उज्जैन RTO इंस्पेक्टर सेवाराम खांडेकर आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष लोकायुक्त अदालत ने 4 साल की सजा और 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जांच में वैध आय से करीब 572 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिलने की बात सामने आई थी।
उज्जैन RTO इंस्पेक्टर सेवाराम खांडेकर केस में बड़ा फैसला: 4 साल की सजा, 60 लाख का जुर्माना
रिपोर्टर : प्रियंका गुजराती | दैनिक स्वराज वाणी
उज्जैन। RTO इंस्पेक्टर सेवाराम खांडेकर आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष लोकायुक्त अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब 15 साल पुराने इस मामले में उज्जैन के तत्कालीन परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेकर को दोषी करार देते हुए अदालत ने 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 60 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय के फैसले के बाद सेवाराम खांडेकर को भैरवगढ़ जेल भेज दिया गया।
यह मामला वर्ष 2011 में लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई के बाद सामने आया था। लोकायुक्त की जांच में तत्कालीन परिवहन निरीक्षक की आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर मिलने की बात सामने आई थी। लंबी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब विशेष अदालत ने मामले में फैसला सुनाया है।
2011 में लोकायुक्त ने सेवाराम खांडेकर के घर मारा था छापा
विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त उज्जैन के अनुसार, 11 नवंबर 2011 को तत्कालीन परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेकर के अलकनंदा नगर स्थित मकान पर लोकायुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई की थी।
कार्रवाई के दौरान घर से बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण सहित विभिन्न प्रकार की संपत्ति और विलासिता की सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद लोकायुक्त ने आरोपी की आय, संपत्ति और खर्च से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू की।
वैध आय से 572 प्रतिशत अधिक मिली संपत्ति
RTO इंस्पेक्टर सेवाराम खांडेकर आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच उप पुलिस अधीक्षक एस.एस. उदावत द्वारा की गई। विवेचना के दौरान सामने आया कि आरोपी की कुल वैध आय 27 लाख 37 हजार 628 रुपये थी, जबकि जांच में उसके पास कुल 1 करोड़ 84 लाख 15 हजार 129 रुपये की संपत्ति और व्यय पाया गया।
जांच के अनुसार यह राशि उसकी ज्ञात वैध आय से करीब 572 प्रतिशत अधिक थी। लोकायुक्त पुलिस ने जांच के दौरान आय के स्रोतों, संपत्ति और खर्च से संबंधित साक्ष्य जुटाए और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की।
30 अगस्त 2014 को विशेष न्यायालय में पेश हुआ था चालान
लोकायुक्त पुलिस ने जांच पूरी करने और पर्याप्त साक्ष्य एकत्रित करने के बाद 30 अगस्त 2014 को विशेष न्यायालय में चालान पेश किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष अदालत में लगातार चली।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज पाठक एवं संजय मीणा (डीडीपी) ने पैरवी की। अभियोजन की ओर से अदालत के समक्ष जांच से संबंधित दस्तावेज, संपत्ति और आय का विवरण तथा अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
अदालत ने सुनाई 4 साल की सजा और 60 लाख का जुर्माना
विशेष लोकायुक्त अदालत ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर तत्कालीन परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेकर को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया।
अदालत ने सेवाराम खांडेकर को 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाने के साथ 60 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। अदालत के आदेश के अनुसार यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं की जाती है तो दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
फैसला सुनाए जाने के बाद सेवाराम खांडेकर को भैरवगढ़ जेल भेज दिया गया।
करीब 15 साल बाद आया फैसला
वर्ष 2011 में लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई से शुरू हुआ यह मामला करीब 15 साल तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरता रहा। 2014 में चालान पेश होने के बाद अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें तथा साक्ष्य सामने रखे गए।
अब विशेष लोकायुक्त अदालत के फैसले के साथ इस बहुचर्चित आय से अधिक संपत्ति मामले में तत्कालीन परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेकर को चार साल के सश्रम कारावास और 60 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
