श्यामप्रेमी संदीप प्रभात शर्मा को नम आंखों से अंतिम विदाई, 44 वर्ष की उम्र में निधन से नागदा में शोक
सामाजिक सरोकारों और मिलनसार व्यक्तित्व को नागरिकों ने किया याद
Nagda । परशुराम सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्यामप्रेमी संदीप प्रभात शर्मा के आकस्मिक निधन से नागदा नगर में शोक की लहर है। 23 अगस्त को हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। महज 44 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर से परिवार, मित्रों, सामाजिक संगठनों और नगरवासियों में गहरा दुःख व्याप्त हो गया।
सोमवार शाम करीब 4:30 बजे गवर्नमेंट कॉलोनी स्थित उनके निज निवास से अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, मित्र और स्नेहीजन शामिल हुए। चंबल नदी के तट स्थित मुक्तिधाम पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। नम आंखों के साथ परिजनों और उपस्थित लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
सरल और मिलनसार स्वभाव के लिए थे प्रसिद्ध
संदीप प्रभात शर्मा नगर में अपने सरल, सहज और मिलनसार व्यवहार के लिए पहचाने जाते थे। सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। वे विभिन्न सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर सहभागिता करते थे और लोगों के बीच सहजता से घुल-मिल जाते थे।
पिछले तीन वर्षों से बिरलाग्राम में उनके नेतृत्व में रंगारंग गैर का आयोजन भी किया जा रहा था। इस आयोजन से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए थे। सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता ने उन्हें नगर में अलग पहचान दिलाई थी।
दुर्घटना के बाद भी नहीं छोड़ी सामाजिक सक्रियता
संदीप शर्मा का जीवन संघर्ष और हौसले की मिसाल रहा। कुछ वर्ष पूर्व एक दुर्घटना में उन्होंने अपना पैर गंवा दिया था, लेकिन इस कठिन परिस्थिति ने उनके सामाजिक उत्साह को कम नहीं किया। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहना जारी रखा।
नगर की संस्था स्नेहा द्वारा उनके सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें सम्मानित भी किया गया था। उनके परिचितों के अनुसार वे लोगों की समस्याओं को समझने और नगरहित से जुड़े मुद्दों को सामने रखने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।
सोशल मीडिया के जरिए उठाते रहे नगरहित के मुद्दे
संदीप शर्मा सोशल मीडिया पर संचालित अपने पेज के माध्यम से भी शहर की समस्याओं को आवाज देते रहे। वे नगरहित से जुड़े विभिन्न विषयों को उठाते और लोगों का ध्यान स्थानीय समस्याओं की ओर आकर्षित करते थे।
उनकी इस सक्रियता के कारण वे सामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच भी परिचित थे। उनके निधन के बाद शहरवासियों ने उनके सामाजिक योगदान और सक्रिय भूमिका को याद किया।
निधन के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर चर्चा तेज
संदीप शर्मा के आकस्मिक निधन के बाद नागदा में बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए नगर में ऐसी चिकित्सा व्यवस्था होना जरूरी है, जहां तत्काल विशेषज्ञ उपचार, आईसीयू और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
शोकसभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि गंभीर मरीज को तत्काल उपचार के लिए उज्जैन या इंदौर रेफर करना पड़े तो यात्रा में लगने वाला समय भी चुनौती बन सकता है।
ऐसे में नागरिकों ने नागदा में मजबूत और भरोसेमंद आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था विकसित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विभिन्न संगठनों ने दी श्रद्धांजलि
संदीप शर्मा के निधन पर नगर के विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया। शोकसभा में हनुमान प्रसाद शर्मा, रवि किशन पारिख, पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत, चेतन यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके अलावा ब्राह्मण समाज, श्याम परिवार, नागदा व्यापारी संघ, हिंद सांस्कृतिक मंच, अनंत श्री पौधारोपण समिति सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी संदीप शर्मा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसमूह
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने यह दिखाया कि संदीप शर्मा ने अपने सहज व्यवहार और सामाजिक सक्रियता से नगरवासियों के बीच गहरा जुड़ाव बनाया था। परिवारजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
उनके निधन को नगर के सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया। लोगों ने कहा कि संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में भी सामाजिक कार्यों से जुड़े रहना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान थी।
नगर ने खोया एक सक्रिय सामाजिक व्यक्तित्व
संदीप प्रभात शर्मा का जीवन सामाजिक सरोकारों, संघर्षशीलता और मिलनसार व्यवहार से जुड़ा रहा। वे धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय रहते थे और नगर की समस्याओं को अपनी आवाज के माध्यम से सामने लाते थे।
उनके आकस्मिक निधन से नागदा ने एक ऐसे सामाजिक व्यक्तित्व को खो दिया, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। उनके सहयोगियों और परिचितों ने कहा कि उनका सहज व्यवहार, लोगों से आत्मीय जुड़ाव और सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पण सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।
नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट
