पांच साल बाद मिला शहीद का दर्जा, लेकिन 1 करोड़ की सहायता और मकान का अब भी इंतजार
शिकारियों का सामना करते हुए जान गंवाने वाले वनरक्षक मदनलाल वर्मा के परिवार की अधूरी हैं उम्मीदें; रतनपुर बीट का नाम हुआ शहीद के नाम पर, प्रतिमा लगने का इंतजार; सिंहस्थ 2028 की सड़क चौड़ीकरण योजना से मौजूदा आशियाना भी प्रभावित होने की चिंता
संवाददाता : प्रियंका गुजराती
उज्जैन। जंगल और वन्यजीवों की रक्षा के दौरान शिकारियों का सामना करते हुए अपनी जान गंवाने वाले वनरक्षक मदनलाल वर्मा के परिवार का पांच साल लंबा इंतजार अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। एक ओर परिवार को पांच वर्ष बाद मदनलाल वर्मा की शहादत का आधिकारिक सम्मान मिला है, वहीं दूसरी ओर परिवार का दावा है कि घटना के बाद घोषित एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और मकान अब तक नहीं मिल पाया है।
उज्जैन के गढ़कालिका मार्ग क्षेत्र के निवासी वनरक्षक मदनलाल वर्मा की 4 फरवरी 2021 को देवास जिले के पुंजापुरा वन क्षेत्र की रतनपुर बीट में ड्यूटी के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी। बताया गया कि वे जंगल में शिकारियों की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद उनका पीछा कर रहे थे। इसी दौरान उन पर गोली चलाई गई।
घटना के करीब पांच वर्ष बाद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उनकी पत्नी कृष्णा वर्मा को शहीद सम्मान पत्र प्रदान किया गया। परिवार के लिए यह गौरव का क्षण था, लेकिन इसके साथ ही वर्षों पहले की गई घोषणाओं को पूरा किए जाने की मांग भी एक बार फिर सामने आ गई है।
हथियारबंद शिकारियों के पीछे अकेले निकल पड़े थे वनरक्षक
4 फरवरी 2021 को मदनलाल वर्मा पुंजापुरा वन क्षेत्र की रतनपुर बीट में अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। वन क्षेत्र में शिकारियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने उनका पीछा शुरू किया।
परिवार और घटना से जुड़ी सामने आई जानकारी के अनुसार शिकारी हथियारों से लैस थे, जबकि मदनलाल वर्मा निहत्थे बताए गए। इसके बावजूद उन्होंने पीछे हटने के बजाय जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी।
शिकारियों का पीछा करने के दौरान उन पर गोली चला दी गई। गोली लगने के कारण उनकी जान चली गई। इस घटना ने वन विभाग से लेकर उनके परिवार और क्षेत्र के लोगों तक को झकझोर दिया था।
मदनलाल वर्मा का बलिदान वन विभाग में काम करने वाले उन कर्मचारियों के सामने आने वाले खतरों को भी सामने लाता है, जो जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मैदानी क्षेत्रों में तैनात रहते हैं।
मोबाइल में रिकॉर्ड हुआ था अंतिम घटनाक्रम

मदनलाल वर्मा की मौत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू उनका मोबाइल फोन भी रहा। घटना के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक उनके मोबाइल में शिकारियों का पीछा किए जाने से जुड़ा घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ था।
जब मदनलाल वर्मा ड्यूटी से वापस नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू की गई। बाद में जंगल में उनका शव मिला। मोबाइल में रिकॉर्ड घटनाक्रम और गोली चलने की आवाज से जुड़ी जानकारी जांच के दौरान महत्वपूर्ण मानी गई।
परिवार के लिए यह रिकॉर्डिंग केवल जांच से जुड़ा साक्ष्य नहीं थी, बल्कि मदनलाल वर्मा के जीवन के अंतिम क्षणों से जुड़ी बेहद भावुक स्मृति भी बन गई।
शहादत के बाद परिवार के लिए हुई थीं बड़ी घोषणाएं
मदनलाल वर्मा की मौत के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा परिवार को सहायता देने से संबंधित घोषणाएं किए जाने की बात सामने आई थी।
परिवार के अनुसार इनमें एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और मकान उपलब्ध कराने की घोषणा शामिल थी।
परिवार का कहना है कि एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिल चुकी है, लेकिन एक करोड़ रुपये की घोषित आर्थिक सहायता और मकान का लाभ अभी तक नहीं मिला है।
अब परिवार चाहता है कि वर्षों से लंबित इन घोषणाओं पर सरकार और संबंधित विभाग जल्द निर्णय लें और उन्हें पूरा किया जाए।
पांच साल बाद पत्नी कृष्णा वर्मा को मिला शहीद सम्मान पत्र


