‘हममें से किसी एक की जीत कई महिलाओं के लिए खोलती है दरवाजे’: कनिका ढिल्लों ने महिला एकजुटता पर रखी बात, ‘गांधारी’ को लेकर भी किया खुलासा
‘वीमेन बिल्डिंग सिनेमा टुगेदर’ पैनल में तापसी पन्नू, कनिका ढिल्लों और गुनीत मोंगा कपूर ने महिला नेतृत्व और सिनेमा में बदलते अवसरों पर की चर्चा
मुंबई, अगस्त 2026। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की भागीदारी अब केवल पर्दे पर मजबूत किरदारों तक सीमित नहीं है। लेखन, निर्देशन और फिल्म निर्माण से लेकर प्रोडक्शन हाउस की कमान संभालने तक महिलाएं लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही हैं। इसी बदलाव और महिला क्रिएटर्स के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कथा पिक्चर्स और डब्ल्यूआईएफ इंडिया ने संयुक्त रूप से ‘वीमेन बिल्डिंग सिनेमा टुगेदर’ नाम से एक विशेष पैनल डिस्कशन आयोजित किया।
कार्यक्रम में अभिनेत्री तापसी पन्नू, राइटर-प्रोड्यूसर कनिका ढिल्लों और ऑस्कर विजेता प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा कपूर ने हिस्सा लिया। तीनों ने भारतीय सिनेमा में महिला नेतृत्व, महिला-केंद्रित कहानियों, प्रोडक्शन के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और इंडस्ट्री में एक मजबूत क्रिएटिव नेटवर्क तैयार करने की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की।
दूसरी महिलाओं की सफलता को सेलिब्रेट करना जरूरी: कनिका ढिल्लों
पैनल के दौरान कनिका ढिल्लों ने महिला क्रिएटर्स के बीच सहयोग और एकजुटता की जरूरत पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनकी कहानियों में दिखाई देने वाली जटिल और मजबूत महिलाएं काल्पनिक दुनिया से नहीं आतीं, बल्कि ऐसी महिलाएं उनके आसपास मौजूद हैं।
कनिका के मुताबिक एक सामान्य महिला को केवल एक आयाम में नहीं देखा जा सकता। वह सिर्फ ऐसी महिला नहीं है जिसे हर समय किसी मदद या सहारे की आवश्यकता हो। महिलाएं अपने फैसले लेने और परिस्थितियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली महिला प्रोफेशनल्स से एक-दूसरे के प्रति अधिक सहयोगी और संवेदनशील होने की अपील की। कनिका ने कहा कि जब किसी महिला को नीचे खींचने की कोशिश की जाए, तब दूसरी महिलाओं को उसके साथ खड़े होने और उसकी उपलब्धियों को सेलिब्रेट करने की जरूरत है।
‘एक महिला की जीत का असर सिर्फ उस तक सीमित नहीं रहता’
कनिका ढिल्लों ने महिला प्रोफेशनल्स की सफलता के व्यापक प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि किसी एक महिला की जीत केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि उससे इंडस्ट्री की कई दूसरी महिलाओं के लिए भी अवसर पैदा होते हैं।
उन्होंने गुनीत मोंगा कपूर और तापसी पन्नू का उदाहरण देते हुए बताया कि जब कोई महिला निर्माता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करती है या किसी महिला कलाकार की फिल्म सफल होती है, तो उसका सकारात्मक असर दूसरी महिला क्रिएटर्स पर भी पड़ता है।
कनिका ने कहा, “हममें से किसी एक की जीत का महत्व जितना आप सोच सकते हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ा है।” उनके मुताबिक गुनीत मोंगा कपूर जैसी निर्माता की सफलता कई अन्य महिलाओं के लिए नए रास्ते खोलती है। इसी तरह तापसी पन्नू का सफल होना और ‘गांधारी’ जैसी फिल्म का निर्माण होना भी महिला-केंद्रित सिनेमा के लिए नए अवसर तैयार करता है।
महिला एकजुटता को बताया बदलाव की अहम जरूरत
