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क्या हम सच में जैन धर्म का सम्मान करते हैं?’ हार्दिक हुंडिया ने उठाए 10 तीखे सवाल

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Published On: 30 August 2026
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जैन धर्म पर हार्दिक हुंडिया के सवालों वाली पोस्ट चर्चा में है। साधु आचरण, ट्रस्ट, संपत्ति, महोत्सव और धार्मिक व्यवस्था को लेकर उन्होंने कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

जैन धर्म पर हार्दिक हुंडिया के 10 तीखे सवाल: ‘शासन प्रेमियों अब तो जागो’

रिपोर्टर: हार्दिक हुंडिया

जैन धर्म पर हार्दिक हुंडिया के सवाल इन दिनों समाज के भीतर आत्ममंथन और चर्चा का विषय बन सकते हैं। हार्दिक हुंडिया ने अपनी पोस्ट में जैन समाज और धर्म प्रेमियों से कई सवाल पूछते हुए कहा है कि यदि हम वास्तव में जैन धर्म का सम्मान करते हैं, तो धर्म और शासन के नाम पर सामने आने वाली कथित विसंगतियों पर आवाज क्यों नहीं उठाते?

हार्दिक हुंडिया लिखते हैं कि शायद उनकी पोस्ट पढ़कर कुछ लोगों को गुस्सा आए, लेकिन उनका सवाल है कि हर व्यक्ति अपनी आत्मा से पूछे कि क्या हम सच में जैन धर्म का सम्मान करते हैं?

शिथिलाचार और साधु जीवन को लेकर सवाल

हार्दिक हुंडिया ने सवाल उठाया कि यदि संघ जागृत और जैन धर्म के प्रति पूरी तरह समर्पित है, तो कथित शिथिलाचारी या कुसाधु संघ के उपाश्रय में प्रवेश कैसे कर सकते हैं?

उन्होंने साधुओं के नाम पर संपत्ति और बैंक खातों को लेकर भी सवाल किया। उनका कहना है कि जब कोई मुमुक्षु दीक्षा लेते समय संसार की वस्तुओं का त्याग करता है, तो फिर संसारी नाम वाले आधार कार्ड से हवाई यात्रा की टिकट कैसे बनती है और उनके नाम से बैंक खाते कैसे संचालित हो सकते हैं?

ईडर प्रकरण का भी किया उल्लेख

अपनी पोस्ट में हार्दिक हुंडिया ने ईडर से जुड़े कथित मामले का उल्लेख करते हुए कल्याण सागर और राज तिलक सागर का नाम लिया है। उन्होंने दावा किया कि एक महिला से संबंधित कथित वीडियो सामने आने के बाद भी यदि संबंधित लोग साधु वेश में रहते हैं तो समाज और संघ को इस पर विचार करना चाहिए।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पोस्ट में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस लेख में नहीं की गई है और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

सागर चंद्र को लेकर भी उठाया प्रश्न

हार्दिक हुंडिया ने सागर चंद्र का नाम लेते हुए सवाल किया कि यदि संघ जागृत होता तो कथित दुराचार के आरोपों से जुड़े किसी व्यक्ति द्वारा दादा सुधर्मा स्वामीजी की पाठ पर चरित्र का पाठ पढ़ाए जाने जैसी स्थिति क्यों बनती?

उन्होंने जैन धर्म प्रेमियों से आग्रह किया कि ऐसे विषयों पर व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध से ऊपर उठकर धार्मिक मर्यादा और सिद्धांतों के आधार पर विचार होना चाहिए।

प्राइवेट ट्रस्ट और नए धाम पर सवाल

हार्दिक हुंडिया ने प्राइवेट ट्रस्टों के माध्यम से बनाए जा रहे नए मंदिरों, उपाश्रयों और ‘धाम’ को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पुराने तीर्थों में समस्याएं होने के बावजूद नए धामों के निर्माण पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है?

उन्होंने ट्रस्टों की आर्थिक पारदर्शिता पर सवाल करते हुए कहा कि यदि किसी प्राइवेट ट्रस्ट ने अपना पूरा हिसाब समाज के सामने सार्वजनिक किया है तो उसकी जानकारी सामने आनी चाहिए।

हुंडिया ने नए धार्मिक निर्माणों में ट्रस्टियों को नाम, आर्थिक लाभ अथवा अन्य फायदे मिलने की आशंका भी अपनी पोस्ट में जताई है।

अजैन संतों के सम्मान पर भी सवाल

हार्दिक हुंडिया ने लिखा कि जैन संत समाज के सामने पांच महाव्रत धारी होने का संदेश देते हैं, लेकिन कुछ अवसरों पर अजैन संतों के पैर छूने जैसी तस्वीरें भी देखने को मिलती हैं।

उन्होंने सवाल किया कि जैन संत अपने कार्यक्रमों में अजैन संतों को बुलाकर अपने बराबर में बैठाते हैं, जबकि उनके साथ रहने वाले साधु वेशधारी शिष्यों को किनारे क्यों बैठाया जाता है?

करोड़ों के महोत्सव क्यों?

हार्दिक हुंडिया ने धार्मिक महोत्सवों में होने वाले कथित करोड़ों रुपये के खर्च पर भी सवाल किया। उनका कहना है कि स्वामी भाइयों को मजबूत करने और जरूरतमंद समाजजनों की सहायता करने के बजाय नाम और प्रतिष्ठा के लिए बड़े-बड़े महोत्सवों पर करोड़ों रुपये खर्च करने की आवश्यकता पर समाज को विचार करना चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब जैन परंपरा में आचार्य से बड़ी कोई पदवी नहीं मानी जाती, तो फिर सांसारिक पदवियां लेकर स्वयं का गुणगान करवाने की प्रवृत्ति को किस रूप में देखा जाना चाहिए?

‘शासन प्रेमियों अब तो जागो’

हार्दिक हुंडिया ने अपनी पोस्ट के अंत में जैन धर्म प्रेमियों से ‘दो हाथ बिनती’ करते हुए कहा कि भगवान महावीर के शासन में यदि ऐसी घटनाओं और आरोपों की चर्चा सामने आती है, तो समाज को अपनी आत्मा से सवाल करना चाहिए।

उनका कहना है कि हम अक्सर कहते हैं कि हमें जैन धर्म का बहुत सम्मान है, लेकिन यदि हमारे सामने धर्म की मर्यादा से जुड़े सवाल उठते रहें और हम आवाज तक न उठा सकें तो हमें आत्ममंथन करना चाहिए कि कहीं हमारा धर्म सम्मान केवल कहने तक सीमित तो नहीं है।

हार्दिक हुंडिया ने अपनी बात “शासन प्रेमियों अब तो जागो” की अपील और उच्च भावनाओं के साथ समाप्त की है।

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