MP में पिछले सत्र में 2,426 सरकारी स्कूल कम हुए। अब आने वाले पांच वर्षों में करीब 7 हजार छोटे स्कूलों के विलय का अनुमान है। दूसरी ओर ₹24,915 करोड़ की लागत से 773 सांदीपनि विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं।
MP School News: बड़ा बदलाव! अगले 5 साल में 7 हजार सरकारी स्कूल हो सकते हैं मर्ज, ₹24,915 करोड़ से बन रहे 773 सांदीपनि विद्यालय
मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, पिछले सत्र में 2,426 सरकारी स्कूल हुए बंद; 15 हजार से ज्यादा स्कूलों में 20 से भी कम विद्यार्थी
स्वराज वाणी संवाददाता
भोपाल। MP School News के तहत मध्य प्रदेश की सरकारी स्कूल शिक्षा व्यवस्था में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय सांदीपनि विद्यालयों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। दूसरी ओर कम छात्र संख्या वाले छोटे सरकारी स्कूलों को आसपास के बड़े विद्यालयों में मर्ज करने की प्रक्रिया भी जारी है।
यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन यानी UDISE Plus के आंकड़ों के अनुसार पिछले शैक्षणिक सत्र में मध्य प्रदेश में 2,426 सरकारी स्कूल कम हुए हैं। वहीं अगले पांच वर्षों में करीब 7 हजार और कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के बंद होने या दूसरे विद्यालयों में मर्ज होने का अनुमान जताया जा रहा है।
MP School News: ₹24,915 करोड़ से तैयार होंगे 773 सांदीपनि विद्यालय
मध्य प्रदेश में शासकीय सांदीपनि विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने की बड़ी योजना पर काम किया जा रहा है। योजना के दोनों चरणों में कुल 773 विद्यालयों पर करीब ₹24,915 करोड़ खर्च किए जाने की योजना है।
पहले चरण में 370 स्कूल शामिल बताए गए हैं। इनमें स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के विद्यालय शामिल हैं। इस चरण पर ₹13,525 करोड़ से अधिक खर्च किया जा रहा है और करीब 4.43 लाख विद्यार्थियों को प्रवेश देने का लक्ष्य है।
दूसरे चरण में 405 स्कूल प्रस्तावित हैं। इन पर ₹11,390 करोड़ से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इन विद्यालयों में करीब 4.05 लाख अतिरिक्त विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना है।
इस तरह दोनों चरणों में करीब 8.48 लाख विद्यार्थियों की क्षमता तैयार करने की योजना है।
हर 15 किलोमीटर के दायरे में सांदीपनि विद्यालय का मॉडल
प्रदेश सरकार का जोर ऐसे सर्वसुविधायुक्त विद्यालय विकसित करने पर है, जहां विद्यार्थियों को बेहतर भवन, पर्याप्त शिक्षक, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल सहित आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकें।
सांदीपनि विद्यालयों में आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है। बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
इसी व्यवस्था के कारण कम छात्र संख्या वाले आसपास के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को बड़े विद्यालयों में मर्ज किए जाने की संभावना बढ़ रही है।
15,170 सरकारी स्कूलों में 20 से भी कम विद्यार्थी
MP School News में सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का है। प्रदेश में करीब 15,170 सरकारी स्कूल ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है।
इन विद्यालयों में कई स्थानों पर अतिथि शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है। सांदीपनि विद्यालय पूरी क्षमता के साथ शुरू होने के बाद आसपास स्थित कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के विद्यार्थियों को इनमें स्थानांतरित किया जा सकता है।
योजना के तहत एक से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित छोटे विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी सांदीपनि विद्यालयों से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
मध्य प्रदेश में लगातार कम हुई सरकारी स्कूलों की संख्या
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सरकारी विद्यालयों की संख्या लगातार कम हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार स्थिति इस प्रकार रही—
2019-20 — 99,411 स्कूल
2020-21 — 99,152 स्कूल
2021-22 — 92,695 स्कूल
2022-23 — 92,441 स्कूल
2023-24 — 92,439 स्कूल
2024-25 — 92,250 स्कूल
2025-26 — 89,824 स्कूल
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में सरकारी विद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
₹36,730 करोड़ पहुंचा स्कूल शिक्षा बजट
एक तरफ सरकारी स्कूलों की संख्या कम हुई है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश सरकार का स्कूल शिक्षा पर खर्च बढ़ा है। स्कूल शिक्षा का बजट करीब ₹36,730 करोड़ तक पहुंच गया है।
दो वर्षों में बजट में करीब नौ हजार करोड़ रुपये की वृद्धि होने के बावजूद सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाना शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सरकार का फोकस अब केवल अधिक संख्या में विद्यालय संचालित करने के बजाय उपलब्ध संसाधनों को एकत्रित कर बेहतर सुविधाओं वाले स्कूल तैयार करने पर दिखाई दे रहा है।
छोटे स्कूल मर्ज होने से क्या बदलेगा?
कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बड़े विद्यालयों में मर्ज करने के पीछे संसाधनों का बेहतर उपयोग भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। ऐसे कई विद्यालय हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या कम होने के बावजूद शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है।
स्कूलों के मर्ज होने के बाद अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत वाले दूसरे विद्यालयों में भेजा जा सकता है। इससे शिक्षक और अन्य शैक्षणिक संसाधनों के बेहतर वितरण की उम्मीद है।
हालांकि छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों के विलय में विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसी कारण सांदीपनि विद्यालयों से विद्यार्थियों को जोड़ने के साथ परिवहन सुविधा को भी अहम माना जा रहा है।
गुणवत्ता बनाम स्कूलों की पहुंच पर भी चर्चा
शिक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से स्कूलों की संख्या और शिक्षा की गुणवत्ता के बीच संतुलन की जरूरत बताते रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों की आसान पहुंच के लिए नजदीक स्कूल होना महत्वपूर्ण है, जबकि सीमित संसाधनों के कारण प्रत्येक छोटे विद्यालय में समान स्तर की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ऐसे में सांदीपनि विद्यालय मॉडल की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि दूरदराज के विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन मिले तथा शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हो।
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह के अनुसार प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं और सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना इनमें एक महत्वपूर्ण पहल है। कम विद्यार्थी संख्या वाले विद्यालयों को पास के स्कूलों में मर्ज करने से शिक्षकों को जरूरत के अनुसार दूसरे विद्यालयों में भेजने में भी मदद मिली है।
