PM मोदी के मीडिया संवाद पर किरेन रिजिजू का जवाब: बोले- जितने इंटरव्यू उन्होंने दिए, उतने किसी प्रधानमंत्री ने नहीं दिए
प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने किया बचाव, कहा- प्रधानमंत्री जनता से सीधे संवाद को देते हैं प्राथमिकता
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मीडिया से संवाद और नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने को लेकर लंबे समय से उठते रहे सवालों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उनका बचाव किया है। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान मीडिया को बड़ी संख्या में इंटरव्यू दिए हैं और संभवतः किसी अन्य प्रधानमंत्री ने इतने इंटरव्यू नहीं दिए होंगे। उन्होंने इस धारणा पर भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी मीडिया से बातचीत नहीं करते।
रिजिजू के मुताबिक, केवल औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को ही मीडिया से संवाद का पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। प्रधानमंत्री अलग-अलग माध्यमों से जनता और मीडिया तक अपनी बात पहुंचाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी लोगों से सीधे जुड़ने को प्राथमिकता देते हैं और विभिन्न अवसरों पर पत्रकारों तथा मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू भी देते रहे हैं।
‘किसी प्रधानमंत्री ने इतने इंटरव्यू नहीं दिए होंगे’
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री मोदी के मीडिया संवाद को लेकर कहा कि उनके द्वारा दिए गए इंटरव्यू की संख्या काफी अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसके बावजूद प्रधानमंत्री को ऐसे नेता के रूप में क्यों प्रस्तुत किया जाता है, जो मीडिया से बातचीत नहीं करते।
रिजिजू का कहना था कि मीडिया से संवाद को केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस की संख्या के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। इंटरव्यू के माध्यम से भी प्रधानमंत्री से विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे जाते हैं और वह अपनी बात रखते हैं। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि प्रधानमंत्री मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को बताया ‘औपचारिकता’
रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के स्वरूप को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस एक औपचारिक प्रक्रिया है और संवाद के कई अन्य माध्यम भी मौजूद हैं। बदलते दौर में सरकार और राजनीतिक नेतृत्व जनता तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, सार्वजनिक कार्यक्रम, इंटरव्यू और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी भी अलग-अलग मंचों के जरिए देश के लोगों तक अपनी बात पहुंचाते हैं। सरकार की नीतियों, महत्वपूर्ण फैसलों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तथा विभिन्न अभियानों को लेकर प्रधानमंत्री नियमित रूप से संवाद करते रहे हैं।
मीडिया से दूरी की धारणा पर रिजिजू ने उठाए सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर विपक्ष और उनके आलोचकों की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसी बहस के संदर्भ में रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री के मीडिया इंटरव्यू को भी ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि कई इंटरव्यू देने के बावजूद प्रधानमंत्री की ऐसी छवि बनाई जाती है जैसे वह पत्रकारों से बातचीत ही नहीं करते। रिजिजू के मुताबिक, किसी नेता के मीडिया संवाद का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि उसने कितनी औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं।
जनता से सीधे जुड़ना पसंद करते हैं PM मोदी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की संवाद शैली पारंपरिक राजनीतिक संवाद से कुछ अलग रही है। वह लोगों तक सीधे अपनी बात पहुंचाने पर जोर देते हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए वह सरकारी योजनाओं, नीतियों और समसामयिक विषयों पर अपनी राय रखते हैं।
प्रधानमंत्री के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को भी जनता से सीधे संवाद के प्रमुख माध्यमों में गिना जाता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर भी सक्रिय रहते हैं। रिजिजू के बयान का मुख्य तर्क यही रहा कि मौजूदा दौर में संवाद के माध्यम बदल चुके हैं और केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस को आधार बनाकर मीडिया से संपर्क का आकलन नहीं किया जाना चाहिए।
विपक्ष लगातार उठाता रहा है प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुद्दा
प्रधानमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर राजनीतिक बहस नई नहीं है। विपक्षी दलों के नेता कई मौकों पर आरोप लगाते रहे हैं कि प्रधानमंत्री को नियमित रूप से ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए, जहां पत्रकार सीधे सवाल पूछ सकें और उनसे तत्काल जवाब लिया जा सके।
विपक्ष का तर्क रहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के शीर्ष नेतृत्व से पत्रकारों को विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सवाल पूछने का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा और सरकार से जुड़े नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री लगातार विभिन्न माध्यमों से संवाद करते हैं और मीडिया को इंटरव्यू भी देते हैं।
इसी राजनीतिक बहस के बीच रिजिजू का ताजा बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की संख्या के बजाय प्रधानमंत्री के व्यापक संवाद और इंटरव्यू को सामने रखकर आलोचनाओं का जवाब देने की कोशिश की है।
इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस के प्रारूप में अंतर
प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया इंटरव्यू दोनों ही राजनीतिक संवाद के महत्वपूर्ण माध्यम हैं, हालांकि इनके प्रारूप अलग होते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आमतौर पर अलग-अलग मीडिया संस्थानों के पत्रकार एक ही मंच पर सवाल पूछ सकते हैं। वहीं इंटरव्यू में एक पत्रकार या किसी विशेष मीडिया संस्थान के प्रतिनिधि के साथ विस्तृत बातचीत होती है।
यही अंतर प्रधानमंत्री मोदी के मीडिया संवाद को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस के केंद्र में भी रहा है। आलोचक खुले प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रारूप की मांग करते हैं, जबकि सरकार के समर्थक प्रधानमंत्री के इंटरव्यू और अन्य प्रत्यक्ष संवाद माध्यमों को पर्याप्त बताते हैं।
रिजिजू के बयान से फिर तेज हुई चर्चा
किरेन रिजिजू के इस बयान के बाद प्रधानमंत्री के मीडिया संवाद को लेकर चर्चा एक बार फिर सामने आ गई है। उनका स्पष्ट कहना है कि पीएम मोदी ने बड़ी संख्या में पत्रकारों को इंटरव्यू दिए हैं और इसलिए उन्हें मीडिया से संवाद नहीं करने वाले प्रधानमंत्री के रूप में पेश करना सही नहीं है।
रिजिजू ने प्रधानमंत्री की संवाद शैली का बचाव करते हुए यह भी रेखांकित किया कि आज जनता तक पहुंचने के कई माध्यम उपलब्ध हैं। ऐसे में राजनीतिक नेतृत्व और मीडिया के बीच संवाद को सिर्फ पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दायरे में देखने के बजाय उसके विभिन्न स्वरूपों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
फिलहाल रिजिजू का यह बयान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रधानमंत्री की मीडिया से बातचीत को लेकर जारी पुरानी बहस को नया आधार देता दिखाई दे रहा है। जहां सरकार प्रधानमंत्री के इंटरव्यू और सीधे जनसंवाद को प्रमुखता दे रही है, वहीं विपक्ष नियमित और खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस की मांग को लोकतांत्रिक जवाबदेही से जोड़ता रहा है।
