जमीन बचाओ जनसभा में महेश पटेल का भाजपा पर हमला, बोले- भाषण नहीं, कागज और सरकारी आदेश चाहिए
चंद्रशेखर आजाद नगर में जनसभा के बाद आदिवासी समाज ने निकाली रैली, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन; खनिज ब्लॉक, ग्रामसभा, पेसा एक्ट और खाद संकट पर उठाए सवाल
ब्यूरो रिपोर्ट – खलील मंसूरी
चंद्रशेखर आजाद नगर, आलीराजपुर। आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल ने बुधवार को चंद्रशेखर आजाद नगर के मंडी ग्राउंड में आयोजित ‘जमीन बचाओ जनसभा’ को संबोधित करते हुए खनिज ब्लॉक, आदिवासी जमीन, पेसा कानून, ग्रामसभा, किसानों की खाद समस्या और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार और भाजपा नेताओं पर कई सवाल उठाए।
जनसभा के बाद आदिवासी समाज और ग्रामीणों ने रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया निरस्त करने, ग्राम पंचायतों पर नीलामी के समर्थन में प्रस्ताव पारित करने के कथित दबाव को रोकने, पेसा एक्ट के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने और किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने सहित विभिन्न मांगें रखी गईं।
‘यह किसी पार्टी की नहीं, जल-जंगल-जमीन की लड़ाई’
महेश पटेल ने कहा कि इस मुद्दे को केवल कांग्रेस और भाजपा की राजनीतिक लड़ाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र का आदिवासी समाज अपनी जमीन, खेती, संस्कृति, धार्मिक स्थलों और पुरखों की विरासत की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात सरकार के सामने रख रहा है।
पटेल ने कहा कि सरकार और प्रशासन को प्रभावित गांवों के लोगों की आशंकाओं का स्पष्ट जवाब देना चाहिए और यदि किसी खनिज ब्लॉक अथवा जमीन को लेकर कोई निर्णय लिया गया है तो उससे संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
‘प्री-ऑक्शन’ को लेकर सरकार पर साधा निशाना
महेश पटेल ने आरोप लगाया कि खनिज ब्लॉक के मुद्दे पर जनता को ‘प्री-ऑक्शन’ जैसे तकनीकी शब्दों में उलझाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वे सरकार के भू-विज्ञान एवं खनन संचालनालय से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात ग्रामीणों के सामने रख रहे हैं।
पटेल के मुताबिक संबंधित दस्तावेज में आलीराजपुर जिले के खेरिया लाइमस्टोन ब्लॉक, चूना पत्थर और कम्पोजिट लाइसेंस (CL) का उल्लेख है।
उन्होंने दावा किया कि टेंडर दस्तावेज की कीमत 5 लाख रुपये जीएसटी अतिरिक्त रखी गई थी, जबकि दस्तावेज खरीदने की अंतिम तारीख 4 नवंबर 2025, ऑनलाइन नीलामी की तारीख 9 दिसंबर 2025 और बोली जमा करने की अंतिम तारीख 16 दिसंबर 2025 शाम 5 बजे निर्धारित थी।
इन दावों के आधार पर उन्होंने सवाल किया कि यदि टेंडर दस्तावेज, उसकी कीमत और नीलामी से संबंधित तारीखें निर्धारित की गई थीं तो सरकार को पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कई गांवों का नाम लेकर जताई चिंता
महेश पटेल ने जनसभा में क्षेत्र के कई गांवों का उल्लेख करते हुए कहा कि खनिज ब्लॉक से जुड़ी गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में आशंका बनी हुई है।
उन्होंने बलदमुग, बड़ी खट्टाली, खेरवा, छोटी खट्टाली, डाबड़ी, नेहतड़ा, गुडाबड़ा, उबलड, चगदी, बेटवासा और कोसदुना सहित अन्य गांवों का उल्लेख किया।
इसके अलावा उन्होंने चूना पत्थर से जुड़े बताए जा रहे माथना, कुहिवाव, भूरियाकुवा, सेजावाड़ा, अमनकुआं, कांसट, खोरियामाली, बड़ी करेटी, सांदा और मालवेली सहित अन्य गांवों तथा मैंगनीज से जुड़े बताए जा रहे मोटाउमर, सेवड़, बड़ी जुवारी, छोटी जुवारी, सेमलाया, उबगारी और पनेरी सहित अन्य क्षेत्रों का भी जिक्र किया।
‘ग्रामीण पहले से विरोध में हैं तो फिर पत्र क्यों?’
पटेल ने आरोप लगाया कि शासन से प्राप्त पत्रों के आधार पर ग्राम पंचायतों से खनिज नीलामी के समर्थन में प्रस्ताव पारित कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पंचायतों से प्रस्तावों की प्रतियां भी मांगी जा रही हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण पहले ही विरोध प्रदर्शन, धरना और ज्ञापन के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं तथा यह विषय विधानसभा तक पहुंच चुका है, तो इसके बाद भी इस संबंध में लगातार पत्राचार क्यों किया जा रहा है।
हालांकि पंचायतों पर दबाव बनाए जाने संबंधी आरोप महेश पटेल और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं। प्रशासन अथवा सरकार का विस्तृत पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामसभा और पेसा एक्ट का मुद्दा उठाया
जनसभा में पेसा एक्ट और ग्रामसभा के अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। महेश पटेल ने प्रभावित बताए जा रहे गांवों में ग्रामसभा की भूमिका को लेकर सरकार और प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमिका महत्वपूर्ण है और आदिवासी समाज की जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में भी पेसा एक्ट के प्रावधानों के पालन की मांग प्रमुखता से रखी।
‘भाषण नहीं, लिखित आदेश दिखाए सरकार’
महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि सरकार की ओर से स्पष्ट लिखित आदेश और दस्तावेज चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में यह सुनिश्चित कर रही है कि आदिवासियों की जमीन प्रभावित नहीं होगी, तो इससे संबंधित स्थिति आधिकारिक रूप से स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने खनिज ब्लॉकों और प्रभावित गांवों को लेकर जारी आदेशों तथा पत्राचार की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
किसानों की खाद समस्या भी उठाई


जमीन और खनिज ब्लॉक के साथ जनसभा में किसानों को समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। पटेल ने कहा कि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि क्षेत्र के वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए और किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर खाद मिले।
रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे ग्रामीण
जनसभा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों और आदिवासी समाज के लोगों ने मंडी ग्राउंड से रैली निकाली। रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंची।
यहां प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को निरस्त करने, पंचायतों पर कथित दबाव रोकने, पेसा एक्ट और ग्रामसभा के अधिकारों का पालन करने तथा किसानों की खाद समस्या का समाधान करने की मांग की।
जनसभा में महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज से जुड़े जमीन और प्राकृतिक संसाधनों के मुद्दे पर उनका आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। वहीं प्रदर्शनकारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित जवाब देने की मांग की।
