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MP Drone Hub: मध्य प्रदेश की बड़ी उड़ान, ग्वालियर में बनेगा ड्रोन क्लस्टर; भोपाल को ₹85.51 करोड़ का सेंटर

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Published On: 2 September 2026
KK

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MP Drone Hub बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ी पहल की है। ग्वालियर में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर और IISER भोपाल में ₹85.51 करोड़ का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होगा।

MP Drone Hub: बड़ी पहल, ₹85.51 करोड़ से बदलेगी तस्वीर; ग्वालियर में ड्रोन क्लस्टर, भोपाल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

मध्य प्रदेश को देश का प्रमुख ड्रोन हब बनाने की तैयारी, निर्माण से लेकर टेस्टिंग और रिसर्च तक एक ही इकोसिस्टम में मिलेंगी सुविधाएं

भोपाल। MP Drone Hub के रूप में मध्य प्रदेश को देश में नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश को ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए सरकार ने रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। योजना के तहत ग्वालियर में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है, जबकि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए 85.51 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी जा चुकी है। इससे मध्य प्रदेश में ड्रोन तकनीक से जुड़े अनुसंधान, स्टार्टअप, निर्माण और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

MP Drone Hub के लिए सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

बुधवार को मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और IISER भोपाल के साथ ड्रोन क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, स्टार्टअप्स, उद्योग संगठनों और अनुसंधान संस्थानों की राउंड टेबल बैठक आयोजित की गई।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य मध्य प्रदेश में ड्रोन उद्योग के लिए ऐसा मजबूत इकोसिस्टम विकसित करना रहा, जहां निर्माण से लेकर अनुसंधान और परीक्षण तक की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

बैठक में ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर के विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही IISER भोपाल में प्रस्तावित ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की योजना की जानकारी साझा की गई।

ग्वालियर में बनेगा ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर

मध्य प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार ग्वालियर में Drone Manufacturing and Testing Cluster विकसित किया जाना प्रस्तावित है। यह क्लस्टर MP Drone Hub की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्रदेश में ड्रोन उद्योग के लिए ऐसी अधोसंरचना तैयार करने की योजना है, जहां मैन्युफैक्चरिंग, प्रोटोटाइपिंग, कंपोनेंट टेस्टिंग, प्रमाणन और फ्लाइट टेस्टिंग जैसी सुविधाएं एक ही इकोसिस्टम में उपलब्ध कराई जा सकें।

इससे ड्रोन बनाने वाली कंपनियों और स्टार्टअप्स को अलग-अलग स्थानों पर सुविधाओं की तलाश करने के बजाय एक ही क्लस्टर में आवश्यक तकनीकी सहायता और बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो सकेगा।

राउंड टेबल बैठक में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कॉमन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं, आधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाओं और उद्योग की जरूरत के अनुसार कौशल विकास को लेकर भी सुझाव दिए।

₹85.51 करोड़ से IISER भोपाल में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

MP Drone Hub योजना का दूसरा बड़ा केंद्र भोपाल बनने जा रहा है। IISER भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित Center of Excellence स्थापित करने के लिए 85.51 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी जा चुकी है।

यह सेंटर केवल ड्रोन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों पर अनुसंधान और नवाचार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस सिस्टम, ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन्स और UAV डिजाइन एवं निर्माण जैसी आधुनिक तकनीकों पर अनुसंधान किया जाएगा।

AI से UAV डिजाइन तक नई तकनीकों पर होगा काम

IISER भोपाल में बनने वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शोध के साथ-साथ प्रोटोटाइप परीक्षण और Proof of Concept पर भी काम किया जाएगा।

नई ड्रोन तकनीकों को प्रयोगशाला से वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने की दिशा में स्टार्टअप इनक्यूबेशन और नई तकनीकों के व्यावसायीकरण पर भी जोर रहेगा।

इससे अनुसंधानकर्ताओं, विद्यार्थियों, इंजीनियरों और ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स को एक ऐसा प्लेटफॉर्म मिल सकता है, जहां वे नई तकनीक विकसित करने से लेकर उसका परीक्षण करने तक का काम कर सकेंगे।

डिजिटल ट्विन, AI और Autonomous Systems जैसी तकनीकें भविष्य के ड्रोन उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। ऐसे में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मध्य प्रदेश में एडवांस ड्रोन रिसर्च को नई गति दे सकता है।

ड्रोन उद्योग के साथ युवाओं के रोजगार पर भी फोकस

सरकार की योजना केवल ड्रोन बनाने वाली इकाइयां स्थापित करने तक सीमित नहीं है। प्रदेश में ड्रोन सेक्टर के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

यदि ग्वालियर का क्लस्टर और भोपाल का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस योजना के अनुसार विकसित होते हैं, तो ड्रोन डिजाइन, निर्माण, सॉफ्टवेयर, AI, टेस्टिंग, पायलटिंग और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

प्रदेश में तकनीकी प्रतिभाओं को उद्योग की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देने पर भी चर्चा की गई है।

प्रमुख सचिव ने निवेश और नवाचार को लेकर बताईं प्राथमिकताएं

बैठक में प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेंद्रन ने ड्रोन क्षेत्र में निवेश, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी साझा की।

सरकार का लक्ष्य ऐसा औद्योगिक और तकनीकी वातावरण तैयार करना है, जिसमें ड्रोन क्षेत्र की कंपनियां मध्य प्रदेश में निवेश के साथ अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को भी आगे बढ़ा सकें।

इसी उद्देश्य से सरकार उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में काम कर रही है।

गरुड़ और IdeaForge समेत कई कंपनियों ने दिखाई रुचि

राउंड टेबल बैठक में ड्रोन सेक्टर से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इनमें गरुड़, DFI, IdeaForge, NFSU, प्रखर और IZI सहित कई कंपनियों एवं संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रतिभागियों ने अनुसंधान एवं विकास, पायलट प्रोजेक्ट और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश सरकार के साथ साझेदारी करने में रुचि दिखाई।

उद्योग जगत की भागीदारी को MP Drone Hub विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे सरकारी अधोसंरचना के साथ निजी क्षेत्र की तकनीक और विशेषज्ञता को जोड़ने का अवसर मिलेगा।

ड्रोन टेक्नोलॉजी में मध्य प्रदेश की बड़ी उड़ान की तैयारी

ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर और भोपाल में 85.51 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मध्य प्रदेश के ड्रोन सेक्टर को नई दिशा दे सकता है।

एक ओर ग्वालियर में ड्रोन निर्माण, प्रोटोटाइपिंग, कंपोनेंट टेस्टिंग, प्रमाणन और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए इकोसिस्टम विकसित करने की योजना है, वहीं भोपाल में AI, Autonomous Systems, Digital Twins और UAV Design जैसी उन्नत तकनीकों पर अनुसंधान की तैयारी है।

सरकार की योजना सफलतापूर्वक धरातल पर उतरती है तो मध्य प्रदेश आने वाले वर्षों में ड्रोन निर्माण और परीक्षण के साथ अनुसंधान, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी देश के प्रमुख केंद्रों में अपनी जगह बना सकता है।

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