विहिप-बजरंग दल के उज्जैन में चक्काजाम का असर नागदा और उन्हेल तक, टू-लेन पर कछुआ चाल से चले वाहन
सवांददाता : प्रमोद कुमार जैन
नागदा। उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई के विरोध में सोमवार सुबह विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए चक्काजाम का असर उज्जैन से लेकर उन्हेल और नागदा तक दिखाई दिया। जावरा-उज्जैन स्टेट हाईवे-17 के टू-लेन मार्ग पर ढाबला फंटे के पास संगठन द्वारा करीब डेढ़ घंटे तक चक्काजाम किए जाने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
चक्काजाम के कारण उज्जैन से आगे उन्हेल और फिर नागदा की ओर आने वाले वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई। कई स्थानों पर वाहन कछुआ चाल से चलते नजर आए। वाहनों की अधिक संख्या और धीमी गति के कारण उन्हेल में करीब 30 मिनट और नागदा में लगभग 20 मिनट तक जाम की स्थिति बनी रही। इस दौरान कुछ वाहन आपस में टकरा गए, जिसके बाद विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई। एक वाहन में सवार महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद वाहन को सड़क पर रोकना पड़ा, जिससे यातायात और प्रभावित हुआ।
मंदिर हटाने की कार्रवाई के विरोध में चक्काजाम
बताया गया कि उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर खड़े हनुमान मंदिर को सोमवार सुबह तक हटाने की बात सामने आने के बाद विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई। संगठन के कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए जावरा-उज्जैन स्टेट हाईवे-17 पर ढाबला फंटे के पास चक्काजाम कर दिया।
चक्काजाम शुरू होते ही हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की कतारें लगने लगीं। देखते ही देखते सड़क पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई। वाहन चालकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। जाम की सूचना मिलते ही शासन-प्रशासन सक्रिय हुआ और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा की।
आंदोलन के दौरान संगठन की ओर से खड़े हनुमान मंदिर को हटाए जाने का विरोध किया गया। कार्यकर्ताओं ने मंदिर को नहीं तोड़े जाने और अपनी अन्य मांगों पर कार्रवाई की मांग रखी। अधिकारियों ने संगठन के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद आश्वासन दिया कि खड़े हनुमान मंदिर को नहीं तोड़ा जाएगा तथा संगठन की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद करीब डेढ़ घंटे बाद चक्काजाम समाप्त किया गया। इसके बाद हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ, लेकिन तब तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग चुकी थीं। जाम खुलने के बाद भी बड़ी संख्या में वाहन एक-दूसरे के पीछे धीमी गति से आगे बढ़ते नजर आए।
इन कार्यकर्ताओं ने संभाला मोर्चा
ढाबला फंटे पर हुए चक्काजाम के दौरान विहिप और बजरंग दल के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। आंदोलन में शहर से जिला संयोजक महेश आंजना, जितेंद्र पांचाल, जगदीश धाकड़, ईश्वर हलकारा, नारायण शर्मा, भारत प्रजापत, दिलीप राठौड़, संजय आंजना, कमल मृत्युंजय, ईश्वर राजपूत और कान्हा डोडिया सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मंदिर को लेकर अपनी नाराजगी जताई तथा प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
उन्हेल में 30 और नागदा में 20 मिनट तक प्रभावित रहा यातायात
ढाबला फंटे पर करीब डेढ़ घंटे चले चक्काजाम का सीधा असर उज्जैन से जावरा की ओर आने वाले यातायात पर पड़ा। जाम के कारण वाहन लगातार धीमी गति से आगे बढ़ते रहे। उज्जैन से उन्हेल की ओर आने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने से उन्हेल में भी करीब 30 मिनट तक जाम की स्थिति बनी रही।
इसके बाद जाम का असर नागदा तक पहुंच गया। नागदा में भी करीब 20 मिनट तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। वाहन एक-दूसरे के पीछे धीमी गति से चलते रहे। इसी दौरान कुछ वाहनों के आपस में टकराने की बात भी सामने आई, जिसके बाद वाहन चालकों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हुई।
जाम के बीच एक वाहन में सवार महिला की तबीयत बिगड़ गई। महिला की स्थिति को देखते हुए वाहन को सड़क के बीच में रोकना पड़ा। पहले से धीमी गति से चल रहे यातायात के बीच वाहन रुकने से सड़क पर वाहनों की आवाजाही और बाधित हो गई।
