रात 10 बजे बाजार बंद कराने की कार्रवाई का व्यापारियों ने किया विरोध
व्यापारी महासंघ ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, 24 घंटे बाजार संचालन नीति के अनुरूप कार्रवाई की मांग
Nagda । शहर में रात 10 बजे व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद कराने की पुलिस कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में नाराजगी सामने आई है। व्यापारी महासंघ नागदा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारियों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम अनुविभागीय अधिकारी रंजना पाटीदार एवं नगर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने मांग की कि राज्य सरकार की 24 घंटे बाजार संचालन की नीति के अनुरूप नागदा में भी रात्रिकालीन व्यापारिक गतिविधियों के संचालन की अनुमति और स्पष्ट व्यवस्था लागू की जाए।
व्यापारियों का कहना है कि एक ओर राज्य सरकार व्यापार, रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बाजार, मॉल, होटल एवं रेस्टोरेंट सहित विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों को अधिक समय तक संचालित करने की नीति की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रात 10 बजे दुकानों और प्रतिष्ठानों को बंद कराया जा रहा है। इससे छोटे एवं मध्यम वर्गीय व्यापारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
मुख्यमंत्री की 24 घंटे बाजार संचालन नीति का दिया हवाला
व्यापारी महासंघ ने अपने ज्ञापन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस नीति का उल्लेख किया, जिसमें व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बाजार, मॉल, होटल और रेस्टोरेंट को 24 घंटे संचालित करने की अनुमति देने की बात कही गई है। व्यापारियों ने कहा कि यदि सरकार की मंशा रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देने की है तो स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस को भी उसी भावना के अनुरूप दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
महासंघ ने कहा कि नागदा जैसे औद्योगिक एवं व्यापारिक शहर में बड़ी संख्या में लोग देर शाम तक काम करते हैं। ऐसे में चाय-पोहा सेंटर, भोजनालय, रेस्टोरेंट, आइसक्रीम पार्लर और अन्य छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठान आम नागरिकों की जरूरतों को पूरा करते हैं। कई लोगों का व्यवसाय ही रात्रिकालीन ग्राहकी पर निर्भर है। रात 10 बजे प्रतिष्ठान बंद कराने से इन व्यापारियों की आय प्रभावित हो रही है।
व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि राज्य सरकार की नीति के अनुरूप नागदा में भी रात्रिकालीन व्यापार संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि पुलिस एवं प्रशासन द्वारा अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग नियम लागू किए जाने की स्थिति समाप्त हो।
शराब दुकानों और छोटे व्यापारियों के लिए समान नियम की मांग
ज्ञापन में व्यापारियों ने नियमों में समानता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। व्यापारियों का आरोप है कि रात के समय चाय-पोहा सेंटर, भोजनालय, रेस्टोरेंट, आइसक्रीम पार्लर जैसे प्रतिष्ठानों को रात 10 बजे बंद कराया जा रहा है, जबकि शराब की दुकानों और आहातों के संचालन को लेकर अलग स्थिति दिखाई देती है।
व्यापारी महासंघ ने कहा कि यदि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात्रिकालीन गतिविधियों पर नियंत्रण आवश्यक है तो सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों के लिए समान नियम लागू किए जाने चाहिए। किसी एक वर्ग के छोटे व्यापारियों को ही कार्रवाई का सामना करना पड़े और दूसरी गतिविधियां निर्धारित समय के बाद भी संचालित होती रहें, तो इससे व्यापारियों में असंतोष उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
महासंघ ने प्रशासन से मांग की कि कानून-व्यवस्था के लिए वास्तव में जिम्मेदार असामाजिक गतिविधियों और उनके प्रमुख स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। मेहनत-मजदूरी कर अपना परिवार चलाने वाले छोटे व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
छोटे व्यापारियों ने बताया राजस्व में योगदान
व्यापारियों ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि छोटे एवं मध्यम वर्गीय व्यापारी विभिन्न करों, जीएसटी और लाइसेंस शुल्क के माध्यम से शासन को नियमित रूप से राजस्व उपलब्ध कराते हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें कारोबार के समय को लेकर बार-बार परेशानी का सामना करना पड़े तो इसका सीधा असर उनके व्यवसाय और परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
व्यापारियों का कहना है कि रात में दुकानें संचालित करने वाले अधिकांश छोटे कारोबारी किसी अवैध गतिविधि में शामिल नहीं होते। वे निर्धारित नियमों के तहत अपना कारोबार करते हैं और ग्राहकों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद कराने से पहले स्पष्ट नियम और समय-सीमा तय की जानी चाहिए।
महासंघ ने कहा कि यदि किसी व्यापारिक प्रतिष्ठान द्वारा कानून या निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन सभी व्यापारियों को एक ही नजर से देखते हुए रात 10 बजे कारोबार बंद कराना उचित नहीं है।