चर्चा के दौरान कनिका ने महिलाओं के एक-दूसरे के समर्थन में खड़े होने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए अवसर अभी भी सीमित हैं, इसलिए महिला प्रोफेशनल्स को एक-दूसरे की सफलता को प्रतिस्पर्धा की तरह देखने के बजाय सामूहिक प्रगति के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला को नीचा दिखाया जा रहा हो, तो दूसरी महिलाओं को उसके समर्थन में सामने आना चाहिए। कनिका ने पितृसत्तात्मक व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाएं लंबे समय से सामाजिक चुनौतियों का सामना करती आई हैं और ऐसे में इंडस्ट्री के भीतर एक-दूसरे का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
कई कलाकार और फिल्ममेकर्स भी हुए शामिल
‘वीमेन बिल्डिंग सिनेमा टुगेदर’ कार्यक्रम में फिल्म इंडस्ट्री के कई जाने-माने चेहरे भी मौजूद रहे। इनमें अभिनेत्री संजना सांघी, प्रज्ञा जायसवाल और हरलीन सेठी के साथ डायरेक्टर आशिमा और प्रियंका घोष समेत कई अन्य कलाकार और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स शामिल हुए।
पैनल डिस्कशन के बाद एक इंटरैक्टिव नेटवर्किंग सेशन का भी आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही महिला प्रोफेशनल्स को आपस में जुड़ने, अपने अनुभव साझा करने और भविष्य में संभावित क्रिएटिव पार्टनरशिप के अवसर तलाशने के लिए मंच उपलब्ध कराना था।
महिला किरदारों को अलग नजरिए से पेश करती रही हैं कनिका
कनिका ढिल्लों पिछले कुछ वर्षों में हिंदी सिनेमा की चर्चित राइटर्स और प्रोड्यूसर्स में शामिल रही हैं। उनकी फिल्मों में महिला किरदारों को अक्सर पारंपरिक छवि से अलग, जटिल और कई परतों वाले व्यक्तित्व के रूप में पेश किया गया है।
‘मनमर्जियां’, ‘केदारनाथ’, ‘जजमेंटल है क्या’, ‘हसीन दिलरुबा’, ‘रश्मि रॉकेट’, ‘रक्षा बंधन’, ‘डंकी’, ‘फिर आई हसीन दिलरुबा’ और ‘दो पत्ती’ जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए उन्होंने अलग-अलग तरह की कहानियों और किरदारों को दर्शकों तक पहुंचाया है।
लेखन के साथ कनिका ने प्रोडक्शन में भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है। कथा पिक्चर्स के जरिए वह अपनी क्रिएटिव सोच को निर्माता के रूप में आगे बढ़ा रही हैं। ‘फिर आई हसीन दिलरुबा’ और ‘दो पत्ती’ के बाद अब उनकी नई फिल्म ‘गांधारी’ चर्चा में है।
‘गांधारी’ में छठी बार साथ काम कर रहीं कनिका और तापसी
कनिका ढिल्लों और तापसी पन्नू की क्रिएटिव पार्टनरशिप हिंदी सिनेमा में लगातार आगे बढ़ी है। दोनों इससे पहले ‘मनमर्जियां’, ‘हसीन दिलरुबा’, ‘रश्मि रॉकेट’, ‘डंकी’ और ‘फिर आई हसीन दिलरुबा’ जैसे प्रोजेक्ट्स में साथ काम कर चुकी हैं। अब ‘गांधारी’ के साथ दोनों की यह छठी क्रिएटिव साझेदारी होगी।
फिल्म का निर्देशन देवाशीष मखीजा ने किया है। कनिका ढिल्लों फिल्म की राइटर और प्रोड्यूसर हैं, जबकि तापसी पन्नू मुख्य भूमिका में दिखाई देंगी। फिल्म में इश्वाक सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मां की ताकत और संघर्ष की कहानी होगी ‘गांधारी’
‘गांधारी’ को एक हाई-ऑक्टेन इमोशनल एक्शन ड्रामा के रूप में पेश किया जा रहा है। फिल्म की कहानी एक ऐसी मां के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार है। इस कहानी के जरिए मातृत्व के भावनात्मक पक्ष के साथ एक महिला की ताकत, संघर्ष और एक्शन अवतार को पर्दे पर लाने की कोशिश की गई है।
कनिका और तापसी की पिछली फिल्मों में भी मजबूत महिला किरदार महत्वपूर्ण रहे हैं, लेकिन ‘गांधारी’ के जरिए यह साझेदारी महिला-केंद्रित कहानी को एक्शन के स्पेस में आगे ले जा रही है।
फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। ‘गांधारी’ 3 सितंबर 2026 को नेटफ्लिक्स पर ग्लोबली प्रीमियर होगी। महिला नेतृत्व और महिला-केंद्रित कहानियों पर हुई इस चर्चा के बीच फिल्म को ऐसी कहानी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें एक मां के भावनात्मक संघर्ष के साथ उसकी ताकत और साहस को प्रमुखता से पेश किया जाएगा।
