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BRICS Summit 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयार भारत, नई दिल्ली में जुटेंगे वैश्विक नेता; विदेश मंत्रालय ने बताई थीम

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Published On: 27 August 2026
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BRICS Summit 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयार भारत, नई दिल्ली में जुटेंगे वैश्विक नेता; विदेश मंत्रालय ने बताई थीम

12-13 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित होगा 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, भारत की अध्यक्षता में लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर रहेगा जोर

नई दिल्ली। भारत सितंबर 2026 में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) की मेजबानी के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत अपनी अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में इस महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के साथ साझेदार देशों और आउटरीच के तहत आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

विदेश मंत्रालय ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम की भी जानकारी दी है। इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का फोकस “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” पर रखा गया है। यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को मजबूत करते हुए भविष्य के निर्माण पर जोर दिया जाएगा।

मंत्रालय के अनुसार, यह थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें वैश्विक सहयोग को जन-केंद्रित बनाने और ‘मानवता सर्वोपरि’ की भावना को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।

नई दिल्ली में होगा 18वां BRICS Summit

ब्रिक्स दुनिया के महत्वपूर्ण बहुपक्षीय समूहों में शामिल है। भारत के लिए 2026 का सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी मेजबानी नई दिल्ली में की जा रही है। भारत मंडपम में आयोजित होने वाले दो दिवसीय सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, तकनीक, व्यापार, पर्यावरण और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

ब्रिक्स के विस्तार के बाद संगठन की वैश्विक भूमिका और प्रभाव भी बढ़ा है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में होने वाले सम्मेलन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें रहेंगी।

सम्मेलन में सदस्य देशों के अलावा साझेदार देशों और आउटरीच कार्यक्रम के तहत आमंत्रित नेताओं की भागीदारी इसे और व्यापक मंच प्रदान करेगी।

क्या है BRICS Summit 2026 की थीम?

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। इसमें चार प्रमुख क्षेत्रों—Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability—को केंद्र में रखा गया है।

‘Resilience’ का उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में देशों और अर्थव्यवस्थाओं की क्षमता को मजबूत करना है। दुनिया पिछले कुछ वर्षों में महामारी, युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, सप्लाई चेन में व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर चुकी है। ऐसे में मजबूत और लचीली व्यवस्था तैयार करना महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

‘Innovation’ के तहत तकनीकी विकास और नई संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नई तकनीकों और विकास के आधुनिक मॉडल जैसे विषय इस व्यापक एजेंडे से जुड़े हो सकते हैं।

सहयोग को मजबूत करने पर भारत का जोर

थीम का तीसरा महत्वपूर्ण आधार ‘Cooperation’ यानी सहयोग है। ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक, तकनीकी और सामाजिक सहयोग को बढ़ाने पर लंबे समय से जोर दिया जाता रहा है।

भारत की अध्यक्षता में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभावी तरीके से सामने रखने पर भी ध्यान रहने की उम्मीद है। भारत पहले भी वैश्विक मंचों पर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को मजबूत करने की वकालत करता रहा है।

सहयोग का दायरा केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी सदस्य देशों के बीच साझेदारी की संभावनाएं मौजूद हैं।

Sustainability भी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा

भारत की अध्यक्षता की थीम का चौथा प्रमुख आधार ‘Sustainability’ यानी स्थिरता है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के बीच सतत विकास पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।

विकासशील देशों के सामने चुनौती यह है कि आर्थिक विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ा जाए। ब्रिक्स जैसे मंच इस दिशा में वित्तीय, तकनीकी और नीतिगत सहयोग बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं।

स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास, जलवायु वित्त और सतत बुनियादी ढांचे जैसे विषय भी इस व्यापक चर्चा से जुड़े हो सकते हैं।

‘मानवता सर्वोपरि’ के दृष्टिकोण को दर्शाती है थीम

विदेश मंत्रालय के अनुसार इस बार चुनी गई थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। इसका आधार ‘मानवता सर्वोपरि’ की भावना को बताया गया है।

इस दृष्टिकोण में आर्थिक और तकनीकी प्रगति के साथ यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि विकास का लाभ आम लोगों तक पहुंचे। वैश्विक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।

यही कारण है कि भारत अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स को केवल आर्थिक सहयोग के मंच के रूप में नहीं, बल्कि लोगों की जरूरतों और विकास संबंधी चुनौतियों पर चर्चा के व्यापक मंच के तौर पर आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच

ब्रिक्स की शुरुआत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से हुई थी। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा और नए सदस्य एवं साझेदार देश इससे जुड़े। संगठन का विस्तार इसे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

भारत के लिए ब्रिक्स ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को सामने रखने का भी महत्वपूर्ण मंच है। विकासशील देशों के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, तकनीकी सहयोग, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं।

भारत की कूटनीति के लिए भी अहम सम्मेलन

नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit 2026 भारत की विदेश नीति और कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा। एक ही मंच पर विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी से द्विपक्षीय बैठकों और महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चाओं के अवसर भी बन सकते हैं।

12 और 13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन के दौरान दुनिया की निगाहें नई दिल्ली पर रहेंगी। भारत की कोशिश ब्रिक्स की अध्यक्षता के जरिए ऐसा एजेंडा आगे बढ़ाने की होगी, जिसमें आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार के साथ सहयोग, स्थिरता और आम लोगों के हितों को समान महत्व दिया जाए।

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