उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने प्रदेशभर के प्राध्यापकों से किया ऑनलाइन संवाद, शिक्षा की गुणवत्ता और AI के उपयोग पर मंथन
स्वराज वाणी संवाददाता: गौतम सालवे जिला ब्यूरो चीफ मंडलेश्वर
मंडलेश्वर। मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने, विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा से जोड़ने तथा बदलते समय के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने प्रदेशभर के प्राध्यापकों और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के साथ ऑनलाइन संवाद किया। इस दौरान नई शिक्षा नीति, शिक्षण व्यवस्था, प्राध्यापकों की कार्यक्षमता और उच्च शिक्षा संस्थानों में आवश्यक सुधारों सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
ऑनलाइन संवाद में प्रदेश के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक और प्रशासनिक स्टाफ जुड़े। मंडलेश्वर स्थित आचार्य मंडन मिश्र शासकीय महाविद्यालय में भी कार्यक्रम के सीधे प्रसारण के लिए विशेष व्यवस्था की गई। प्राचार्य डॉ. एम. एस. चौहान के मार्गदर्शन में महाविद्यालय के प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से उच्च शिक्षा मंत्री का संबोधन सुना और संवाद प्रक्रिया में सहभागिता की।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर रहा विशेष जोर
ऑनलाइन बैठक में उच्च शिक्षा की मौजूदा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर प्रमुख रूप से विचार किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने शिक्षण की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और महाविद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बदलते दौर में उच्च शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा और कौशल उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जिससे वे पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार, स्वरोजगार और अन्य व्यावसायिक अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
रोजगार से शिक्षा को जोड़ने पर चर्चा
संवाद के दौरान शिक्षा और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के विषय पर भी चर्चा हुई। वर्तमान समय में उद्योग और रोजगार के क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना गया।
उच्च शिक्षा व्यवस्था में ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देने पर विचार किया गया, जिनसे विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता में वृद्धि हो सके। इसके साथ ही महाविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने और उनके कौशल विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
शिक्षण व्यवस्था में AI के बेहतर उपयोग पर मंथन
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI रहा। तेजी से विकसित हो रही डिजिटल तकनीक ने शिक्षा क्षेत्र में भी नई संभावनाएं पैदा की हैं। ऐसे में शिक्षण प्रक्रिया में AI का जिम्मेदारीपूर्ण और उपयोगी तरीके से इस्तेमाल कैसे किया जाए, इस पर विचार-विमर्श किया गया।
ऑनलाइन माध्यम से आयोजित संवाद में आधुनिक तकनीक के जरिए शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने, विद्यार्थियों को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने और प्राध्यापकों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करने जैसे विषय सामने आए। बदलते शैक्षणिक परिवेश में प्राध्यापकों की भूमिका और तकनीकी दक्षता को भी महत्वपूर्ण माना गया।
नई शिक्षा नीति की विशेषताओं और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा
उच्च शिक्षा मंत्री के संवाद में नई शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। नीति की विशेषताओं के साथ इसके क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और विसंगतियों को समझने का प्रयास किया गया।
महाविद्यालय स्तर पर नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्राध्यापकों और प्रशासनिक स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों से संवाद और सुझावों के माध्यम से व्यवस्थाओं में सुधार की संभावनाओं पर विचार किया गया।
मंडलेश्वर कॉलेज में एलईडी स्क्रीन से जुड़ा पूरा स्टाफ
आचार्य मंडन मिश्र शासकीय महाविद्यालय मंडलेश्वर में ऑनलाइन बैठक को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। प्राचार्य डॉ. एम. एस. चौहान के मार्गदर्शन में महाविद्यालय परिसर में एलईडी स्क्रीन लगाकर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया।
महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं प्रशासनिक कर्मचारियों ने एक साथ बैठकर उच्च शिक्षा मंत्री का संबोधन सुना। कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सामने आए विचारों, सुझावों और निर्देशों को स्टाफ ने गंभीरता से समझा।
करीब 65 सवाल और सुझाव किए गए साझा
संवाद कार्यक्रम की खास बात यह रही कि यह केवल संबोधन तक सीमित नहीं रहा। शिक्षा की गुणवत्ता और प्राध्यापकों तथा कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने से संबंधित करीब 65 सवाल और सुझाव ऑनलाइन माध्यम से साझा किए गए। महाविद्यालय स्टाफ की ओर से इन पर त्वरित जवाब भी भेजे गए।
इस प्रक्रिया के माध्यम से उच्च शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत लोगों को अपनी बात रखने और व्यावहारिक स्तर पर सामने आने वाले विषयों को साझा करने का अवसर मिला। इससे संवाद को अधिक सहभागितापूर्ण बनाने में मदद मिली।
बड़ी संख्या में प्राध्यापक और कर्मचारी रहे उपस्थित
बैठक में प्राचार्य डॉ. एम. एस. चौहान, प्रो. राजगुरु पाटीदार, डॉ. मुकेश सांठे, डॉ. ओ. एस. परिहार, डॉ. एस. एस. ठाकुर, डॉ. संतोष बर्डे, डॉ. प्रवीर पाण्डे, प्रो. चेतना सिद्धड, डॉ. विजय सिंह मंडलोई, प्रो. जी. एस. परमार, डॉ. डी. के. सिंह और ग्रंथपाल दीपक यादव उपस्थित रहे।
इसके अलावा प्रो. विश्वजीत मंडलोई, डॉ. आरती लोमारे, प्रो. निहारिका कुशवाह, प्रो. अजय देवड़ा एवं प्रो. अंतर सिंह मुजाल्दा सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ कार्यक्रम में शामिल हुआ। बैठक के माध्यम से उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, नई तकनीक, रोजगारोन्मुख शिक्षा और नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर व्यापक संवाद का अवसर मिला।
