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सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ श्रद्धालुओं की सुरक्षा में हाईटेक तकनीक का सहारा, भारतीय सेना का MCTE करेगा सहयोग; उज्जैन में बनेगा कमांड सेंटर

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Published On: 1 September 2026
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सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ श्रद्धालुओं की सुरक्षा में हाईटेक तकनीक का सहारा, भारतीय सेना का MCTE करेगा सहयोग; उज्जैन में बनेगा कमांड सेंटर

भीड़ और अपराध प्रबंधन में महू का मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग देगा तकनीकी सहयोग, AI आधारित निगरानी व्यवस्था पर जोर; सितंबर में होगी तीसरे दौर की महत्वपूर्ण बैठक

उज्जैन। सिंहस्थ 2028 को लेकर मध्य प्रदेश में तैयारियां तेज हो रही हैं। उज्जैन में आयोजित होने वाले इस विशाल धार्मिक आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और आपात परिस्थितियों से निपटना पुलिस तथा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसे देखते हुए इस बार आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल करने की तैयारी है। महू स्थित भारतीय सेना का मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE) तकनीकी स्तर पर सहयोग करेगा।

सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में MCTE का तकनीकी सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना के तहत भीड़ प्रबंधन, अपराध नियंत्रण, निगरानी और अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। उज्जैन में एक कमांड सेंटर तैयार किए जाने की भी योजना है, जहां से महत्वपूर्ण गतिविधियों की निगरानी और व्यवस्थाओं के समन्वय में मदद मिल सकेगी।

40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना

सिंहस्थ 2028 में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को ध्यान में रखते हुए सरकार के सामने यातायात, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन प्रबंधन जैसी कई बड़ी चुनौतियां होंगी।

विशेष रूप से प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

परंपरागत सुरक्षा व्यवस्था के साथ आधुनिक निगरानी और संचार तकनीक जोड़ने की तैयारी इसी व्यापक योजना का हिस्सा बताई जा रही है।

MCTE महू उपलब्ध कराएगा तकनीकी सिस्टम

महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग देश के प्रमुख सैन्य तकनीकी संस्थानों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान MCTE की विशेषज्ञता का उपयोग भीड़ और अपराध प्रबंधन से जुड़े तकनीकी सिस्टम विकसित करने तथा उपलब्ध कराने में किए जाने की योजना है।

सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में लाखों लोगों की एक साथ आवाजाही होती है। ऐसे में किसी स्थान पर अचानक अत्यधिक भीड़ बढ़ने, संदिग्ध गतिविधि या दूसरी आपात स्थिति की समय रहते पहचान करना महत्वपूर्ण होता है।

तकनीकी निगरानी व्यवस्था के माध्यम से प्रशासन को ऐसी परिस्थितियों की जानकारी तेजी से उपलब्ध कराने और उसके आधार पर आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नवंबर 2025 में हुआ था समझौता

सिंहस्थ में आधुनिक तकनीक के उपयोग को लेकर तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी है। नवंबर 2025 में मध्य प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग और MCTE महू के बीच एक समझौता हुआ था।

इसके बाद सरकार और MCTE के अधिकारियों के बीच दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में सिंहस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन और अपराध प्रबंधन के लिए तकनीकी सहयोग पर चर्चा की गई।

जानकारी के अनुसार MCTE की ओर से इस विशाल आयोजन में तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने पर सहमति जताई गई है। अब योजना को विस्तार देने और जमीनी स्तर पर लागू किए जाने वाले सिस्टम पर आगे चर्चा होनी है।

सितंबर में उज्जैन में होगी तीसरे दौर की बैठक

सिंहस्थ की तकनीकी और सुरक्षा तैयारियों को आगे बढ़ाने के लिए सितंबर में उज्जैन में तीसरे दौर की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इसमें प्रदेश सरकार और MCTE महू के प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत चर्चा होने की बात कही गई है।

बैठक में यह तय करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा कि सिंहस्थ क्षेत्र में किस प्रकार के तकनीकी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए और अलग-अलग एजेंसियों के बीच उनका समन्वय किस तरह स्थापित किया जाए।

विशाल मेला क्षेत्र, प्रमुख स्नान घाट, प्रवेश और निकास मार्ग तथा अधिक भीड़ वाले स्थान सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से विशेष रूप से महत्वपूर्ण होंगे।

AI कैमरों से निगरानी की तैयारी

सिंहस्थ की सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। AI आधारित निगरानी व्यवस्था भीड़ के पैटर्न और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने में प्रशासन के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

विशाल आयोजन में केवल कैमरे लगाना ही पर्याप्त नहीं होता। कैमरों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण और किसी असामान्य गतिविधि की समय पर पहचान भी महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण तकनीक आधारित इंटीग्रेटेड निगरानी व्यवस्था की भूमिका बढ़ जाती है।

हालांकि सिंहस्थ में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों और उनकी अंतिम रूपरेखा आगामी बैठकों एवं प्रशासनिक निर्णयों के बाद अधिक स्पष्ट होगी।

उज्जैन में कमांड सेंटर से निगरानी और समन्वय

सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में कमांड सेंटर तैयार किए जाने की योजना भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका उद्देश्य विभिन्न स्थानों से प्राप्त सूचनाओं को एक जगह एकत्रित कर सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा।

कमांड सेंटर के माध्यम से भीड़ की स्थिति, संवेदनशील क्षेत्रों और महत्वपूर्ण मार्गों पर निगरानी में सहायता मिल सकती है। किसी क्षेत्र में अचानक भीड़ बढ़ने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित टीमों तक तेजी से सूचना पहुंचाने में भी तकनीकी सिस्टम उपयोगी हो सकता है।

इस तरह का केंद्रीय नियंत्रण तंत्र पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल

सिंहस्थ में सुरक्षा के साथ भीड़ प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक रहेगा। प्रमुख स्नान पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं की एक साथ आवाजाही के कारण किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव बनने की स्थिति से बचना प्रशासन की प्राथमिकता होगी।

तकनीकी सिस्टम के जरिए किसी क्षेत्र में बढ़ती भीड़ की जानकारी मिलने पर लोगों की आवाजाही को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ने और संबंधित अधिकारियों को समय पर सतर्क करने जैसी व्यवस्थाओं में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा अपराध नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी आधुनिक निगरानी व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सिंहस्थ 2028 के लिए व्यापक तैयारियों पर जोर

सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि विशाल प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन वाला आयोजन भी है। करोड़ों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए उज्जैन में आधारभूत सुविधाओं से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं।

MCTE महू के तकनीकी सहयोग से सिंहस्थ की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था को हाईटेक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। आने वाली बैठकों के बाद यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से सिस्टम सिंहस्थ क्षेत्र में लगाए जाएंगे और उनका संचालन किस प्रकार किया जाएगा।

फिलहाल सितंबर में होने वाली तीसरे दौर की बैठक पर नजर रहेगी। इसमें प्रदेश सरकार और MCTE के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली विस्तृत चर्चा के बाद सिंहस्थ 2028 की तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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