Raksha Bandhan 2026: चार साल बाद बना खास संयोग, भद्रा और ग्रहण का नहीं रहेगा साया; दिनभर बांध सकेंगी राखी
28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन, सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी भद्रा; पूर्णिमा की उदया तिथि के कारण पूरे दिन रक्षा-सूत्र बांधने के लिए अनुकूल समय
धर्म डेस्क। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस वर्ष विशेष संयोग के बीच मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा पर आने वाले इस पर्व को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा का व्यवधान नहीं रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। ऐसे में सुबह से लेकर दिनभर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांध सकेंगी।
इस बार रक्षाबंधन पर ग्रहण का भी कोई प्रभाव नहीं बताया गया है। भद्रा और ग्रहण जैसी बाधाएं नहीं रहने के कारण श्रद्धालुओं के लिए पर्व मनाना सुविधाजनक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस तरह का संयोग करीब चार वर्ष बाद बन रहा है। हालांकि शुभ कार्यों और मुहूर्त को लेकर अलग-अलग पंचांगों तथा स्थान के अनुसार समय में मामूली अंतर हो सकता है।
27 अगस्त से शुरू होगी पूर्णिमा तिथि
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9 बजकर 8 मिनट से प्रारंभ होगी। पूर्णिमा तिथि अगले दिन यानी 28 अगस्त को सुबह करीब 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी।
27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव रहने के कारण इस दिन रक्षा-सूत्र बांधने से बचने की सलाह दी गई है। वहीं 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि को विशेष महत्व दिए जाने के कारण 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाना उपयुक्त माना जा रहा है।
इस तरह इस वर्ष तारीख को लेकर लोगों में ज्यादा असमंजस की स्थिति नहीं रहेगी। 28 अगस्त की सुबह से ही घरों और मंदिरों में रक्षाबंधन से जुड़े धार्मिक आयोजन किए जा सकेंगे।
सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी भद्रा
रक्षाबंधन के मुहूर्त में भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में रक्षा-सूत्र बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर वर्ष रक्षाबंधन से पहले लोग भद्रा शुरू और समाप्त होने के समय की जानकारी लेते हैं।
इस वर्ष राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही भद्रा समाप्त हो जाने की बात कही गई है। ऐसे में सुबह रक्षाबंधन की पूजा करने और राखी बांधने में भद्रा बाधा नहीं बनेगी।
दिनभर राखी बांधने का मिलेगा अवसर
रक्षाबंधन के दिन अक्सर शुभ मुहूर्त कुछ घंटों का होने के कारण लोगों को समय का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। नौकरी, व्यवसाय या दूसरे शहरों से आने वाले भाई-बहनों के लिए सीमित मुहूर्त परेशानी का कारण भी बन जाता है। लेकिन इस बार परिस्थितियां अपेक्षाकृत अनुकूल रहने वाली हैं।
भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाने के कारण सुबह से रक्षा-सूत्र बांधने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। हालांकि पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक बताई गई है। इसके बाद भी अलग-अलग परंपराओं और पंचांग मत के अनुसार रक्षाबंधन के आयोजन किए जा सकते हैं। परिवार अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान से मुहूर्त की पुष्टि भी कर सकते हैं।
शतभिषा नक्षत्र और सुकर्मा योग का संयोग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार रक्षाबंधन के दिन चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही सुबह करीब 7 बजकर 26 मिनट के बाद सुकर्मा योग बनने की बात कही गई है। बालव करण का संयोग भी इस दिन के धार्मिक महत्व को बढ़ाएगा।
ज्योतिष शास्त्र में सुकर्मा योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक और मांगलिक कार्यों को सकारात्मक फल देने वाला बताया जाता है। रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और धार्मिक पर्व पर इस योग का बनना विशेष माना जा रहा है।
सिर्फ राखी ही नहीं, श्रावणी पूर्णिमा का व्यापक धार्मिक महत्व
श्रावणी पूर्णिमा का महत्व केवल रक्षाबंधन तक सीमित नहीं है। सनातन परंपरा में इस तिथि पर कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में श्रावणी उपाकर्म, यज्ञोपवीत संस्कार और वेद अध्ययन से संबंधित धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
ब्राह्मण समाज में श्रावणी उपाकर्म की परंपरा का विशेष महत्व है। कई स्थानों पर इस अवसर पर यज्ञोपवीत परिवर्तन, हवन, पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में श्रावणी पूर्णिमा स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग स्वरूप में मनाई जाती है।
रक्षाबंधन पर ऐसे करें पूजा
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान के बाद घर के देवी-देवताओं की पूजा करने की परंपरा है। इसके बाद बहनें पूजा की थाली में राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई रखती हैं। भाई को तिलक लगाकर अक्षत लगाए जाते हैं और फिर उसकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा जाता है।
बहन भाई के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है। इसके बाद मिठाई खिलाने और उपहार देने की परंपरा निभाई जाती है।
बाजारों में भी बढ़ी रक्षाबंधन की रौनक
रक्षाबंधन नजदीक आने के साथ ही बाजारों में राखियों की खरीदारी तेज हो गई है। पारंपरिक रेशमी धागों से लेकर डिजाइनर राखी, बच्चों के लिए कार्टून राखी और चांदी की राखियों तक कई विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। मिठाई, ड्राई फ्रूट, गिफ्ट पैक और कपड़ों की दुकानों पर भी ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है।
दूसरे शहरों या विदेशों में रहने वाले भाइयों तक राखी पहुंचाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कूरियर सेवाओं का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
चार साल बाद खास संयोग ने बढ़ाया पर्व का महत्व
इस वर्ष रक्षाबंधन को लेकर सबसे बड़ी विशेषता भद्रा का मुख्य पर्व के समय बाधक नहीं होना और ग्रहण का प्रभाव नहीं रहना बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार करीब चार साल बाद ऐसा अनुकूल संयोग बन रहा है। इससे परिवारों को बिना लंबे इंतजार के सुबह से रक्षाबंधन का पर्व मनाने का अवसर मिलेगा।
नोट: मुहूर्त और ज्योतिषीय गणनाएं पंचांग, शहर और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती हैं। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
