बदरा पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग उठाई
सवांददाता :अभिषेक द्विवेदी
अनूपपुर। जिले की ग्राम पंचायत बदरा में कथित वित्तीय अनियमितताओं और विकास कार्यों से जुड़े भुगतानों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच शिवभान सिंह और अन्य जिम्मेदारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
9.50 लाख रुपये की रिकवरी के आदेश का दावा
ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और आरोपों के अनुसार, वर्ष 2023 में पुलिया निर्माण सहित कुछ विकास कार्यों में करीब 9.50 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने का दावा किया गया था। आरोप है कि इसके बाद सरपंच शिवभान सिंह और तत्कालीन पंचायत सचिव भीष्मदेव शर्मा से 4.75-4.75 लाख रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए गए।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर रिकवरी के आदेश जारी हुए थे, तो उसके बाद मामले में आगे क्या कार्रवाई हुई और राशि की वास्तविक वसूली कितनी हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
पाइपलाइन और अन्य कार्यों के भुगतान पर सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में पाइपलाइन बिछाने, साफ-सफाई, बोरिंग या ड्रिलिंग तथा अन्य सामग्री की खरीदी के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान किए गए। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ भुगतानों की तुलना वास्तविक स्थल की स्थिति से किए जाने पर सवाल खड़े होते हैं।
आरोपों के मुताबिक, 8.21 लाख रुपये से अधिक के कुछ भुगतान भी जांच के दायरे में आने चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित कार्यों के स्वीकृति आदेश, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड और मौके पर हुए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
विद्युत उपकरणों की खरीदी पर भी उठे सवाल
मामले में विद्युत उपकरणों की खरीदी से जुड़े एक भुगतान को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि करीब 1.60 लाख रुपये के भुगतान में मोटर, सबमर्सिबल सेट और वायर-रोप जैसी सामग्री दर्शाई गई, जबकि संबंधित फर्म के व्यवसाय को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस भुगतान की जांच दस्तावेजों के साथ-साथ संबंधित सामग्री की वास्तविक उपलब्धता और उपयोग के आधार पर की जानी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जनपद पंचायत और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच में पिछले वर्षों के पंचायत भुगतान, टेंडर प्रक्रिया, सामग्री खरीदी, निर्माण कार्यों और रिकवरी आदेशों को शामिल किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। इसी वजह से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
राजनीतिक संरक्षण के भी लगाए आरोप
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों पर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले सामने आए हैं, उन्हें राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि संबंधित राजनीतिक पदाधिकारियों की ओर से मामले में अलग-अलग स्तर पर अनभिज्ञता जताए जाने की बात सामने आई है।
यह आरोप राजनीतिक संगठनों के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जल्द निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर जांच कराने और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की है।
दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन से सामने आएगी सच्चाई
पूरे मामले में अब प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पंचायत के भुगतान रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, बिल-वाउचर, कार्य स्वीकृति, माप पुस्तिका और मौके पर किए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाता है तो आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारी तय कर सरकारी राशि की वसूली के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
