Fact Check: महिलाओं को एक साल का फ्री मोबाइल रिचार्ज देने का दावा फर्जी, वायरल PM मोदी वीडियो निकला एडिटेड
नई दिल्ली। अगर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी वीडियो को देखकर आप यह मान रहे हैं कि रक्षाबंधन के मौके पर केंद्र सरकार देश की सभी महिलाओं को एक साल का मुफ्त मोबाइल रिचार्ज देने जा रही है, तो सावधान हो जाइए। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाओं के लिए कथित तौर पर एक साल के फ्री मोबाइल रिचार्ज की सरकारी योजना का दावा किया जा रहा है। हालांकि, यह दावा पूरी तरह फर्जी है।
वायरल वीडियो को इंस्टाग्राम समेत अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जा रहा है। वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर आ रहे हैं और उनके नाम से महिलाओं के लिए रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष योजना शुरू किए जाने का दावा किया जा रहा है। पहली नजर में वीडियो वास्तविक सरकारी घोषणा जैसा दिखाई देता है, जिसके कारण कई लोग इसे सच मानकर आगे शेयर कर रहे हैं।
वायरल वीडियो में क्या दावा किया जा रहा है?
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में दावा किया जा रहा है कि रक्षाबंधन के मौके पर देश की महिलाओं को सरकार की ओर से एक विशेष सुविधा दी जा रही है। इसके तहत महिलाओं को एक साल तक मोबाइल रिचार्ज के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा।
वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल होने की वजह से यह दावा लोगों को वास्तविक लग रहा है। पोस्ट को इस तरह तैयार किया गया है कि देखने वाले को लगे कि प्रधानमंत्री ने खुद इस योजना की घोषणा की है।
इसी वजह से वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहा है।
PIB Fact Check ने बताई वीडियो की सच्चाई
वायरल दावे की जांच PIB Fact Check ने की है। जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा वीडियो असली सरकारी घोषणा नहीं है।
PIB Fact Check के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने वीडियो को डिजिटल तरीके से एडिट किया गया है और उसमें फर्जी दावे को जोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है।
यानी वायरल वीडियो को देखकर यह मानना गलत है कि सरकार ने महिलाओं के लिए एक साल के मुफ्त मोबाइल रिचार्ज की योजना शुरू की है।
सरकार ने नहीं की ऐसी कोई घोषणा
फैक्ट चेक में स्पष्ट किया गया है कि रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को एक साल का मुफ्त मोबाइल रिचार्ज उपलब्ध कराने वाली ऐसी किसी सरकारी योजना की घोषणा नहीं की गई है।
इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट और वीडियो में किए गए दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए। खास तौर पर प्रधानमंत्री या किसी सरकारी संस्था के नाम से आने वाले वीडियो को बिना सत्यापन के शेयर करने से बचना जरूरी है।
पुराने वीडियो को एडिट कर बनाया गया फर्जी दावा
वायरल वीडियो की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने वीडियो का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ डिजिटल एडिटिंग के जरिए ऐसा संदेश जोड़ दिया गया, जिससे यह प्रतीत हो कि प्रधानमंत्री महिलाओं के लिए मुफ्त मोबाइल रिचार्ज योजना का ऐलान कर रहे हैं।
इस तरह के एडिटेड वीडियो लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। वीडियो में किसी बड़े नेता की तस्वीर या आवाज दिखाई देने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसमें कही गई बात वास्तविक है।
सोशल मीडिया यूजर्स रहें सतर्क
आज के दौर में सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या मैसेज का वायरल होना उसकी सच्चाई की गारंटी नहीं है। सरकार से जुड़ी योजनाओं के नाम पर कई बार फर्जी दावे सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाते हैं।
ऐसे में अगर आपके पास भी रक्षाबंधन पर महिलाओं को फ्री मोबाइल रिचार्ज मिलने से जुड़ा कोई वीडियो या मैसेज आता है, तो उसे आगे भेजने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें।
फर्जी सरकारी योजनाओं से रहें सावधान
सरकारी योजना के नाम पर आने वाले संदिग्ध मैसेज में कई बार लोगों से व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर, बैंक डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है। इसलिए किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
यदि किसी योजना को लेकर संदेह हो तो संबंधित सरकारी विभाग के आधिकारिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त करना बेहतर है।
बिना जांचे शेयर न करें
वायरल वीडियो को शेयर करने से पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित घोषणा किसी आधिकारिक सरकारी वेबसाइट या प्रमाणित सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट पर उपलब्ध है या नहीं।
PIB Fact Check जैसे आधिकारिक फैक्ट-चेक स्रोतों से भी दावे की पुष्टि की जा सकती है। किसी भी वायरल वीडियो को केवल इसलिए सच नहीं मानना चाहिए क्योंकि उसमें प्रधानमंत्री या किसी अन्य बड़े नेता की तस्वीर और आवाज दिखाई दे रही है।
निष्कर्ष
रक्षाबंधन के मौके पर देश की सभी महिलाओं को एक साल का मुफ्त मोबाइल रिचार्ज देने की सरकारी योजना का दावा फर्जी है। वायरल वीडियो को पुराने वीडियो को डिजिटल तरीके से एडिट कर तैयार किया गया है।
इसलिए सोशल मीडिया यूजर्स को ऐसे भ्रामक वीडियो से सावधान रहने और बिना सत्यापन के उन्हें आगे शेयर नहीं करने की सलाह दी जाती है। वायरल होने से कोई खबर या वीडियो सच नहीं हो जाता—सत्यापन करना ही सबसे जरूरी है।
