पिछोर में सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद: आजाद लोधी के खिलाफ तीसरी FIR, ब्राह्मण-जाटव समाज ने की गिरफ्तारी की मांग
जितेंद्र कुमार गौर, जिला शिवपुरी ब्यूरो चीफ
पिछोर/शिवपुरी। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ब्राह्मण और जाटव समाज को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में आजाद लोधी निवासी ग्राम बेसोरा कला के खिलाफ पिछोर थाने में एक और एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत के बाद ब्राह्मण समाज, जाटव समाज सहित सर्व समाज के लोगों ने थाने पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तथा गिरफ्तारी की मांग की।
जानकारी के अनुसार ब्राह्मण समाज की महिला अध्यक्ष आरती त्रिपाठी की शिकायत पर पिछोर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में महिलाओं और विभिन्न समाजों को लेकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे सामाजिक भावनाएं आहत हुईं और लोगों में आक्रोश पैदा हुआ।
आरती त्रिपाठी की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

पुलिस के अनुसार पिछोर थाने में एफआईआर क्रमांक 0405/2026 दिनांक 26 अगस्त 2026 को दर्ज की गई। शिकायतकर्ता आरती त्रिपाठी, निवासी भार्गव कॉलोनी, शिवपुरी रोड, पिछोर ने पुलिस को लिखित आवेदन देकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो की शिकायत की।
शिकायत में कहा गया कि 26 अगस्त को समाज के कुछ लोगों के माध्यम से व्हाट्सएप पर एक वीडियो क्लिप प्राप्त हुई। आरोप है कि वीडियो में आजाद लोधी निवासी ग्राम बेसोरा कला, थाना दिनारा, जिला शिवपुरी द्वारा ब्राह्मण समाज की बहू-बेटियों को लेकर कथित तौर पर अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में जाटव समाज को लेकर भी कथित अपमानजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
हालांकि वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, उसके मूल स्रोत और प्रसारण से जुड़े तथ्यों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वायरल सामग्री में इस्तेमाल भाषा महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है। वीडियो सामने आने के बाद समाज के लोगों में नाराजगी बढ़ी और मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग उठी।
आरती त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी समाज की महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने इसे केवल किसी एक समाज का विषय न बताते हुए महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मामला बताया।
पिछोर थाने पहुंचे सर्व समाज के लोग
विवादित वीडियो के विरोध में ब्राह्मण समाज, जाटव समाज और अन्य समाजों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में पिछोर थाने पहुंचे। प्रदर्शन में महिलाएं, युवा और समाज के वरिष्ठ लोग भी शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।
जाटव समाज के प्रतिनिधियों ने भी कथित टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक सामग्री सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार समय पर कार्रवाई जरूरी है।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग पुलिस अधिकारियों के सामने रखी। कुछ लोगों ने कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए नाराजगी जाहिर की। पुलिस और समाज के वरिष्ठ लोगों ने उपस्थित लोगों से कानून पर भरोसा बनाए रखने और शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की।
BNS की धाराओं में दर्ज किया गया प्रकरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196(1), 353(2) और 299 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की है।
मामले में लगाए गए कानूनी प्रावधान विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने, सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाली सूचना या कथन के प्रसार तथा धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने जैसे आरोपों से संबंधित बताए गए हैं। इन धाराओं का मामले के तथ्यों पर अंतिम रूप से क्या प्रभाव होगा, यह पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।
वायरल वीडियो के मूल स्रोत की भी होगी जांच
मामले में केवल कथित बयान ही नहीं, बल्कि वीडियो के मूल स्रोत और सोशल मीडिया पर उसके प्रसार की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो कब और कहां बनाया गया, सबसे पहले किस अकाउंट या नंबर से प्रसारित हुआ और वायरल सामग्री में किसी प्रकार की एडिटिंग या बदलाव तो नहीं किया गया।
डिजिटल सामग्री से जुड़े मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में वायरल क्लिप, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
तीसरी FIR के बाद मामला और गरमाया
बताया जा रहा है कि आजाद लोधी बेसोरा के खिलाफ यह तीसरी एफआईआर है। लगातार सामने आ रही शिकायतों के कारण पिछोर और आसपास के क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न समाजों की ओर से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
वहीं, किसी भी आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। फिलहाल पुलिस शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की विवेचना कर रही है।
सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील
घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और शांति बनाए रखना है। समाज के वरिष्ठ लोगों ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी विवादित वीडियो या पोस्ट को बिना सत्यापन आगे प्रसारित करने से बचें और किसी भी आपत्तिजनक सामग्री की सूचना सीधे पुलिस को दें।
पिछोर में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर भाषा और सामग्री को लेकर जिम्मेदारी का सवाल खड़ा किया है। ब्राह्मण और जाटव समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
