भगवान बलराम जयंती पर मनावर में प्राकृतिक खेती पर कृषक संगोष्ठी, किसानों को बताए कम लागत में बेहतर उत्पादन के तरीके
कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिकों ने किसानों से किया संवाद, मौसम आधारित कीट नियंत्रण और मृदा स्वास्थ्य की दी जानकारी; चयनित कृषकों को स्प्रे पंप व मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा ग्रामीण जिला अध्यक्ष चंचल पाटीदार उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य कपिल सोलंकी, किसान मोर्चा अध्यक्ष धार ग्रामीण मोहन आर्य, मोर्चा जिला उपाध्यक्ष मनीष छावाया, किसान मोर्चा उपाध्यक्ष मोहन मुलेवा, धार ग्रामीण जिला किसान मोर्चा मीडिया प्रभारी नितिन मंडवाल और सह मीडिया प्रभारी भानु प्रकाश शर्मा सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
भगवान बलराम के चित्र पर माल्यार्पण से कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बलराम के चित्र पर माल्यार्पण और वंदे मातरम् के गायन के साथ की गई। इसके बाद आयोजकों द्वारा उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया गया।
भगवान बलराम को कृषि और हल से जुड़ा प्रतीक मानते हुए कार्यक्रम में खेती के बदलते स्वरूप तथा प्राकृतिक कृषि पद्धतियों पर विशेष चर्चा की गई। किसानों को रासायनिक कृषि पर निर्भरता कम करने और उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के संबंध में जानकारी दी गई।
प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर किसानों से संवाद
मुख्य अतिथि चंचल पाटीदार ने किसानों को संबोधित करते हुए वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती की आवश्यकता और महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए खेती की बढ़ती लागत एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों को समझकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उनका उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कम लागत में बेहतर लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से प्राकृतिक और जीरो बजट खेती की अवधारणा पर भी किसानों से चर्चा की। साथ ही किसानों से कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी जा रही तकनीकी जानकारियों का लाभ लेने का आह्वान किया।
मौसम के अनुसार कीट प्रबंधन की दी जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ए.एल. बसेड़िया ने किसानों को मौसम आधारित खेती और कीट प्रबंधन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मौसम में होने वाले बदलाव का फसलों के साथ कीट एवं रोगों पर भी प्रभाव पड़ता है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करते हुए समय पर उचित उपाय अपनाने चाहिए। सही समय पर कीटों की पहचान और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रबंधन करने से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
किसानों को मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कृषि कार्य करने और तकनीकी सलाह का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
मृदा स्वास्थ्य और तकनीकी खेती पर वैज्ञानिक परिचर्चा
मृदा वैज्ञानिक डॉ. नरेश गुप्ता ने किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने कृषकों के साथ परिचर्चा करते हुए खेती में मृदा परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड की उपयोगिता के बारे में बताया।
संगोष्ठी के दौरान किसानों ने भी प्राकृतिक खेती और फसल प्रबंधन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका कृषि विशेषज्ञों ने समाधान किया। किसानों को बताया गया कि मिट्टी की वास्तविक स्थिति और पोषक तत्वों की जानकारी के आधार पर खेती करने से संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जा सकता है।
चयनित किसानों को स्प्रे पंप और मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग द्वारा चयनित किसानों को स्प्रे पंप एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया। अतिथियों ने किसानों को सामग्री प्रदान करते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती की पद्धतियों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को उनकी कृषि भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों और आवश्यक सुधारों की जानकारी मिलती है। कार्यक्रम में इसके महत्व को भी विस्तार से समझाया गया।
कृषि सखियों ने साझा किए प्राकृतिक खेती के अनुभव
कार्यक्रम की विशेषता कृषि सखियों के साथ हुई परिचर्चा रही। अतिथियों ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी महिला कृषकों से उनके अनुभव जाने।
कृषि सखी सुशीला अगल्चा ग्राम अली, नर्मदा बाई ग्राम कुरड़ाखाल और कविता वास्केल ग्राम उदयापुरा ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। अतिथियों ने उनसे खेती में अपनाई जा रही पद्धतियों, सामने आने वाली चुनौतियों और प्राप्त अनुभवों के संबंध में चर्चा की।
प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उनके प्रयासों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि सखियों को उपहार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
आत्मा परियोजना के तहत किसानों को दी जानकारी
कार्यक्रम के प्रारंभ में आत्मा परियोजना के परियोजना संचालक टी.सी. छावानिया ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने उपस्थित किसानों को प्राकृतिक खेती से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की और आत्मा योजना के माध्यम से संचालित कृषि विस्तार गतिविधियों के बारे में बताया।
उन्होंने किसानों से कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण, संगोष्ठी एवं अन्य कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया, ताकि नई कृषि तकनीकों और योजनाओं की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंच सके।
प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर
कृषक संगोष्ठी में प्राकृतिक खेती के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। किसानों को बताया गया कि कृषि लागत को नियंत्रित करने के लिए खेती के विभिन्न पहलुओं का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन जरूरी है।
विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य, फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण और मौसम के अनुरूप कृषि गतिविधियों पर ध्यान देने की सलाह दी। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना भी रहा।
किसान और महिला कृषकों ने की सहभागिता
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ क्षेत्र के बड़ी संख्या में कृषक एवं महिला कृषक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन आत्मा विकासखंड कुक्षी के बीटीएम अंतिम दीक्षित ने किया। कार्यक्रम के समापन पर अनुविभागीय कृषि अधिकारी ज्ञान सिंह सोलंकी ने उपस्थित अतिथियों, कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
भगवान बलराम जयंती पर आयोजित इस कृषक संगोष्ठी के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, मौसम आधारित कीट प्रबंधन और कम लागत वाली कृषि पद्धतियों के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई। साथ ही कृषि सखियों के अनुभवों के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
