MP Police Training में बड़ा बदलाव: पांच साल तक नहीं बदलेगा पाठ्यक्रम, पहली बार तैयार हुई प्रशिक्षण नीति
पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों-कर्मचारियों की ट्रेनिंग के लिए तैयार किया नया खाका, छह महीने से शासन की मंजूरी का इंतजार; प्रशिक्षकों को भी मिलेगी स्थिरता
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस की प्रशिक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने विभिन्न स्तर के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और एकरूप बनाने के उद्देश्य से पहली बार विस्तृत प्रशिक्षण नीति तैयार की है। प्रस्तावित नीति में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि एक बार निर्धारित होने के बाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में पांच वर्षों तक बदलाव नहीं किया जाएगा।
हालांकि नई प्रशिक्षण नीति को लागू होने में अभी समय लग सकता है। यह प्रस्ताव करीब छह महीने से शासन की स्वीकृति के लिए लंबित बताया जा रहा है और फिलहाल परीक्षण की प्रक्रिया में है। मंजूरी मिलने के बाद पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था में प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
नई नीति का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और जवानों की ट्रेनिंग में निरंतरता लाने के साथ प्रशिक्षकों को बेहतर तैयारी का अवसर देना है। इसके अलावा प्रशिक्षण संस्थानों में पदस्थ अधिकारियों और प्रशिक्षकों को भी एक निश्चित अवधि तक बनाए रखने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
पहली बार तैयार की गई पुलिस प्रशिक्षण नीति
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पहली बार अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग के लिए एक समग्र नीति तैयार की है। अभी तक अलग-अलग स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं, लेकिन नई व्यवस्था में प्रशिक्षण से संबंधित नियमों, पाठ्यक्रम और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक स्पष्ट रूप देने का प्रयास किया गया है।
पुलिस सेवा में प्रशिक्षण का विशेष महत्व है। अपराधों के बदलते स्वरूप, नई तकनीक, साइबर अपराध, कानूनों में बदलाव, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक पुलिसिंग की चुनौतियों के बीच अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार प्रशिक्षित करना जरूरी होता है।
नई नीति इसी प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक संस्थागत और योजनाबद्ध बनाने की दिशा में तैयार की गई है।
पांच साल तक नहीं बदलेगा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम
प्रस्तावित नीति का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान प्रशिक्षण पाठ्यक्रम से जुड़ा है। इसके अनुसार एक बार पाठ्यक्रम निर्धारित होने के बाद उसमें पांच वर्षों तक सामान्य रूप से बदलाव नहीं किया जाएगा।
इसके पीछे तर्क यह है कि प्रशिक्षण सामग्री में बार-बार बदलाव होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है। अलग-अलग समय पर अधिकारी अपनी प्राथमिकताओं और रुचि के अनुसार प्रशिक्षण सामग्री में नए विषय शामिल कर देते हैं। इससे पाठ्यक्रम में निरंतरता नहीं रह पाती और प्रशिक्षकों को भी किसी निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता।
पांच वर्ष तक पाठ्यक्रम को स्थिर रखने से प्रशिक्षण का एक निश्चित ढांचा तैयार किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग बैचों को मिलने वाली ट्रेनिंग में भी एकरूपता आने की उम्मीद है।
प्रशिक्षकों को तैयारी के लिए मिलेगा पर्याप्त समय
पाठ्यक्रम में लगातार बदलाव का सबसे ज्यादा प्रभाव प्रशिक्षकों की तैयारी पर पड़ता है। यदि प्रशिक्षण सामग्री बार-बार बदलती है तो प्रशिक्षकों को नए विषयों और मॉड्यूल के अनुसार खुद को तैयार करना पड़ता है।
नई नीति लागू होने के बाद प्रशिक्षकों को पांच वर्षों के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन सामग्री, केस स्टडी, व्यावहारिक प्रशिक्षण और अन्य मॉड्यूल तैयार करने का अवसर मिलेगा।
इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होने की संभावना है। प्रशिक्षक किसी विषय को केवल औपचारिक रूप से पढ़ाने के बजाय उस पर विशेषज्ञता विकसित कर सकेंगे और पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को व्यावहारिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण दे सकेंगे।
दो साल तक नहीं हटाए जाएंगे प्रशिक्षण अधिकारी और प्रशिक्षक