मदनलाल वर्मा को आधिकारिक रूप से शहीद का सम्मान मिलने का परिवार लंबे समय से इंतजार कर रहा था। पांच वर्ष बाद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उनकी पत्नी कृष्णा वर्मा को शहीद सम्मान पत्र सौंपा गया।
यह अवसर परिवार के लिए भावुक और गौरवपूर्ण रहा। परिवार को इस बात का संतोष है कि जंगल और वन्यजीवों की रक्षा के दौरान मदनलाल वर्मा द्वारा दिए गए बलिदान को आधिकारिक पहचान मिली।
हालांकि परिवार का कहना है कि सम्मान पत्र के साथ उन घोषणाओं को भी पूरा किया जाना चाहिए, जो घटना के बाद परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए की गई थीं।
परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल एक करोड़ रुपये की घोषित सहायता और मकान को लेकर है।
रतनपुर बीट को मिला मदनलाल वर्मा का नाम
जिस रतनपुर बीट में मदनलाल वर्मा ने अपनी जान गंवाई थी, उसका नाम उनके नाम पर रखा गया है। अब यह वन क्षेत्र उनके बलिदान की स्मृति से जुड़ गया है।
परिवार इसे मदनलाल वर्मा के प्रति सम्मान की महत्वपूर्ण पहल मानता है। हालांकि परिजन चाहते हैं कि रतनपुर बीट में उनकी प्रतिमा भी स्थापित की जाए।
परिवार का मानना है कि जिस स्थान पर मदनलाल वर्मा ने वन और वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए, वहां उनकी प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों और वनकर्मियों को उनके साहस तथा कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाएगी।
अब सिंहस्थ चौड़ीकरण में मौजूदा मकान प्रभावित होने की चिंता
परिवार की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर चल रही तैयारियों और सड़क चौड़ीकरण से मदनलाल वर्मा के परिवार का वर्तमान मकान भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
परिवार के अनुसार सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में मकान का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। यह वही घर है, जहां परिवार वर्षों से रह रहा है और जिससे मदनलाल वर्मा की अनेक यादें जुड़ी हुई हैं।
पति को खोने के बाद पत्नी कृष्णा वर्मा के सामने अब अपने आशियाने को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है। परिवार का कहना है कि यदि मकान का बड़ा हिस्सा चौड़ीकरण में चला जाता है तो उनके सामने रहने की समस्या पैदा हो सकती है।
परिवार उचित मुआवजे और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की मांग कर रहा है।
परिवार का सवाल—घोषित मकान समय पर मिलता तो क्या आज यह संकट होता?

परिवार का कहना है कि यदि शहादत के बाद की गई घोषणा के अनुरूप उन्हें मकान उपलब्ध करा दिया गया होता तो वर्तमान में सड़क चौड़ीकरण से पैदा हुई आवास संबंधी चिंता इतनी गंभीर नहीं होती।
परिजनों के मुताबिक अब उन्हें एक तरफ वर्षों पुरानी मकान की घोषणा पूरी होने का इंतजार है, तो दूसरी तरफ वर्तमान घर के प्रभावित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में परिवार चाहता है कि सरकार मामले को विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए देखे और शहीद की पत्नी एवं परिवार के सुरक्षित आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता को लेकर भी इंतजार
परिवार की दूसरी प्रमुख मांग एक करोड़ रुपये की घोषित आर्थिक सहायता से जुड़ी है। परिवार का दावा है कि पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी यह राशि उन्हें नहीं मिली है।
परिजनों के लिए यह सहायता केवल आर्थिक राशि का मामला नहीं है, बल्कि शहादत के बाद सरकार द्वारा किए गए वादे और परिवार को दिए गए भरोसे से जुड़ा विषय भी है।
परिवार चाहता है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करे और यदि सहायता लंबित है तो उसका शीघ्र निराकरण किया जाए।
मुख्यमंत्री के गृह नगर उज्जैन से सरकार की ओर उम्मीद
उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह नगर है। ऐसे में मदनलाल वर्मा के परिवार को प्रदेश सरकार से विशेष उम्मीद है कि उनकी लंबित मांगों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाएगा।
एक तरफ परिवार को पांच साल बाद शहीद सम्मान पत्र मिला है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक सहायता और आवास से जुड़ी मांगें अब भी सामने हैं। इसी बीच सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के कारण मौजूदा मकान प्रभावित होने की आशंका ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है।
परिजन चाहते हैं कि सरकार एक करोड़ रुपये की घोषित आर्थिक सहायता, आवास और रतनपुर बीट में प्रतिमा से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान करे। साथ ही सड़क चौड़ीकरण में वर्तमान मकान प्रभावित होने की स्थिति में उचित मुआवजा और सुरक्षित वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए।
सम्मान के साथ परिवार तक पहुंचे उसका पूरा हक
मदनलाल वर्मा की कहानी एक ऐसे वनरक्षक की कहानी है, जिसने हथियारबंद शिकारियों के सामने पीछे हटने के बजाय अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी। जंगल और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए उन्होंने अपना जीवन गंवा दिया।
उनकी स्मृति में रतनपुर बीट का नामकरण और परिवार को शहीद सम्मान पत्र दिया जाना उनके बलिदान को सम्मान देने की महत्वपूर्ण पहल है। लेकिन परिवार की अपेक्षा है कि सम्मान के साथ-साथ उनके लिए घोषित सहायता भी पूरी तरह उन तक पहुंचे।
पांच साल बाद शहीद का सम्मान मिलने के बाद अब परिवार सरकार से यही उम्मीद लगाए बैठा है कि आर्थिक सहायता, मकान और अन्य लंबित विषयों का जल्द समाधान होगा।
