ग्वालियर रक्षाबंधन उपसर्ग विधान में आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में 700 श्रीफल समर्पित किए गए। भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया और संतों की पिच्छिका में रक्षासूत्र बांधे गए।
ग्वालियर रक्षाबंधन उपसर्ग विधान: भव्य आयोजन में 700 श्रीफल समर्पित, निर्वाण लड्डू चढ़ाया
ग्वालियर।
ग्वालियर रक्षाबंधन उपसर्ग विधान के अवसर पर आत्म साधना पावन वर्षायोग समिति और सकल दिगम्बर जैन समाज ग्वालियर की ओर से शुक्रवार को उत्साह एवं श्रद्धा के साथ धर्म रक्षा का पर्व रक्षाबंधन मनाया गया। नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में सुबह आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के मंगल सानिध्य में रक्षाबंधन पर उपसर्ग विधान आयोजित किया गया।
उपसर्ग विधान में 700 मुनिराजों को अर्घ्य समर्पित करने के साथ भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया। वहीं आचार्य श्री, मुनिश्री एवं साधुओं की पिच्छिका में रक्षासूत्र बांधे गए।
ग्वालियर रक्षाबंधन उपसर्ग विधान में 700 श्रीफल किए समर्पित
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि उपसर्ग विधान में मुनिश्री अनुमान सागर महाराज एवं पंडित स्वपनिल शास्त्री झांसी ने मंत्रों का उच्चारण किया। जैन समाज के लोगों ने भगवान जिनेंद्र का कलशों से अभिषेक जयकारों के साथ किया।
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का सौभाग्य सतीशचंद्र सिद्धार्थ चांदवाड़ परिवार ने प्राप्त किया। आचार्य श्री के सानिध्य में 700 मुनियों की पूजा का विधान प्रारंभ हुआ। महिलाओं ने विधान के मंडल पर कलश स्थापना की।
विष्णु कुमार मुनि एवं अकंपाचार्य सहित 700 मुनियों की भजनों पर नृत्य के साथ पूजा करते हुए श्रावक-श्राविकाओं ने धर्म, देव, शास्त्र, गुरु और मंदिर की रक्षा के संकल्प के साथ मंडल पर 700 श्रीफल अर्पित किए। श्रीफल अर्पित करने के लिए श्रावकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक पर चढ़ाया निर्वाण लड्डू
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लड्डू समर्पित किया गया।
बूंदी का लड्डू धरणेद्र कुमार, संजय गोधा एवं शक्कर का लड्डू शरद, इंदु, निलेश, सिम्मी बोहरा परिवार सहित भक्तों ने भक्ति भाव के साथ निर्वाण पाठ का वाचन कर समर्पित किया।
इस मौके पर आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल भेंट कर समिति के डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, निर्मल पाटनी, विकास गंगवाल, विनय कासलीवाल, पंकज छाबड़ा और संजय गोधा आदि ने आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्य श्री और मुनिश्री की पिच्छिका में बांधे रक्षासूत्र
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज की पिच्छिका में प्रथम सोने की राखी भारती जैन शेरकोट परिवार ने बांधी। वहीं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज की पिच्छिका में चांदी की राखी राजकुमार जैन मुंबई ने बांधी।
गणिनी आर्यिका श्री शाश्वत श्री माताजी की पिच्छिका में चांदी की राखी धर्मेंद्र-प्रीति जैन ने बांधी। वहीं साधुओं की पिच्छिका में जैन समाज के पुरुषों, महिलाओं और बालिकाओं ने राखियां बांधने के उपरांत तीर्थ, संत और धर्म की रक्षा करने का संकल्प लिया।
रक्षा का संकल्प ही रक्षाबंधन है – आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षाबंधन पर्व प्यार और रक्षा के संकल्प का पर्व है। धर्म और परिवार की रक्षा का संकल्प, देश और समाज की रक्षा का संकल्प लेकर जीना ही रक्षाबंधन का सार्थक उत्सव मनाना है।
आचार्य श्री ने कहा कि इस त्योहार का संबंध सिर्फ गृहस्थ जीवन से ही नहीं, बल्कि मुनियों से भी है। रक्षाबंधन का मुख्य महत्व तभी है, जब हम अपने धर्म, धर्मायतनों, मुनिराजों, आर्यिका माताजी सहित साधुओं, राष्ट्र और पर्यावरण की रक्षा हेतु विचार करें।
धर्मसभा में मौजूद समाजजनों ने आचार्य श्री के संदेश को आत्मसात करते हुए धर्म, संत, तीर्थ और समाज की रक्षा का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान चंपाबाग धर्मशाला में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा।




