Indore दलाल बाग चातुर्मास में मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कर्म, भाव, चरित्र और सच्ची भक्ति का महत्व बताया। गुजरात से 1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने पहुंचकर 2027 के चातुर्मास के लिए श्रीफल समर्पित किया।
भगवान पर विश्वास रखो, पर जीवन की गाड़ी खुद चलाओ : मुनि सुधासागर जी
राजेश जैन दद्दू
Indore। मुनि सुधासागर जी महाराज इंदौर के दलाल बाग चातुर्मास में दलाल बाग स्थित देशना मंडप में पूज्य मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कहा कि भगवान पर विश्वास रखना अच्छी बात है, लेकिन पूरी जिंदगी भगवान भरोसे छोड़ देना उचित नहीं है। हम अक्सर भगवान को ही अपनी जिंदगी का ड्राइवर बना लेते हैं, सोचते हैं भगवान सब ठीक कर देंगे। जबकि गाड़ी हमारी है, रास्ता हमारा है, ड्राइवर भी हमें ही बनना होगा। भगवान रास्ता दिखा सकते हैं, आशीर्वाद दे सकते हैं, लेकिन गाड़ी हमें ही चलानी है।
कर्म से पहले भाव को देखो
गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण उसके भाव हैं। बाहर का कर्म बाद में आता है, शुरुआत भीतर की भावना से होती है। गलत भावना ही पाप कर्म का कारण बनती है। इसलिए केवल बाहरी आचरण नहीं, भीतर के भावों को शुद्ध करना जरूरी है। भाव शुद्ध होंगे तो कर्म शुद्ध होंगे।
जाति से बड़ा कर्म, कुल से बड़ा चरित्र
उन्होंने कहा मनुष्य का परिचय जन्म-जाति से नहीं, कर्म और चरित्र से होता है। हमारे कर्म इतने अच्छे हों कि कुल का नाम हमारे कारण ऊंचा हो। केवल मंदिर जाना पर्याप्त नहीं, मंदिर हमें भीतर देखने की प्रेरणा देता है। धर्म तब सार्थक है जब उसे जीवन में धारण किया जाए। सच्ची भक्ति भगवान से मांगना नहीं, भगवान के गुणों को जीवन में उतारना है।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री ने यह भी कहा कि कर्म की कभी उपेक्षा मत करना। एक बार भले ही मां-बाप की, धर्म की बात मत मानना चलेगा, लेकिन कर्म की बात अवश्य मानना, क्योंकि कर्म बहुत शक्तिशाली होता है और वह न किसी को छोड़ता है और न क्षमा करता है।
जैन कुल और संस्कार पूर्व जन्म के कर्म का परिणाम
मुनि श्री ने कहा कि जो तुम्हें आज जैन कुल मिला, जैन धर्म के संस्कार मिले, देव दर्शन, अभिषेक, पूजन की सुविधा मिली, गुरु का सानिध्य, आशीर्वाद और चातुर्मास मिला, वह सब तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्म और मरते समय की गई कर्म बद्ध (भावना) का परिणाम है कि तुम्हें जैन कुल मिला।
उन्होंने कहा कि भारत में आज ऐसे भी गांव हैं, जहां आज तक कोई मुनि महाराज नहीं पहुंचे। लेकिन इंदौर के लोग सौभाग्यशाली हैं कि यहां निरंतर साधु का सानिध्य और चातुर्मास होते रहते हैं।
धर्म सभा का संचालन आवाज की दुनिया के जादूगर अनुराग जैन ने किया।
2027 के चातुर्मास की भावना लेकर गुजरात से पहुंचे 1000 से अधिक श्रद्धालु
दद्दू ने बताया कि आज गुजरात से 1000 से अधिक श्रद्धालु दलाल बाग पहुंचे। श्रद्धालुओं ने 2027 के अगले चातुर्मास की भावना लेकर मुनि श्री के समक्ष श्रीफल समर्पित किया और उनसे अगला चातुर्मास गुजरात की वसुंधरा पर करने का विनम्र भाव से निवेदन किया।
इस अवसर पर आलोक, आकाश कोल, अक्षय कासलीवाल, नवीन गोधा, आनंद गोधा, हर्ष जैन, भूपेंद्र भोपाली, डॉ. जैनेंद्र जैन, वीरेंद्र देवरी, अखिलेश, अरविंद सोधिया, राजेश दद्दू और संजय पाटोदी सहित अनेक समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे।
मुनि सुधासागर जी महाराज के संदेश की प्रमुख बातें
मुनि सुधासागर जी महाराज इंदौर के दलाल बाग में धर्मसभा के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन में कर्म की शक्ति को समझने, अपने भावों को शुद्ध रखने और धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखते हुए आचरण में उतारने का संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि भगवान पर श्रद्धा और विश्वास के साथ मनुष्य को स्वयं भी पुरुषार्थ करना चाहिए। जीवन की दिशा तय करने और आगे बढ़ने की जिम्मेदारी स्वयं मनुष्य की है।
