Bank Fraud बाग बैंक ऑफ इंडिया गबन मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने हेड कैशियर हितेश निंगवाल को गिरफ्तार किया। आरोप है कि दो महीनों में वॉल्ट से करीब 45 लाख रुपये निकाले गए।
Bank Fraud बाग बैंक ऑफ इंडिया गबन: बड़ा खुलासा, 2 महीनों में ₹45 लाख पार; कैशियर गिरफ्तार
वॉल्ट से रोज निकालता था नोटों की गड्डियां, कर्ज चुकाने में खर्च कर दी रकम; पुलिस रिकवरी में जुटी
कौशिक पण्डित, कुशाग्र समाचार सेवा, मनावर जिला धार मध्यप्रदेश
बाग, धार। बाग बैंक ऑफ इंडिया गबन मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। धार जिले के बाग नगर स्थित बैंक ऑफ इंडिया की स्थानीय शाखा में करीब 45 से 46 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद पुलिस ने बैंक के हेड कैशियर हितेश पिता रुमालसिंह निंगवाल, निवासी गडबोरी को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से समय-समय पर बैंक के वॉल्ट से नकदी निकालता था और इस राशि का इस्तेमाल अपनी उधारी और कर्ज चुकाने में करता था।
सोमवार को बंद रहा बैंक का कामकाज
मामले का खुलासा तब हुआ जब शनिवार को कैशियर हितेश निंगवाल अपने साथ वॉल्ट की चाबी लेकर घर चला गया और सोमवार को बैंक खुलने के बाद ड्यूटी पर नहीं पहुंचा। कैशियर के नहीं आने और वॉल्ट की चाबी उसके पास होने से बैंक प्रबंधन को शंका हुई।
इसके बाद बैंक प्रबंधन ने जिला कार्यालय से दूसरी चाबी मंगवाई। वॉल्ट खोलकर नकदी का मिलान किया गया तो करीब 45 से 46 लाख रुपये की कमी सामने आई। इतनी बड़ी रकम कम मिलने के बाद बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया।
इस घटनाक्रम के कारण सोमवार को दिनभर बैंक का कामकाज प्रभावित रहा। बैंक प्रबंधन ने मुख्य द्वार पर ‘लिंक बंद है’ का पर्चा चस्पा कर ग्राहकों का प्रवेश रोक दिया। इससे बैंक पहुंचे आम ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बाग बैंक ऑफ इंडिया गबन: मैनेजर ने थाने में दी शिकायत
देर रात बैंक मैनेजर मयूर दुबे बाग थाने पहुंचे। उन्होंने बैंक में करीब 46 लाख रुपये कैश कम होने और कैशियर के वॉल्ट की चाबी लेकर गायब होने के संबंध में लिखित शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कैशियर हितेश निंगवाल को हिरासत में लिया।
दो महीनों में करीब ₹45 लाख निकालने का आरोप
पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, बाग बैंक ऑफ इंडिया गबन की रकम एक साथ नहीं, बल्कि करीब दो महीनों के दौरान कथित रूप से थोड़ी-थोड़ी करके निकाली गई।
पूछताछ में हितेश निंगवाल ने बताया कि रोजाना बैंक में आने वाली नकदी को वॉल्ट में रखते समय छोटे नोटों को आगे की ओर जमा कर दिया जाता था, जिससे नकदी अधिक नजर आती थी। आरोप है कि इसके पीछे से वह रोजाना एक से दो नोटों की गड्डियां निकालकर अपने साथ ले जाता था।
करीब दो महीने तक इसी तरीके से रकम निकालने के कारण यह राशि बढ़ते-बढ़ते करीब 45 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई।
कर्ज चुकाने में खर्च कर दी पूरी रकम
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डॉवर ने बताया कि बैंक मैनेजर की शिकायत के आधार पर थाना बाग में एफआईआर पंजीकृत कर ली गई है। कैशियर को हिरासत में लेकर रकम की रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में हितेश निंगवाल ने पुलिस को बताया कि वह बैंक के वॉल्ट में पैसा रखने का काम संभालता था और कथित तौर पर थोड़ा-थोड़ा करके नकदी निकालता रहा। पूछताछ के अनुसार निकाली गई रकम उसने अपनी उधारी और कर्ज चुकाने में खर्च कर दी।
अब पुलिस करेगी ₹45 लाख की रिकवरी
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि बैंक से निकाली गई रकम किन-किन लोगों को दी गई और कर्ज चुकाने के लिए कितनी राशि किसे दी गई। पुलिस का फोकस अब गबन की रकम की अधिक से अधिक रिकवरी पर है।
बाग जैसे नगर में बैंक शाखा से लाखों रुपये की रकम कम मिलने का मामला सामने आने के बाद यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। पुलिस जांच और रिकवरी की कार्रवाई के बाद मामले में और तथ्य सामने आने की संभावना है।
