Delhi Police SC: CJP प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR रद्द करने की मांग, 2,873 लोगों पर अलग कार्रवाई का प्रस्ताव
Delhi Police Supreme Court Hearing: दिल्ली में CJP प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई 13 FIR को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है। हालांकि, पुलिस ने इसी के साथ 2,873 लोगों के खिलाफ अलग से FIR दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है। पुलिस के मुताबिक इन लोगों की पहचान ऐसे व्यक्तियों के तौर पर की गई है, जिनका गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि से संबंध बताया गया है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सभी लोगों के खिलाफ एक जैसी कानूनी कार्रवाई करने का प्रस्ताव नहीं है। पुलिस सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश में बताए गए ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ के आधार पर आगे की कार्रवाई करना चाहती है। अब पुलिस की इस मांग पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
13 FIR खत्म करने की मांग
Delhi पुलिस ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए CJP प्रदर्शनों से संबंधित कुल 13 मामलों में दर्ज FIR को समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पुलिस की ओर से दाखिल आवेदन में कहा गया है कि इन मामलों को आगे जारी रखने के बजाय इन्हें खत्म करने की अनुमति दी जाए।
हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन के दौरान शामिल सभी लोगों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। जिन लोगों के बारे में गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल होने की जानकारी सामने आई है, उनके खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से ऐसे 2,873 चिन्हित लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। यानी एक ओर प्रदर्शन से जुड़ी 13 मौजूदा FIR को खत्म करने का प्रस्ताव है, वहीं दूसरी ओर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले बताए गए लोगों के खिलाफ अलग कार्रवाई की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश का आधार
Delhi पुलिस ने अपने आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश का हवाला दिया है। पुलिस का कहना है कि आगे की कानूनी कार्रवाई इसी आदेश में बताए गए मानदंडों के अनुसार की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ की स्थिति को लेकर स्पष्टता दी थी। इसमें गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े लोगों को अलग श्रेणी में रखने की बात सामने आई थी। इसी आधार पर पुलिस ने अब 2,873 लोगों को चिन्हित करते हुए उनके खिलाफ अलग FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है।
पुलिस के प्रस्ताव के मुताबिक सामान्य तौर पर प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। केवल उन लोगों के खिलाफ विशेष कार्रवाई की जाएगी, जिनके आपराधिक रिकॉर्ड को गंभीर श्रेणी में रखा गया है।
25 जुलाई के बाद बदला घटनाक्रम
पुलिस की ओर से यह आवेदन 25 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसले के बाद सामने आया है। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में आगे की कार्रवाई को लेकर सरकार और पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्थिति स्पष्ट की गई है।
मामले में अब अदालत को यह देखना है कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई 13 FIR को समाप्त करने की अनुमति दी जाए या नहीं। साथ ही, 2,873 लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज करने के पुलिस के अनुरोध पर भी सुप्रीम कोर्ट का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
संसद मार्च के दौरान हुई थी झड़प
CJP की ओर से आयोजित प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को संसद मार्च का कार्यक्रम रखा गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की स्थिति बनी थी।
प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस की ओर से कार्रवाई की गई थी। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की बात सामने आई थी। घटना के बाद प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों के खिलाफ पुलिस ने अलग-अलग मामले दर्ज किए थे।
इसके बाद इन FIR और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंचा। अब दिल्ली पुलिस ने इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नया आवेदन दाखिल किया है।
NEET प्रदर्शन से जुड़े FIR मामले पर भी सुनवाई
इसी बीच NEET प्रदर्शन से जुड़े FIR को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। 1 सितंबर को होने वाली सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शन से जुड़े मामलों को समाप्त करने की मांग पर विचार किया जा सकता है।
केंद्र सरकार ने NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने की मांग की है। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ सुनवाई कर रही है।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग की थी। केंद्र का कहना है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में FIR खत्म कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार का इस्तेमाल किया जा सकता है।
छात्रों और गंभीर अपराध वाले लोगों में अंतर
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा यह है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किस आधार पर की जाए। अदालत के 3 अगस्त के आदेश के बाद गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल बताए गए लोगों और सामान्य प्रदर्शनकारियों के बीच अंतर करने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली पुलिस का ताजा आवेदन भी इसी दिशा में है। पुलिस 13 FIR को खत्म करने के साथ केवल चिन्हित 2,873 लोगों के खिलाफ अलग कार्रवाई चाहती है।
आंदोलन की शुरुआत जंतर-मंतर से हुई थी
प्रदर्शन की शुरुआत 20 जून को जंतर-मंतर से हुई थी। इसके बाद आंदोलन देश के कई शहरों तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शामिल थी।
25 जुलाई को सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे।
इन आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व शीर्ष अदालत के न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी।
अब दिल्ली पुलिस की 13 FIR खत्म करने और 2,873 लोगों के खिलाफ अलग कार्रवाई की मांग से यह मामला फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि इन मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी।
