इंदौर के छोटा बांगड़दा श्मशान में अधूरा अंतिम संस्कार, सुबह पहुंचे परिजनों को मिले शव के अधजले हिस्से; निगम कर्मचारी पर लगाए आरोप
सोमवार शाम किया गया था अंतिम संस्कार, परिजनों का दावा- पर्याप्त लकड़ी और कंडे नहीं मिले; मंगलवार सुबह दोबारा करनी पड़ी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
इंदौर, 1 सितंबर 2026। इंदौर के छोटा बांगड़दा स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के बाद शव पूरी तरह नहीं जलने का मामला सामने आया है। सोमवार शाम एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के बाद मंगलवार सुबह जब परिवार के सदस्य अस्थियां एकत्र करने के लिए श्मशान पहुंचे तो वहां शव के कुछ हिस्से अधजली अवस्था में मिलने का दावा किया गया। यह दृश्य देखकर परिजन हैरान रह गए। इसके बाद परिवार ने लकड़ी और कंडों की व्यवस्था कर शव के बचे हुए हिस्सों का दोबारा अंतिम संस्कार किया।
घटना को लेकर परिजनों ने श्मशान में मौजूद नगर निगम कर्मचारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अंतिम संस्कार के दौरान पर्याप्त मात्रा में लकड़ी और कंडे उपलब्ध कराने की मांग की गई थी, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं की गई। हालांकि कर्मचारी या नगर निगम प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटना ने शहर की श्मशान व्यवस्थाओं और अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोमवार शाम हुआ था अंतिम संस्कार
जानकारी के अनुसार, परिवार सोमवार शाम अपने एक सदस्य का अंतिम संस्कार करने छोटा बांगड़दा स्थित श्मशान घाट पहुंचा था। यहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
परिजनों के मुताबिक, अंतिम संस्कार के समय ही उन्हें लकड़ी और कंडों की मात्रा को लेकर चिंता हुई थी। उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारी से अतिरिक्त लकड़ी और कंडे उपलब्ध कराने की मांग की।
परिवार का आरोप है कि उनकी मांग के बावजूद पर्याप्त सामग्री नहीं दी गई। इसके बाद उपलब्ध सामग्री के साथ ही अंतिम संस्कार किया गया और परिवार के सदस्य वहां से चले गए।
सुबह अस्थियां लेने पहुंचे तो सामने आया मामला
अगले दिन मंगलवार सुबह परिवार के सदस्य धार्मिक परंपरा के अनुसार अस्थियां एकत्र करने श्मशान घाट पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद जो स्थिति दिखाई दी, उससे वे परेशान हो गए।
परिजनों का दावा है कि चिता पूरी तरह नहीं जली थी और शव के कुछ हिस्से अधजली अवस्था में मौजूद थे। परिवार का आरोप है कि अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं मिलने के कारण शव पूरी तरह नहीं जल पाया।
इसके बाद परिजनों ने दोबारा लकड़ी और कंडों की व्यवस्था की और बचे हुए हिस्सों का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया।
परिजनों ने निगम कर्मचारी पर लगाए आरोप
मामला सामने आने के बाद परिवार के सदस्यों ने श्मशान घाट की व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
परिजनों का कहना है कि सोमवार शाम अंतिम संस्कार के समय उन्होंने स्पष्ट रूप से अतिरिक्त लकड़ी और कंडों की आवश्यकता बताई थी। इसके बावजूद उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।
परिवार का कहना है कि यदि पर्याप्त सामग्री समय पर उपलब्ध करा दी जाती तो उन्हें अगले दिन ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित कर्मचारी का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित मात्रा में सामग्री उपलब्ध कराई गई थी या नहीं।
दोबारा करनी पड़ी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
शव का कुछ हिस्सा अधजला मिलने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता धार्मिक रीति के अनुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा करने की थी।
परिजनों ने मौके पर ही आवश्यक लकड़ी और कंडों की व्यवस्था की। इसके बाद अधजले हिस्सों को दोबारा चिता पर रखकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
किसी परिवार के लिए अपने सदस्य की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार का समय पहले से ही बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे में अगले दिन शव के पूरी तरह नहीं जलने की स्थिति सामने आने से परिवार को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा।
श्मशान की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस घटना के बाद छोटा बांगड़दा श्मशान घाट की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अंतिम संस्कार के दौरान पर्याप्त लकड़ी, कंडे और अन्य आवश्यक सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना श्मशान प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
यदि किसी कारण से चिता पूरी तरह नहीं जल पाती है तो उसके बाद की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि परिजनों को असुविधा न हो।
परिजनों के आरोपों के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए सामग्री उपलब्ध कराने की क्या व्यवस्था है और एक अंतिम संस्कार के लिए कितनी लकड़ी या अन्य सामग्री निर्धारित की जाती है।
अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था में निगरानी जरूरी
श्मशान घाट शहर की आवश्यक नागरिक सुविधाओं में शामिल हैं। यहां आने वाले परिवार अपने किसी प्रियजन को खोने के बाद बेहद संवेदनशील परिस्थिति में होते हैं। ऐसे समय में उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी परेशानी को और बढ़ा सकती है।
इसलिए श्मशान घाटों पर लकड़ी, कंडे, पानी, साफ-सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं की नियमित निगरानी आवश्यक मानी जाती है।
साथ ही वहां तैनात कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करना होता है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान परिवार को आवश्यक सहयोग मिले।
जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी वास्तविक वजह
फिलहाल परिजनों ने शव पूरी तरह नहीं जलने के पीछे पर्याप्त लकड़ी और कंडे नहीं मिलने को कारण बताया है। लेकिन चिता पूरी तरह नहीं जलने की वास्तविक वजह क्या थी, यह संबंधित पक्षों की जानकारी और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
ऐसे मामलों में लकड़ी की मात्रा के अलावा मौसम, लकड़ी की स्थिति और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से जुड़े दूसरे कारण भी प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने से पहले पूरे घटनाक्रम की जांच जरूरी होगी।
यदि नगर निगम मामले का संज्ञान लेकर जांच करता है तो यह पता लगाया जा सकेगा कि उस समय कितनी सामग्री उपलब्ध कराई गई और क्या निर्धारित व्यवस्था का पालन किया गया था।
व्यवस्था सुधारने की उठी जरूरत
छोटा बांगड़दा श्मशान घाट की घटना ने अंतिम संस्कार स्थलों पर उपलब्ध नागरिक सुविधाओं की नियमित समीक्षा की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
परिजनों का कहना है कि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए व्यवस्थाओं में सुधार होना चाहिए। अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए।
मंगलवार सुबह परिवार ने शव के अधजले हिस्सों का दोबारा अंतिम संस्कार कर धार्मिक प्रक्रिया पूरी की। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नगर निगम या संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर रहेगी।
