महिदपुर रोड के राजेंद्र श्री ज्ञान मंदिर में चातुर्मास हेतु विराजित परम पूज्य साध्वी जी भगवंत डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने धर्मसभा में कर्म सत्ता का महत्व समझाया। उन्होंने भगवान महावीर और भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रत्येक जीव को अपने किए हुए कर्मों का फल भुगतना पड़ता है।
कर्म सत्ता की बुरी मार: इंसान तो क्या भगवान को भी नहीं छोड़ती – डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब
रिपोर्टर – सचिन भंडारी
लोकेशन – महिदपुर रोड
महिदपुर रोड। कर्म सत्ता की बुरी मार से कोई नहीं बच सकता। इंसान तो क्या, भगवान को भी पूर्व में किए गए कर्मों का फल उदय में आने पर भुगतना पड़ता है। यह बात महिदपुर रोड स्थित राजेंद्र श्री ज्ञान मंदिर में चातुर्मास हेतु विराजित परम पूज्य साध्वी जी भगवंत डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा ने शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में उपस्थित समाजजनों को संबोधित करते हुए कही।
कर्म सत्ता किसी को नहीं छोड़ती – डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी जी ने कहा कि कर्म सत्ता किसी को नहीं छोड़ती है, चाहे वह इंसान हो या भगवान। प्रत्येक जीव को पूर्व में किए हुए कर्म जब उदय में आते हैं, तब उनका फल भुगतना ही पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में किए जाने वाले प्रत्येक कार्य को लेकर सजग रहना चाहिए, क्योंकि अच्छे और बुरे कर्मों का प्रभाव जीवन में कभी न कभी सामने अवश्य आता है।
भगवान महावीर ने भी सहे अनेक उपसर्ग और कष्ट
पूज्य साध्वी जी भगवंत डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने भगवान महावीर का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान महावीर तीर्थंकर परमात्मा होते हुए भी अनेक उपसर्गों और कष्टों को सहन किया।
उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि कर्मों के उदय से कोई भी अछूता नहीं रहता। जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, व्यक्ति को धर्म, संयम और सद्मार्ग का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
भगवान श्रीराम को भी सहना पड़ा 14 वर्ष का वनवास
धर्मसभा में पूज्य साध्वी जी ने भगवान श्रीराम के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मोदय में आने पर भगवान श्रीराम ने भी 14 वर्ष का वनवास सहन किया।
उन्होंने समझाया कि जब भगवान के जीवन में भी कठिन परिस्थितियां आईं, तो सामान्य मनुष्य को जीवन में आने वाली परेशानियों से विचलित नहीं होना चाहिए। कर्मों के सिद्धांत को समझते हुए धैर्य और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
गीत के माध्यम से दिया कर्मों का संदेश
पूज्य साध्वी जी ने धर्मसभा में गीत के माध्यम से कर्मों की महत्ता बताते हुए कहा—
“जरा कम सोच कर करिए, इन कर्मों की बुरी मार है,
नहीं बच सका परमात्मा तो औरों की क्या बात है।”
इसका अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि कर्म राजा किसी को भी नहीं छोड़ता, चाहे वह इंसान हो या भगवान। सभी को अपने किए हुए कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है।
कर्म सत्ता की बुरी मार का संदेश देते हुए साध्वी जी ने समाजजनों को जीवन में अच्छे कर्म करने, धर्म के मार्ग पर चलने और अपने आचरण को शुद्ध रखने की प्रेरणा दी।
मुकेश कुमार राज कोचर मावा वाला परिवार ने लिया लाभ
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार की धार्मिक भक्ति प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ मुकेश कुमार राज कोचर मावा वाला परिवार द्वारा लिया गया।
वहीं स्वर्गीय लीलाबाई की स्मृति में बाबूलाल अनिल कुमार कोचर मावा वाला द्वारा प्रवचन एवं सिद्ध तप तपस्वियों की प्रभावना का लाभ लिया गया।
सकल जैन श्री संघ ने प्राप्त किया धर्म लाभ
संपूर्ण धार्मिक आयोजन में सकल जैन श्री संघ के समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और धर्मसभा में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
राजेंद्र श्री ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान धर्म, तप, साधना और प्रवचनों का क्रम जारी है। शुक्रवार की धर्मसभा में कर्मों के सिद्धांत पर दिए गए संदेश ने उपस्थित समाजजनों को जीवन में शुभ कर्म करने और कर्मों के परिणाम के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी।

