सावन के आखिरी सप्ताह में झमाझम बरसे मेघ, सोयाबीन-मक्का सहित खरीफ फसलों को मिली संजीवनी
करीब एक सप्ताह के अंतराल के बाद हुई अच्छी बारिश से सबसे ज्यादा राहत किसानों को मिली है। बारिश की कमी के कारण सोयाबीन, मक्का और दूसरी खरीफ फसलों की बढ़वार को लेकर किसान चिंतित थे। अब लगातार दो दिनों से हुई बारिश को किसान फसलों के लिए संजीवनी मान रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार भी मौजूदा बारिश सोयाबीन और मक्का सहित खरीफ की फसलों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरे खिले
क्षेत्र में 10 अगस्त को सीजन की पहली मूसलाधार बारिश हुई थी। उस दौरान नाले उफान पर आ गए थे और नगर के कई हिस्सों में पानी भर गया था। इसके बाद कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर थमने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी थी। दिन में गर्मी और उमस का असर भी बढ़ गया था।
बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम होने लगी थी। खरीफ सीजन की प्रमुख फसल सोयाबीन के साथ मक्का और अन्य फसलों को भी पानी की जरूरत महसूस हो रही थी। ऐसे समय में बुधवार और गुरुवार को हुई तेज बारिश किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई।
किसानों का कहना है कि फसलों की वर्तमान अवस्था में पर्याप्त नमी बेहद जरूरी है। रक्षाबंधन से ठीक पहले हुई इस बारिश ने खेतों में नमी बढ़ा दी है, जिससे फसलों की बढ़वार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सोयाबीन और मक्का की फसल को मिला फायदा
पड़ाना और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन और मक्का की खेती करते हैं। मानसून में लंबा अंतराल होने पर इन फसलों की वृद्धि प्रभावित होने का खतरा रहता है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए थे।
बारिश का नया दौर शुरू होने से खेतों में पानी पहुंचा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर मिलने वाली वर्षा फसल की वृद्धि के लिए उपयोगी होती है। हालांकि खेतों में लंबे समय तक अत्यधिक पानी जमा रहना भी फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए पानी की उचित निकासी भी महत्वपूर्ण है।
सड़कों पर बहा पानी, निचले इलाकों में जलभराव
जहां बारिश ने किसानों को राहत दी, वहीं नगर के कुछ हिस्सों में जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। तेज बारिश के दौरान सड़कों पर बड़ी मात्रा में पानी बहने लगा। कुछ स्थानों पर पानी की निकासी पर्याप्त नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
विशेष रूप से वाल्मीकि मोहल्ले में जलभराव की समस्या सामने आई। स्थानीय स्तर पर बताया गया कि नई सड़क के निर्माण के बाद पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी जमा हो गया। इससे क्षेत्र के निवासियों को परेशानी उठानी पड़ी।
पड़ाना-कांकरिया और सारंगपुर मार्ग पर भी भरा पानी
तेज बारिश का असर पड़ाना-कांकरिया और सारंगपुर मार्ग पर भी दिखाई दिया। यहां कई स्थानों पर सड़क पर पानी जमा हो गया। कुछ हिस्सों में राहगीरों को घुटनों तक भरे पानी के बीच से गुजरना पड़ा।
लगातार बारिश के दौरान सड़क पर पानी भरने से दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ी। जलभराव ने एक बार फिर नगर में बेहतर ड्रेनेज और वर्षा जल निकासी व्यवस्था की आवश्यकता की ओर ध्यान खींचा है।
नालों में बढ़ा जलस्तर, लेकिन तेज बहाव सीमित
मानसून की शुरुआत के बाद क्षेत्र के नालों में अब तक एक-दो बार ही तेज पानी का प्रवाह देखने को मिला है। 10 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान कई नाले उफान पर आ गए थे। उस समय नगर के विभिन्न हिस्सों में भी पानी भर गया था।
अब बुधवार और गुरुवार को दोबारा तेज बारिश होने से नालों का जलस्तर बढ़ा है। हालांकि शाम तक अधिकांश नालों में लगातार तेज बहाव जैसी स्थिति नहीं बनी। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में अभी ऐसी व्यापक और लगातार बारिश की जरूरत है, जिससे बड़े जलस्रोतों में पर्याप्त पानी का संग्रह हो सके।
बड़े जलस्रोतों को अभी और बारिश का इंतजार
कृषि विभाग सारंगपुर के एसएडीओ राजेश राजपूत ने बताया कि क्षेत्र के बड़े जलस्रोत अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं भर पाए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अच्छी बारिश जलस्रोतों के साथ खेती के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगी।
उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों से हो रही बारिश सोयाबीन और मक्का सहित खरीफ की फसलों के लिए लाभदायक है। सावन के अंतिम सप्ताह में हुई वर्षा फसलों की बढ़वार में उपयोगी साबित होगी। पर्याप्त वर्षा जारी रहने पर खेतों में नमी बनी रहेगी और किसानों को सिंचाई को लेकर भी राहत मिल सकती है।
खेती के लिए राहत, जलनिकासी बनी चुनौती
सावन के अंतिम सप्ताह की झमाझम बारिश ने क्षेत्र में मौसम को खुशनुमा बनाने के साथ किसानों की उम्मीदें भी बढ़ाई हैं। एक ओर खेतों में पानी पहुंचने से खरीफ फसलों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर नगर के कुछ हिस्सों में जलभराव ने स्थानीय व्यवस्थाओं की चुनौती सामने रखी है।
आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय रहता है तो फसलों के साथ क्षेत्र के तालाबों, नालों और अन्य जलस्रोतों को भी फायदा मिल सकता है। फिलहाल किसानों की निगाहें आगामी बारिश पर टिकी हैं और उन्हें उम्मीद है कि मानसून का यह दौर खरीफ सीजन के लिए लाभकारी साबित होगा।
