भारत सीमा के पास बांग्लादेश ने खोला ड्रोन वॉरफेयर स्कूल, क्या बढ़ेगी बॉर्डर पर निगरानी? जानिए क्या है मकसद
Bangladesh Drone School: सिलहट में BGB मुख्यालय में ‘शिमंतो स्कूल ऑफ सर्विलांस एंड ड्रोन वॉरफेयर’ शुरू, बांग्लादेश सरकार ने बताया सीमा सुरक्षा और तस्करी रोकना प्रमुख उद्देश्य
इंटरनेशनल डेस्क। भारत से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब बांग्लादेश ने निगरानी और ड्रोन तकनीक से जुड़ा एक नया प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है। सिलहट स्थित बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के मुख्यालय में ‘शिमंतो स्कूल ऑफ सर्विलांस एंड ड्रोन वॉरफेयर’ स्थापित किया गया है। भारत-बांग्लादेश सीमा के नजदीक इस तरह का विशेष प्रशिक्षण संस्थान शुरू होने के बाद इसकी भूमिका और भविष्य में सीमा निगरानी में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बांग्लादेश सरकार के मुताबिक इस प्रशिक्षण केंद्र का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक की मदद से सीमा की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाना तथा बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों को आधुनिक ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण देना है।
हालांकि भारत की जासूसी किए जाने जैसी आशंकाओं की कोई पुष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे जासूसी केंद्र बताने के बजाय फिलहाल बांग्लादेश की सीमा निगरानी क्षमता बढ़ाने की पहल के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
सिलहट में शुरू हुआ नया ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल
बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र में स्थित BGB मुख्यालय में नए स्कूल की शुरुआत की गई है। इसका नाम ‘शिमंतो स्कूल ऑफ सर्विलांस एंड ड्रोन वॉरफेयर’ रखा गया है।
यहां सीमा सुरक्षा से जुड़े जवानों को ड्रोन संचालन, निगरानी तकनीक और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम के इस्तेमाल से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने की योजना है।
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने इस प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया। सरकार का कहना है कि बदलती तकनीक और सीमा सुरक्षा की नई चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षाबलों को आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल में दक्ष बनाना जरूरी है।
क्यों बनाया गया ड्रोन वॉरफेयर स्कूल?
बांग्लादेश सरकार के अनुसार इस स्कूल को शुरू करने का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी को ज्यादा प्रभावी बनाना है। ड्रोन के जरिए उन क्षेत्रों की निगरानी भी की जा सकती है जहां सुरक्षाकर्मियों का नियमित रूप से पहुंचना कठिन होता है।
ड्रोन कैमरे बड़े इलाके की रियल टाइम निगरानी में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियों, तस्करी के संभावित रास्तों और दुर्गम इलाकों पर भी नजर रखने में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
आधुनिक सीमा प्रबंधन में दुनिया के कई देश ड्रोन, सेंसर, कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। बांग्लादेश की नई पहल को भी इसी दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है।
क्या भारत की जासूसी करेगा बांग्लादेश?
ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र भारत की सीमा के पास स्थापित होने के कारण सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इसके जरिए भारतीय सीमा क्षेत्र की निगरानी भी की जा सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई पुष्ट आधिकारिक दावा नहीं है कि इस स्कूल की स्थापना भारत की जासूसी करने के उद्देश्य से की गई है।
बांग्लादेश सरकार ने इसके उद्देश्यों में अपनी सीमा सुरक्षा मजबूत करने, तस्करी रोकने और गैरकानूनी गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही है। इसलिए किसी संभावित जासूसी गतिविधि को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
हालांकि सीमा के आसपास ड्रोन के इस्तेमाल से जुड़े घटनाक्रम पर दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों की नजर रहना स्वाभाविक है।
भारत-बांग्लादेश की लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा
भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह सीमा पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से होकर गुजरती है।
सीमा के कई हिस्सों में नदियां, खेत, जंगल और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे इलाकों में परंपरागत तरीके से निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के सामने तस्करी, अवैध आवाजाही और अन्य सीमा पार गतिविधियों को रोकने जैसी चुनौतियां रहती हैं। इसी वजह से तकनीक आधारित निगरानी का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
तस्करी रोकने में ड्रोन का हो सकता है इस्तेमाल
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि ड्रोन और आधुनिक निगरानी तकनीक का इस्तेमाल सीमा पर होने वाली तस्करी तथा दूसरी गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने में किया जाएगा।
ड्रोन के जरिए सुरक्षाबल दूर से ही किसी संदिग्ध गतिविधि का पता लगा सकते हैं। विशेष रूप से रात के समय या ऐसे दुर्गम इलाकों में जहां नियमित गश्त कठिन होती है, आधुनिक सर्विलांस सिस्टम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
यदि ड्रोन में आधुनिक कैमरे और अन्य सेंसर लगाए जाएं तो उनकी निगरानी क्षमता और बढ़ सकती है।
BGB जवानों को मिलेगी आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग
नए स्कूल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों को ड्रोन और सर्विलांस तकनीक के इस्तेमाल में प्रशिक्षित करना है।
आधुनिक युद्ध और सीमा सुरक्षा में मानव रहित हवाई प्रणालियों यानी UAV की भूमिका तेजी से बढ़ी है। ड्रोन का इस्तेमाल केवल सैन्य हमलों तक सीमित नहीं है। इनका उपयोग निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, आपदा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा में भी किया जाता है।
ऐसे में BGB अपने जवानों को नई तकनीक से परिचित कराकर सीमा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करना चाहता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है घटनाक्रम?
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशिक्षण केंद्र ऐसे क्षेत्र में स्थापित किया गया है जो भारतीय सीमा के अपेक्षाकृत करीब है।
भारत की सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली BSF पहले से ही कई क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल करती है। सीमा के दूसरी ओर भी ड्रोन आधारित निगरानी क्षमता बढ़ने पर तकनीकी समन्वय और ड्रोन संचालन से जुड़े नियमों का महत्व बढ़ सकता है।
विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन अनजाने या जानबूझकर दूसरे देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश न करें।
ड्रोन तकनीक बदल रही बॉर्डर सिक्योरिटी
दुनियाभर में सीमा सुरक्षा का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां मुख्य रूप से बाड़, चौकियों और जवानों की गश्त पर निर्भरता थी, वहीं अब ड्रोन, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, सेंसर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
ड्रोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम समय में बड़े इलाके की निगरानी की जा सकती है। दुर्गम क्षेत्रों में भी इनकी मदद से सुरक्षाबलों को महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
बांग्लादेश का नया ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल भी सीमा सुरक्षा में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का संकेत देता है।
फिलहाल बांग्लादेश ने इस स्कूल का घोषित उद्देश्य अपनी सीमा की निगरानी मजबूत करना और तस्करी समेत गैरकानूनी गतिविधियों को रोकना बताया है। ऐसे में भारत की ‘जासूसी’ से जुड़े दावों की पुष्टि के लिए ठोस आधिकारिक प्रमाण आवश्यक होंगे। आने वाले समय में इस प्रशिक्षण केंद्र की गतिविधियों और सीमा पर ड्रोन के वास्तविक इस्तेमाल से इसकी भूमिका ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी।
