दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर उत्पादकों की हड़ताल, शहर में दूध नहीं लाने का लिया संकल्प
चारा, खल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का हवाला देकर दूध उत्पादकों ने उठाई भाव बढ़ाने की मांग, बालीपुर-सेमलदा सहित कई गांवों के उत्पादक बैठक में हुए शामिल
मनावर। ग्रामीण क्षेत्रों से नगर में दूध की आपूर्ति करने वाले दूध उत्पादकों ने दूध के दाम बढ़ाने सहित अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार से हड़ताल शुरू कर दी। दूध उत्पादकों के हड़ताल पर जाने से नगर में दूध की नियमित आपूर्ति प्रभावित हुई और उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। उत्पादकों का कहना है कि पशुपालन से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि उन्हें मिलने वाले दूध के दाम में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है।
हड़ताल को लेकर आयोजित बैठक में बालीपुर, सेमलदा, देवला, वायल और जुलवानिया सहित आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों से दूध उत्पादक शामिल हुए। बैठक में दूध उत्पादन की बढ़ती लागत और वर्तमान कीमतों को लेकर चर्चा की गई।
पशु आहार हुआ महंगा, दूध के भाव नहीं बढ़े
दूध उत्पादकों का कहना है कि पिछले कुछ समय में दैनिक उपयोग की लगभग सभी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। पशुपालन में इस्तेमाल होने वाली खल, कांकड़े, चारा एवं अन्य पशु आहार की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं।
इसके बावजूद दूध के दाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ने से दूध उत्पादकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि गाय और भैंस के पालन-पोषण पर होने वाला खर्च पहले की तुलना में बढ़ गया है। ऐसे में मौजूदा कीमत पर दूध की बिक्री करने से लागत निकालना मुश्किल होता जा रहा है।
पेट्रोल के बढ़ते खर्च का भी उठाया मुद्दा
ग्रामीण दूध उत्पादकों ने परिवहन खर्च का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में उत्पादक प्रतिदिन मोटरसाइकिल से गांवों से दूध लेकर नगर पहुंचते हैं। इसके लिए पेट्रोल का खर्च भी उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है।
दूध उत्पादन की लागत के साथ परिवहन खर्च जुड़ने के कारण उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ जाती है। उत्पादकों का कहना है कि पशुओं की देखभाल, चारा, खल और अन्य सामग्री खरीदने के साथ दूध को गांव से शहर तक पहुंचाने में भी अच्छी-खासी राशि खर्च होती है।
कई गांवों के दूध उत्पादक बैठक में हुए शामिल
अपनी मांगों को लेकर दूध उत्पादकों की बैठक आयोजित की गई। इसमें बालीपुर, सेमलदा, देवला, वायल, जुलवानिया सहित आसपास के कई गांवों से दूध उत्पादक पहुंचे।
बैठक के दौरान सभी ने अपनी समस्याएं रखीं और दूध की वर्तमान कीमतों को लेकर चर्चा की। उत्पादकों ने कहा कि बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए दूध के दाम निर्धारित किए जाने चाहिए, ताकि पशुपालन और दूध उत्पादन से जुड़े परिवारों को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़े।
बैठक में दूध उत्पादकों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुट रहने का निर्णय भी लिया।
डेयरी संचालकों से मांगा समर्थन
हड़ताली दूध उत्पादकों ने नगर के डेयरी संचालकों से भी उनकी मांगों के समर्थन में सहयोग करने की अपील की है। उनका कहना है कि दूध उत्पादन और इसकी बिक्री की पूरी व्यवस्था उत्पादकों, विक्रेताओं और उपभोक्ताओं से जुड़ी हुई है। इसलिए बढ़ती उत्पादन लागत की समस्या का समाधान आपसी चर्चा और सहयोग से किया जाना चाहिए।
दूध उत्पादकों को उम्मीद है कि डेयरी संचालक उनकी आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ती लागत को समझते हुए उनकी मांगों का समर्थन करेंगे।
हाथ में जल लेकर लिया संकल्प
बैठक के बाद दूध उत्पादकों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता प्रदर्शित करते हुए हाथ में जल लेकर संकल्प किया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे नगर में दूध लेकर नहीं आएंगे।
दूध उत्पादकों के इस निर्णय के बाद नगर की नियमित दूध आपूर्ति पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है। यदि हड़ताल लंबी चलती है तो आम उपभोक्ताओं के साथ चाय-नाश्ते की दुकानों, मिठाई कारोबारियों और दूध पर निर्भर अन्य व्यवसायों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उपभोक्ताओं को हुई परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले दूध की आपूर्ति प्रभावित होने से नगर के उपभोक्ताओं को परेशानी हुई। रोजाना सीधे दूध उत्पादकों से दूध खरीदने वाले परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।
नगर की दूध आपूर्ति में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में कई गांवों के उत्पादकों के एक साथ हड़ताल पर जाने से इसका सीधा प्रभाव स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है।
फिलहाल दूध उत्पादक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बढ़ती उत्पादन और परिवहन लागत को देखते हुए दूध के दाम में उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए। अब दूध उत्पादकों और डेयरी संचालकों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी। हड़ताल कितने समय तक जारी रहेगी, यह मांगों को लेकर बनने वाली सहमति पर निर्भर करेगा।
