श्री जिव्हेश्वर जन्मोत्सव पर निकली भव्य पालकी यात्रा, साळी समाज ने दिया एकजुटता का संदेश
फ्रीगंज क्षेत्र में गूंजे ‘श्री जिव्हेश्वर महाराज की जय’ के जयकारे, महिला-पुरुष, युवा और वरिष्ठजन हुए शामिल
उज्जैन। प्रियंका गुजराती। सर्व साळी समाज (मराठी बुनकर समाज), उज्जैन द्वारा प्रथम वस्त्र निर्माता एवं बुनकर समाज के आराध्य भगवान श्री जिव्हेश्वर की जयंती के अवसर पर जन्मोत्सव समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को शहर के फ्रीगंज क्षेत्र में भगवान श्री जिव्हेश्वर की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। धार्मिक उत्साह और सामाजिक एकजुटता से ओतप्रोत इस यात्रा में समाज के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा और वरिष्ठजन शामिल हुए।
पालकी यात्रा के दौरान पूरे फ्रीगंज क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जिव्हेश्वर की पूजा-अर्चना कर पालकी के दर्शन किए और जयकारों के साथ यात्रा का स्वागत किया। यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां समाजजनों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भगवान की पालकी का अभिनंदन किया।
पालकी के दर्शन के लिए उमड़े समाजजन
श्री जिव्हेश्वर जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित पालकी यात्रा को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। यात्रा में शामिल श्रद्धालु धार्मिक ध्वज और भक्ति भाव के साथ आगे बढ़ते रहे। जगह-जगह लोगों ने पालकी का स्वागत किया और भगवान श्री जिव्हेश्वर के जयकारे लगाए।
‘श्री जिव्हेश्वर महाराज की जय’ के जयघोष से फ्रीगंज क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया। समाज के महिला-पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में युवा और वरिष्ठजन भी यात्रा में शामिल हुए। आयोजन में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी ने सामाजिक एकता और पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश दिया।
बुनकर समाज के आराध्य हैं भगवान श्री जिव्हेश्वर
भगवान श्री जिव्हेश्वर को बुनकर समाज द्वारा वस्त्र निर्माण और बुनकरी परंपरा के आराध्य के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। समाज की मान्यता और परंपरा में भगवान श्री जिव्हेश्वर का विशेष स्थान है। उनके जन्मोत्सव के माध्यम से समाज अपनी पारंपरिक विरासत, संस्कृति और धार्मिक आस्था को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करता है।
जन्मोत्सव समारोह के दौरान समाजजनों ने भगवान श्री जिव्हेश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के साथ बुनकरी और वस्त्र निर्माण से जुड़ी अपनी पारंपरिक पहचान को भी याद किया।
आयोजकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज की नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और संस्कृति से जोड़ना आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जन्मोत्सव समारोह में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक एकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
‘धागा-धागा अखंड, बुनकर समाज एक’ का संदेश
पालकी यात्रा के माध्यम से सर्व साळी समाज ने एकजुटता का संदेश दिया। समाज की ओर से ‘धागा-धागा अखंड, बुनकर समाज एक’ की भावना को प्रमुखता से सामने रखा गया।
समाजजनों ने कहा कि जिस प्रकार अलग-अलग धागे मिलकर एक मजबूत वस्त्र का निर्माण करते हैं, उसी प्रकार समाज के सभी वर्गों और परिवारों की एकजुटता से समाज मजबूत बनता है। पालकी यात्रा के माध्यम से समाज में आपसी भाईचारा, सहयोग और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
आयोजकों के अनुसार समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सामूहिक सहभागिता से समाज के लोगों के बीच आपसी संबंध और मजबूत होते हैं।

महिला, युवा और वरिष्ठजनों की सक्रिय भागीदारी
श्री जिव्हेश्वर जन्मोत्सव समारोह की पालकी यात्रा में समाज के हर वर्ग की भागीदारी रही। महिलाओं ने धार्मिक उत्साह के साथ यात्रा में हिस्सा लिया, वहीं युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में शामिल हुआ। वरिष्ठ समाजजनों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
आयोजकों ने कहा कि नई पीढ़ी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे युवा अपनी विरासत को समझते हैं और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं।
पालकी यात्रा के दौरान परिवारों ने सामूहिक रूप से हिस्सा लेकर सामाजिक एकता का परिचय दिया। बच्चों और युवाओं की भागीदारी से आयोजन में विशेष उत्साह नजर आया।
जगह-जगह हुआ पालकी का स्वागत
फ्रीगंज क्षेत्र में पालकी यात्रा के मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जिव्हेश्वर की पालकी का स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर समाजजनों ने यात्रा में शामिल लोगों का भी स्वागत किया।
यात्रा के दौरान धार्मिक जयघोष लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं में भगवान श्री जिव्हेश्वर के प्रति आस्था और उत्साह स्पष्ट रूप से नजर आया। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण के साथ सामाजिक सद्भाव का संदेश भी दिखाई दिया।
परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प
श्री जिव्हेश्वर जन्मोत्सव समारोह केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
आयोजकों ने बताया कि भगवान श्री जिव्हेश्वर की जयंती समाज के लिए अपनी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को याद करने का अवसर है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को समाज के इतिहास, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक व्यवसाय से परिचित कराया जाता है।
समारोह के माध्यम से समाजजनों ने आपसी भाईचारे और एकता को मजबूत करने के साथ अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
श्री जिव्हेश्वर जन्मोत्सव पर निकली पालकी यात्रा ने उज्जैन में धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। भगवान श्री जिव्हेश्वर के जयकारों से गूंजते फ्रीगंज क्षेत्र में समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से अपनी आस्था व्यक्त की।
सर्व साळी समाज द्वारा आयोजित इस समारोह में धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का संदेश प्रमुख रहा। आयोजकों ने समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर अपनी परंपराओं और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
दैनिक स्वराज वाणी
प्रियंका गुजराती | उज्जैन