देर रात तक बाजार संचालन से जुड़े हैं कई कारोबार
व्यापारियों ने बताया कि नागदा में कई छोटे कारोबारी ऐसे हैं जिनकी बिक्री शाम और रात के समय अधिक होती है। दिन के समय नौकरी, उद्योगों और अन्य कार्यों में व्यस्त रहने वाले लोग अक्सर शाम को बाजार पहुंचते हैं। ऐसे में रेस्टोरेंट, भोजनालय, चाय-पोहा सेंटर, आइसक्रीम पार्लर सहित कई प्रतिष्ठानों को देर शाम तक ग्राहकों की जरूरत के अनुसार संचालन करना पड़ता है।
व्यापारियों के अनुसार रात्रिकालीन कारोबार बंद होने से केवल दुकानदार ही प्रभावित नहीं होते, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारी, डिलीवरी कर्मचारी, छोटे श्रमिक और अन्य लोगों की आय पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसलिए प्रशासन को व्यापार संचालन और कानून-व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन बनाकर नीति लागू करनी चाहिए।
पुलिस और प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
व्यापारी महासंघ ने मुख्यमंत्री से मांग की कि नागदा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिससे स्थानीय पुलिस और प्रशासन को यह स्पष्ट रहे कि किन व्यापारिक प्रतिष्ठानों को किस समय तक संचालित करने की अनुमति है। व्यापारियों ने कहा कि नियमों की स्पष्टता रहने से पुलिस और व्यापारियों के बीच अनावश्यक विवाद की स्थिति भी नहीं बनेगी।
महासंघ ने यह भी मांग की कि यदि किसी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की विशेष परिस्थिति हो तो प्रशासन आवश्यकतानुसार कार्रवाई कर सकता है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए राज्य सरकार की नीति के अनुरूप व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
व्यापारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था को चुनौती देना नहीं, बल्कि समान नियम और स्पष्ट व्यवस्था की मांग करना है। व्यापारियों ने प्रशासन से सहयोगात्मक रवैया अपनाने की अपील की।
ज्ञापन का किया गया वाचन
व्यापारी महासंघ की ओर से सौंपे गए ज्ञापन का वाचन हनुमान प्रसाद शर्मा एवं शरद सेठिया ने किया। ज्ञापन में व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा गया। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि रात 10 बजे बाजार बंद कराने की कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए और राज्य सरकार की नीति के अनुरूप नागदा में व्यापार संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
व्यापारियों ने कहा कि इस संबंध में प्रशासन यदि स्पष्ट निर्देश जारी करता है तो व्यापारियों को भी नियमों के पालन में सुविधा होगी और किसी प्रकार की गलतफहमी की स्थिति नहीं बनेगी।
महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारी रहे मौजूद
ज्ञापन व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल के नेतृत्व में सौंपा गया। इस अवसर पर महासंघ के सचिव रमेश मेहता, कोषाध्यक्ष अंकित सेठिया, संरक्षक हनुमान प्रसाद शर्मा सहित विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में कपड़ा व्यापारी संघ अध्यक्ष शरद सेठिया, डिस्पोजल व्यापारी संघ अध्यक्ष बृजेश टांक, नागदा व्यापारी संघ अध्यक्ष पंकज नामदेव, दूध व्यापारी संघ अध्यक्ष अमित पाल, इलेक्ट्रिक संघ सचिव नंदकिशोर पोरवाल, टेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश राठौर, मेडिकल संघ सचिव मनीष शर्मा सहित अनेक व्यापारी प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
इसके अलावा सज्जन सिंह शेखावत, नीरज खंडेलवाल, सुशील सकलेचा, प्रकाश, शिवनारायण सोलंकी, विकास जिंदल, संदीप धनोतिया, दिलीप, दशरथ राठौर, मुस्तफा भाई, पंकज सेठिया, रणछोड़ राठी, रस्मन जैन, पंकज पोरवाल, मनीष पोरवाल, नवीन पोरवाल, अमित ओझा, मनोज पोरवाल, जगदीश चौरसिया, योगेश मित्तल, राजेश पांचाल, रामगोपाल प्रजापत, दिलीप सिंह सोनगरा एवं पंकज मेहता सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे।
वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी ज्ञापन की प्रतिलिपि
व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल, सचिव रमेश मोहता एवं कोषाध्यक्ष अंकित सेठिया के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन की प्रतिलिपि संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है। इसमें पुलिस अधीक्षक जिला उज्जैन, अनुविभागीय अधिकारी नागदा, नगर पुलिस अधीक्षक नागदा एवं थाना प्रभारी नागदा को भी प्रतिलिपि प्रेषित की गई है।
महासंघ ने उम्मीद जताई कि प्रशासन व्यापारियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार की नीति के अनुरूप उचित निर्णय करेगा। व्यापारियों ने कहा कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन व्यापारिक गतिविधियों के संचालन में नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
व्यापारी महासंघ ने एक बार फिर मांग दोहराई कि नागदा में रात 10 बजे व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद कराने की कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए और 24 घंटे बाजार संचालन की राज्य सरकार की नीति के अनुरूप स्पष्ट एवं व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जाए।
जानकारी निलेश मेहता ने दी।
नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।
