नेपाल में बाढ़ से तबाही के बाद सक्रिय हुई मध्य प्रदेश सरकार, फंसे प्रदेशवासियों के लिए दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित
नेपाल में मौजूद मध्य प्रदेश के नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन, WhatsApp नंबर और ईमेल जारी; राज्य सरकार ने हरसंभव मदद का दिया भरोसा
भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने वहां मौजूद या फंसे प्रदेश के नागरिकों की सहायता के लिए कदम उठाए हैं। संकट की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने नई दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इसके माध्यम से नेपाल में फंसे मध्य प्रदेश के लोगों और भारत में मौजूद उनके परिजनों को आवश्यक जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद रसुवा सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें सामने आई हैं। सड़क, पुल, मकान और वाहनों को नुकसान पहुंचने के कारण कई इलाकों में आवागमन भी प्रभावित हुआ है। आपदा के बीच वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वापसी को लेकर उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
इसी को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने संपर्क के लिए हेल्पलाइन नंबर, WhatsApp नंबर और ईमेल आईडी जारी की है।
मध्य प्रदेश सरकार ने दिल्ली में बनाया कंट्रोल रूम
नेपाल में संकट की स्थिति के बीच मध्य प्रदेश के नागरिकों की मदद के लिए नई दिल्ली में विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसका उद्देश्य नेपाल में मौजूद प्रदेशवासियों के संबंध में जानकारी जुटाना और जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना है।
नेपाल में फंसे मध्य प्रदेश के नागरिक स्वयं या उनके परिवार के सदस्य कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
ये हैं हेल्पलाइन और WhatsApp नंबर
नेपाल में फंसे मध्य प्रदेश के लोगों और उनके परिजनों के लिए राज्य सरकार ने संपर्क के कई माध्यम उपलब्ध कराए हैं।
हेल्पलाइन नंबर: 011-26772005
WhatsApp नंबर: 9818963273
ईमेल: [email protected]
नेपाल में मौजूद प्रदेश के नागरिक या उनके परिजन सहायता, लोकेशन संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण के लिए इन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। संकट में फंसे व्यक्ति के बारे में संपर्क करते समय उसका नाम, मोबाइल नंबर, नेपाल में अंतिम ज्ञात स्थान और अन्य उपलब्ध जानकारी साझा करना उपयोगी हो सकता है।
भोटेकोशी नदी की बाढ़ से भारी नुकसान
नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने कई इलाकों में गंभीर नुकसान पहुंचाया है। तेज बहाव और मलबे के कारण सड़क संपर्क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर मकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और क्षतिग्रस्त सड़क नेटवर्क के कारण राहत कार्यों में भी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
आपदा के बाद सबसे बड़ी चिंता प्रभावित और लापता लोगों का पता लगाने की है। नेपाल में पर्यटन, धार्मिक यात्रा और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी मौजूद रहते हैं।
भारतीय यात्रियों को लेकर बढ़ी परिजनों की चिंता
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद भारत के अलग-अलग राज्यों से वहां गए यात्रियों के परिवारों की चिंता बढ़ गई है। नेपाल धार्मिक और पर्यटन दोनों ही दृष्टि से भारतीय यात्रियों के लिए प्रमुख गंतव्य है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर की यात्रा से जुड़े यात्री भी नेपाल के विभिन्न मार्गों से गुजरते हैं।
ऐसे में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क टूटने या मोबाइल नेटवर्क प्रभावित होने की स्थिति में परिजनों को यात्रियों से संपर्क करने में परेशानी हो सकती है। इसी वजह से राज्य सरकारों और भारतीय अधिकारियों द्वारा संपर्क एवं सहायता व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
भारतीय दूतावास भी सहायता में जुटा
नेपाल में संकट के बीच काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास भी भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए सक्रिय है। प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर समन्वय किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दिल्ली में स्थापित कंट्रोल रूम भी इसी व्यापक सहायता व्यवस्था का हिस्सा है। इससे प्रदेश के नागरिकों से संबंधित मामलों को अलग से संकलित कर आगे आवश्यक समन्वय करने में मदद मिलेगी।
कई राज्यों ने शुरू की सहायता व्यवस्था
नेपाल में बाढ़ और आपदा की स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश के अलावा देश के कई अन्य राज्यों ने भी अपने नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम जैसी व्यवस्थाएं शुरू की हैं।
तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों की सरकारें नेपाल में मौजूद अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित वापसी में सहायता के प्रयास कर रही हैं।
इस तरह केंद्र, राज्य सरकारों और भारतीय दूतावास के बीच समन्वय प्रभावित नागरिकों तक मदद पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अफवाहों से बचें, आधिकारिक जानकारी पर रखें भरोसा
बड़ी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सोशल मीडिया पर मृतकों और लापता लोगों की संख्या से जुड़े अलग-अलग दावे तेजी से प्रसारित होते हैं। ऐसे में किसी भी अपुष्ट आंकड़े या संदेश को आगे बढ़ाने से बचना जरूरी है। मौतों, लापता लोगों और भारतीय नागरिकों की स्थिति से संबंधित आंकड़े राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं।
लोगों को सलाह दी जाती है कि वे नेपाल सरकार, भारतीय दूतावास, केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
परिजन उपलब्ध कराएं पूरी जानकारी
यदि मध्य प्रदेश का कोई व्यक्ति नेपाल में फंसा हुआ है और उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है, तो उसके परिजन कंट्रोल रूम को यथासंभव पूरी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। इसमें यात्री का नाम, उम्र, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट संबंधी उपलब्ध जानकारी, यात्रा समूह का विवरण, होटल या ठहरने का स्थान और आखिरी बार संपर्क होने का समय शामिल हो सकता है।
सटीक जानकारी मिलने से संबंधित एजेंसियों के लिए व्यक्ति की तलाश और स्थिति की पुष्टि करना आसान हो सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार की राहत व्यवस्था पर नजर
नेपाल में हालात सामान्य होने तक सहायता और समन्वय की जरूरत बनी रह सकती है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित कंट्रोल रूम प्रदेश के प्रभावित नागरिकों और उनके परिवारों के लिए संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम होगा।
फिलहाल सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि नेपाल में फंसे मध्य प्रदेश के किसी व्यक्ति के संबंध में सहायता की जरूरत होने पर जारी हेल्पलाइन और WhatsApp नंबर के माध्यम से संपर्क करें। आपदा की स्थिति को देखते हुए यात्रियों और उनके परिजनों को भी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
