आचार्यश्री के सानिध्य में आज होगा उपसर्गहर रक्षाबंधन विधान, 700 नारियल होंगे समर्पित; चढ़ेगा निर्वाण लड्डू
ग्वालियर। परम पूज्य आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के पावन सानिध्य में आत्म साधना पावन वर्षायोग समिति की ओर से शुक्रवार, 28 अगस्त को नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में उपसर्गहर रक्षाबंधन विधान का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक आयोजन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे भगवान जिनेंद्र के अभिषेक और शांतिधारा के साथ होगी। इस अवसर पर भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में निर्वाण लड्डू समर्पित किया जाएगा, वहीं विधान के दौरान जैन समाज के परिवार 700 नारियल अर्पित करेंगे।
रक्षाबंधन पर्व को जैन परंपरा के अनुसार विशेष धार्मिक स्वरूप में मनाने के लिए समाजजनों में उत्साह है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों के शामिल होने की संभावना है।
सुबह 6:30 बजे अभिषेक और शांतिधारा से शुरुआत
चातुर्मास समिति के विकास गंगवाल एवं विनय कासलीवाल ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रम सुबह साढ़े छह बजे प्रारंभ होगा। सबसे पहले भगवान जिनेंद्र का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद शांतिधारा और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना होगी।
आचार्यश्री और मुनिश्री के सानिध्य में श्रद्धालु धार्मिक क्रियाओं में सहभागिता करेंगे। आयोजन को लेकर चंपाबाग धर्मशाला में आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर चढ़ेगा निर्वाण लड्डू
कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक का भी विशेष आयोजन होगा। श्रद्धालु भगवान की पूजा-अर्चना करते हुए निर्वाण लड्डू समर्पित करेंगे।
जैन धर्म में तीर्थंकर भगवान के मोक्ष कल्याणक का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु पूजा, आराधना और धार्मिक अनुष्ठान कर आत्मकल्याण की भावना व्यक्त करते हैं।
विधान में समर्पित किए जाएंगे 700 नारियल
उपसर्गहर रक्षाबंधन विधान की प्रमुख विशेषता 700 नारियल का समर्पण रहेगा। जैन समाज के परिवार मंडप पर आयोजित पूजा-अर्चना में सहभागिता करते हुए नारियल अर्पित करेंगे।
आयोजकों के अनुसार 700 नारियल समर्पित करने की परंपरा जैन धर्म में रक्षाबंधन से जुड़ी उस धार्मिक मान्यता का स्मरण कराती है, जिसमें मुनिराज विष्णु कुमार द्वारा 700 मुनियों पर आए उपसर्ग को दूर करने का वर्णन मिलता है।
जैन परंपरा में रक्षाबंधन का विशेष महत्व
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि जैन परंपरा में रक्षाबंधन पर्व का संबंध साधु-संतों की रक्षा और धर्म की प्रभावना से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा के अवसर पर मुनिराज विष्णु कुमार ने 700 मुनियों पर आए उपसर्ग का निवारण किया था।
इस घटना की स्मृति में लोगों द्वारा हाथों में सूत की डोर बांधने की परंपरा का उल्लेख किया जाता है। जैन समाज इस अवसर को धर्म और साधु-संतों की रक्षा के संकल्प से जोड़कर भी मनाता है।
पिच्छिका में बांधेंगे रक्षा सूत्र
आयोजन के दौरान एक विशेष धार्मिक दृश्य भी देखने को मिलेगा। आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज और मुनिश्री अनुमान सागर महाराज सहित साधुओं की पिच्छिका में समाज के बच्चे, महिलाएं और पुरुष रक्षा सूत्र के रूप में राखियां बांधेंगे।
इस परंपरा के माध्यम से श्रद्धालु धर्म, संस्कृति और साधु-संतों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे। समाजजन इस अवसर को रक्षा दिवस के रूप में मनाते हुए धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करेंगे।
चातुर्मास के चलते धर्ममय बना वातावरण
ग्वालियर में आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में चल रहे वर्षायोग के दौरान लगातार धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रवचन, पूजा-अर्चना, अभिषेक, शांतिधारा और विभिन्न धार्मिक विधानों में समाजजन सहभागिता कर रहे हैं।
चातुर्मास की अवधि जैन धर्म में साधना, संयम, त्याग और आत्मचिंतन के लिए विशेष मानी जाती है। साधु-संत एक स्थान पर विराजमान रहकर समाज को धर्म और आत्मकल्याण का मार्ग बताते हैं।
समाज के महिला, पुरुष और बच्चे होंगे शामिल
आत्म साधना पावन वर्षायोग समिति द्वारा आयोजित उपसर्गहर रक्षाबंधन विधान में सकल जैन समाज की सहभागिता रहेगी। बच्चे, महिलाएं, पुरुष और वरिष्ठ समाजजन धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर आचार्यश्री एवं मुनिश्री से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
आयोजन में भगवान जिनेंद्र के अभिषेक और शांतिधारा से लेकर श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लड्डू समर्पण, 700 नारियल अर्पित करने और साधुओं की पिच्छिका में रक्षा सूत्र बांधने तक विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न होंगी।
आयोजकों ने समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया है। शुक्रवार को चंपाबाग धर्मशाला में होने वाला यह आयोजन जैन समाज की धार्मिक परंपरा, साधु-संतों के प्रति श्रद्धा और रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व को समर्पित रहेगा।