हालांकि कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हुई और वाहनों को आगे निकाला गया। लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जावरा-उज्जैन स्टेट हाईवे-17 के टू-लेन मार्ग पर बढ़ते यातायात दबाव और सड़क की क्षमता को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
डेढ़ घंटे के जाम ने उठाए सिंहस्थ की तैयारियों पर सवाल
सोमवार को ढाबला फंटे पर करीब डेढ़ घंटे के चक्काजाम का असर केवल आंदोलन स्थल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव उज्जैन से उन्हेल और नागदा तक दिखाई दिया। ऐसे में आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के दौरान इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान उज्जैन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित आसपास के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के वाहनों के कारण जावरा-उज्जैन मार्ग पर यातायात का दबाव सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ सकता है।
वर्तमान में जावरा से उज्जैन के बीच कई हिस्सों में टू-लेन सड़क ही प्रमुख मार्ग के रूप में उपयोग हो रही है। सोमवार को हुए चक्काजाम के दौरान महज डेढ़ घंटे में वाहनों की गति उज्जैन से लेकर नागदा तक प्रभावित हो गई। ऐसे में सवाल यह है कि यदि सिंहस्थ के दौरान इस मार्ग पर वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ती है, तो प्रशासन यातायात को किस तरह नियंत्रित करेगा।
जुलाई 2028 तक फोरलेन पूरा होने की समयसीमा
सरकार द्वारा सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए जावरा से उज्जैन तक ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे का निर्माण कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ने वाले यातायात दबाव को कम करना और उज्जैन तक पहुंचने वाले वाहनों के लिए बेहतर मार्ग उपलब्ध कराना है।
हालांकि निर्माण कार्य पूरा होने की निर्धारित समयसीमा जुलाई 2028 बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि फोरलेन का निर्माण सिंहस्थ महाकुंभ के प्रारंभ होने से पहले पूरा नहीं हुआ, तो भारी यातायात का दबाव मौजूदा टू-लेन मार्ग पर ही रहेगा।
सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के वाहनों को जावरा में ही होल्ड करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, ताकि उज्जैन शहर में एक साथ अत्यधिक वाहन प्रवेश न करें। लेकिन सवाल यह है कि जो वाहन अन्य मार्गों से इस टू-लेन सड़क पर पहुंचेंगे, उन्हें किस तरह नियंत्रित किया जाएगा।
सोमवार के चक्काजाम ने इस चुनौती की एक झलक सामने रख दी। यदि सामान्य दिनों में किसी एक स्थान पर यातायात रुकने से उसका असर कई किलोमीटर दूर तक पहुंच सकता है, तो सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान स्थिति कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
एक साल से सड़क चौड़ीकरण की मांग
नागदा क्षेत्र के लोगों द्वारा पिछले करीब एक वर्ष से जावरा-उज्जैन स्टेट हाईवे-17 के चौड़ीकरण की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर बढ़ते यातायात के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। सड़क चौड़ी होने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना को भी कम किया जा सकेगा।
क्षेत्रवासियों के अनुसार मुख्यमंत्री द्वारा भी गत दिनों इस सड़क के चौड़ीकरण की घोषणा की जा चुकी है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से अब तक सड़क चौड़ीकरण को लेकर अपेक्षित पहल दिखाई नहीं दी है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में तेजी आनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आया।
सिंहस्थ से पहले चुनौती का समाधान जरूरी
सोमवार को हुए चक्काजाम और उसके बाद उज्जैन से नागदा तक प्रभावित हुए यातायात ने प्रशासन के सामने भविष्य की चुनौती को स्पष्ट कर दिया है। एक ओर सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रमुख मार्गों पर यातायात क्षमता बढ़ाने की जरूरत लगातार सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंहस्थ के दौरान यदि यातायात का दबाव कई गुना बढ़ने वाला है तो सड़क चौड़ीकरण, वैकल्पिक मार्ग, ट्रैफिक डायवर्जन, आपातकालीन व्यवस्थाओं और वाहन होल्डिंग की योजनाओं पर समय रहते ठोस तैयारी जरूरी है।
फिलहाल सोमवार के चक्काजाम के बाद यातायात व्यवस्था सामान्य हो गई, लेकिन इस घटना ने जावरा-उज्जैन टू-लेन मार्ग की क्षमता और आगामी सिंहस्थ के दौरान यातायात प्रबंधन को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को लेकर कितनी तेजी से कदम उठाता है।
