KCC पोर्टल, कवच योजना और अपेक्स बैंक कार्यालय से जुड़ी पहल का भी शुभारंभ किया गया।
किसानों को दिन में मिलेगी 10 घंटे बिजली
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की सिंचाई से जुड़ी बड़ी समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि अब उन्हें खेतों में सिंचाई के लिए रात में जाने की जरूरत कम होगी। सरकार किसानों को दिन के समय 10 घंटे बिजली देने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रात में बिजली मिलने के कारण किसानों को खेतों तक जाना पड़ता था। इस दौरान दुर्घटनाओं सहित कई प्रकार के जोखिम बने रहते थे। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय खेतों में सिंचाई करना किसानों के लिए परेशानी का कारण बनता रहा है।
उन्होंने कहा कि इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
एक एकड़ उद्यानिकी पर 2 लाख रुपये की सहायता
किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार उद्यानिकी खेती को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अगर एक एकड़ जमीन में उद्यानिकी फसल लगाता है तो सरकार उसे 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देगी।
उद्यानिकी के तहत फल, सब्जियों, फूलों और अन्य बागवानी फसलों की खेती की जाती है। सामान्य फसलों की तुलना में कई उद्यानिकी फसलें किसानों को अधिक आय देने की क्षमता रखती हैं, हालांकि इनमें शुरुआती निवेश और तकनीकी जानकारी की जरूरत भी अधिक हो सकती है।
सरकार की आर्थिक सहायता से किसानों पर शुरुआती लागत का बोझ कम करने और उन्हें नई फसलों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी।
किसानों की आमदनी बढ़ाने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए सिंचाई, बिजली, कृषि ऋण और आधुनिक खेती से संबंधित योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उद्यानिकी खेती को बढ़ावा देना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। किसान यदि परंपरागत फसलों के साथ फल-सब्जी या अन्य व्यावसायिक फसलों की खेती करते हैं तो उनकी आय के नए स्रोत तैयार हो सकते हैं।
हालांकि सहायता प्राप्त करने की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, किन उद्यानिकी फसलों को योजना में शामिल किया जाएगा और राशि किस तरह जारी होगी, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक गाइडलाइन से स्पष्ट होगी।
मध्य प्रदेश में 31 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का दावा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में बिजली की कमी नहीं है और वर्तमान में प्रदेश में लगभग 31 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक करीब ढाई साल पहले प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 25 हजार मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 31 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती बिजली उपलब्धता का फायदा किसानों सहित घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को देने का प्रयास किया जा रहा है।
रात में सिंचाई की परेशानी से किसानों को मिलेगी राहत
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को लंबे समय से रात में सिंचाई के लिए बिजली मिलने की शिकायत रहती है। खेतों में रात के समय जाना कई तरह से जोखिम भरा हो सकता है।
अंधेरा होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा रहता है। इसके अलावा सांप-बिच्छू और दूसरे जहरीले जीवों से भी किसानों को खतरा रहता है। सर्दियों के मौसम में रात में खेतों में सिंचाई करना और भी मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में यदि किसानों को नियमित रूप से दिन में 10 घंटे बिजली मिलती है तो इससे उनकी खेती और दैनिक दिनचर्या दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
KCC पोर्टल और कवच योजना की शुरुआत
बलराम जयंती महोत्सव के दौरान किसानों के लिए डिजिटल और वित्तीय सुविधाओं से जुड़ी पहल भी सामने आई। कार्यक्रम में KCC पोर्टल और कवच योजना का शुभारंभ किया गया।
किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC किसानों को खेती से संबंधित जरूरतों के लिए संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने का एक प्रमुख माध्यम है। डिजिटल व्यवस्था मजबूत होने से किसानों के लिए इससे जुड़ी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा अपेक्स बैंक से संबंधित कार्यालय की शुरुआत भी कार्यक्रम में की गई।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस के पूर्व शासन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को बिजली और पानी के लिए परेशान होना पड़ता था, जबकि वर्तमान सरकार कृषि क्षेत्र के लिए बिजली सहित दूसरी बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन में हुई बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए इसे सरकार की उपलब्धि बताया।
उद्यानिकी खेती से किसानों के लिए खुल सकते हैं नए विकल्प
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख कृषि राज्यों में शामिल है। गेहूं, सोयाबीन, चना और अन्य पारंपरिक फसलों के साथ प्रदेश के कई हिस्सों में फल-सब्जियों और मसालों की खेती भी बड़े स्तर पर की जाती है।
उद्यानिकी को बढ़ावा देने से किसानों को फसल विविधीकरण का विकल्प मिल सकता है। एक ही तरह की फसल पर निर्भरता कम होने से बाजार और मौसम से जुड़े कुछ जोखिमों को संतुलित करने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि उद्यानिकी खेती के लिए बेहतर सिंचाई, बाजार तक पहुंच, कोल्ड स्टोरेज और परिवहन जैसी सुविधाओं की भी आवश्यकता होती है। ऐसे में आर्थिक सहायता के साथ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
किसानों के लिए घोषणाओं का क्या होगा असर?
ग्वालियर में मुख्यमंत्री की घोषणाओं में सबसे ज्यादा चर्चा दिन में 10 घंटे बिजली और एक एकड़ में उद्यानिकी खेती पर 2 लाख रुपये तक की सहायता की हो रही है।
यदि इन घोषणाओं को व्यापक स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो प्रदेश के किसानों को सिंचाई व्यवस्था में राहत मिलने के साथ खेती में विविधता लाने का अवसर मिल सकता है।
अब किसानों की नजर इन घोषणाओं से संबंधित विस्तृत सरकारी दिशा-निर्देशों पर रहेगी। योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और सहायता वितरण की शर्तें सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश के कितने किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