प्रस्तावित नीति में प्रशिक्षण संस्थानों में पदस्थ अधिकारियों और प्रशिक्षकों के कार्यकाल को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। इसके तहत प्रशिक्षण से जुड़े अधिकारियों और प्रशिक्षकों को सामान्य परिस्थितियों में कम से कम दो वर्ष तक पद से नहीं हटाने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
इसका उद्देश्य प्रशिक्षण व्यवस्था में निरंतरता बनाए रखना है। बार-बार तबादला होने से प्रशिक्षक किसी विशेष विषय या बैच के साथ लंबे समय तक काम नहीं कर पाते। इसका सीधा प्रभाव प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
दो वर्ष की न्यूनतम अवधि मिलने से अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और लंबी अवधि की कार्ययोजना के अनुसार काम कर पाएंगे।
बार-बार बदलाव से प्रभावित होती थी ट्रेनिंग
पुलिस प्रशिक्षण में पाठ्यक्रम की निरंतरता को महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसी बैच की ट्रेनिंग के दौरान ही विषयों या प्राथमिकताओं में लगातार बदलाव होते रहें तो प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
प्रस्तावित नीति के माध्यम से इसी समस्या को दूर करने की कोशिश की जा रही है। पाठ्यक्रम पहले से निर्धारित होने पर प्रशिक्षण संस्थान उसी के अनुरूप अध्ययन सामग्री, विशेषज्ञ प्रशिक्षक और प्रैक्टिकल सेशन की योजना बना सकेंगे।
साथ ही अलग-अलग प्रशिक्षण केंद्रों में एक समान मानक लागू करने में भी मदद मिल सकती है।
आधुनिक पुलिसिंग की चुनौतियों पर रहेगा फोकस
पुलिसिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक अपराधों के साथ साइबर क्राइम, डिजिटल फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया से जुड़े अपराध और तकनीक आधारित जांच पुलिस के सामने नई चुनौतियां लेकर आए हैं।
इसके अलावा नए आपराधिक कानून, डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक जांच, महिला और बाल सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण तथा आपदा प्रबंधन जैसे विषय भी पुलिस प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।
ऐसे में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को निश्चित अवधि के लिए स्थिर रखने के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि आवश्यक कानूनी या तकनीकी बदलावों को समय पर प्रशिक्षण व्यवस्था में शामिल करने की गुंजाइश बनी रहे।
छह महीने से शासन की मंजूरी का इंतजार
पुलिस मुख्यालय द्वारा तैयार की गई यह नीति करीब छह महीने से शासन स्तर पर स्वीकृति की प्रतीक्षा में बताई जा रही है। फिलहाल प्रस्ताव परीक्षण की प्रक्रिया में है।
शासन की मंजूरी मिलने के बाद ही इसके प्रावधान औपचारिक रूप से लागू किए जा सकेंगे। स्वीकृति के दौरान नीति के प्रशासनिक और व्यावहारिक पहलुओं पर भी विचार किया जा सकता है।
नीति लागू होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पांच वर्ष के निर्धारित पाठ्यक्रम के बीच कानून में बड़े बदलाव या नई सुरक्षा चुनौतियां सामने आने पर संशोधन की प्रक्रिया क्या होगी।
पुलिस अधिकारियों और जवानों को मिलेगा फायदा
नई नीति का सीधा असर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ेगा। एक समान पाठ्यक्रम होने से सभी बैचों को निर्धारित मानकों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।
इसके साथ प्रशिक्षकों को पर्याप्त समय मिलने से विषयों को अधिक विस्तार और व्यावहारिक तरीके से समझाने की संभावना बढ़ेगी। पुलिस अधिकारियों और जवानों को फील्ड में आने वाली परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने के लिए केस स्टडी और व्यावहारिक अभ्यास को भी प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सकता है।
प्रशिक्षण व्यवस्था में आएगी स्थिरता
मध्य प्रदेश पुलिस की प्रस्तावित प्रशिक्षण नीति का मूल उद्देश्य पूरी व्यवस्था में स्थिरता और गुणवत्ता लाना है। पांच वर्षों तक पाठ्यक्रम में अनावश्यक बदलाव रोकने और प्रशिक्षण अधिकारियों को कम से कम दो वर्ष तक बनाए रखने जैसे प्रावधान इसी दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
यदि शासन से नीति को स्वीकृति मिलती है तो मध्य प्रदेश पुलिस की प्रशिक्षण प्रणाली में यह एक बड़ा संस्थागत बदलाव साबित हो सकता है। इससे प्रशिक्षण की योजना बनाने, प्रशिक्षकों को तैयार करने और पुलिस बल को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप दक्ष बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल इस नीति पर शासन की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। स्वीकृति के बाद इसके विस्तृत नियम और क्रियान्वयन की प्रक्रिया सामने आएगी।
