‘अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ें’: बिश्केक में पुतिन से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने दोहराया शांति का संदेश
SCO शिखर सम्मेलन से पहले मोदी-पुतिन की अहम बैठक, द्विपक्षीय संबंधों से लेकर यूक्रेन युद्ध और व्यापार तक कई मुद्दों पर हुई चर्चा
बिश्केक/नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बिश्केक में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। आधे घंटे से अधिक चली बैठक में व्यापार, आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और वैश्विक परिस्थितियों के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध भी बातचीत के प्रमुख विषयों में शामिल रहा।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर भारत के उस रुख को सामने रखा, जिसमें किसी भी संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही जाती रही है। उन्होंने युद्ध को लंबा खींचने के बजाय शांति की दिशा में ठोस प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
यूक्रेन युद्ध पर पीएम मोदी ने दोहराया भारत का रुख
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री मोदी का संदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शांति के प्रयासों का समर्थन करता है और संघर्ष के समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपनाए जाने का पक्षधर है।
पीएम मोदी ने संकेत दिया कि दुनिया को अंतहीन युद्ध की स्थिति से बाहर निकलकर युद्ध समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। भारत पहले भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह कहता रहा है कि युद्ध के मैदान में किसी समस्या का स्थायी समाधान तलाशना मुश्किल है और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की कोशिश की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन संघर्ष का असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है। ऊर्जा बाजार, खाद्य सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति शृंखला और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिले हैं।
भारत-रूस संबंधों पर भी विस्तार से बातचीत
मोदी-पुतिन बैठक का एक बड़ा हिस्सा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित रहा। भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंध हैं। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लंबे समय से सहयोग रहा है।
बैठक में दोनों नेताओं ने मौजूदा सहयोग की समीक्षा के साथ इसे और आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस के संबंध अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
दोनों नेताओं की मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रहा है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच व्यापार तथा आर्थिक सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं।
ऊर्जा क्षेत्र भारत-रूस आर्थिक संबंधों का एक प्रमुख आधार बना हुआ है। इसके अलावा निवेश, औद्योगिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और नए व्यापारिक अवसरों को लेकर भी दोनों देश लगातार संभावनाएं तलाश रहे हैं।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि आर्थिक संबंधों को अधिक व्यापक और संतुलित बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएं। इसके लिए व्यापार के नए क्षेत्रों की पहचान और दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी बातचीत का अहम मुद्दा
बैठक के दौरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर भी विचार-विमर्श हुआ। भारत मध्य एशिया और रूस के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए विभिन्न परिवहन और व्यापारिक मार्गों को महत्वपूर्ण मानता है। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल व्यापार बढ़ सकता है, बल्कि मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंध भी मजबूत हो सकते हैं।
भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मध्य एशिया तक भारत की सीधी स्थलीय पहुंच सीमित है। ऐसे में वैकल्पिक परिवहन गलियारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों का महत्व और बढ़ जाता है।
SCO मंच पर भारत की भूमिका पर नजर
शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे विषयों के लिहाज से महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। भारत की भागीदारी के कारण इस मंच पर दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान रहता है।
बिश्केक में मोदी-पुतिन की मुलाकात को SCO सम्मेलन से पहले हुई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में गिना जा रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत ने यह संकेत दिया कि भारत और रूस अपने पुराने संबंधों को बनाए रखने के साथ बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
दुनिया की नजर रूस-यूक्रेन संघर्ष के अगले कदम पर
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर लगातार मॉस्को, कीव और प्रमुख वैश्विक शक्तियों के अगले कदम पर बनी हुई है। भारत ने अब तक संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों से बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है।
बिश्केक में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया शांति और संवाद का संदेश इसी नीति की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। भारत का जोर इस बात पर है कि लंबे समय तक जारी संघर्ष से किसी एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और मानवीय चुनौतियां बढ़ती हैं।
ऐसे में मोदी-पुतिन की यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब नजर SCO शिखर सम्मेलन और उससे इतर होने वाली अन्य कूटनीतिक बैठकों पर रहेगी, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और वैश्विक शांति से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आ सकते हैं।
