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H-1B और OPT पर भारी फीस का प्रस्ताव: भारतीय IT सेक्टर और छात्रों के सामने बढ़ी चिंता

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Published On: 26 August 2026
H-1B और OPT पर भारी फीस का प्रस्ताव: भारतीय IT सेक्टर और छात्रों के सामने बढ़ी चिंता

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H-1B और OPT पर भारी फीस का प्रस्ताव: भारतीय IT सेक्टर और छात्रों के सामने बढ़ी चिंता

अमेरिकी वीजा नीति में बड़े बदलाव की तैयारी

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की ओर से प्रस्तावित नए नियमों ने भारतीय आईटी इंडस्ट्री, अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों और H-1B वर्क वीजा पर काम करने वाले प्रोफेशनल्स के बीच चिंता बढ़ा दी है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सालाना वीजा सीमा के दायरे में आने वाली नई H-1B अर्जी पर अमेरिकी नियोक्ताओं को $103,265 तक का नया शुल्क देना पड़ सकता है।

यह प्रस्ताव अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यदि इसे मौजूदा स्वरूप में लागू किया जाता है, तो विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत काफी बढ़ सकती है और इसका सीधा असर भारतीय टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स तथा छात्रों पर पड़ सकता है।

30 दिनों तक मांगे गए सार्वजनिक सुझाव

24 अगस्त को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित नोटिस के बाद प्रस्ताव पर जनता और संबंधित पक्षों से 30 दिनों तक टिप्पणियां मांगी गई हैं। इसका अर्थ है कि अंतिम नियम लागू होने से पहले कंपनियों, उद्योग संगठनों, छात्रों और अन्य हितधारकों को अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा।

बताया जा रहा है कि प्रस्ताव को वर्ष के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। हालांकि, अंतिम नियम आने तक इसकी शर्तों में बदलाव संभव है। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित नीति के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

नई H-1B अर्जी पर $103,265 का प्रस्तावित शुल्क

प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नई H-1B अर्जी से जुड़ा है। सालाना H-1B सीमा के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक नई अर्जी पर नियोक्ता को $103,265 का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।

इतनी बड़ी राशि कंपनियों के लिए किसी विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने के फैसले को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से छोटी और मध्यम अमेरिकी कंपनियां इतनी अधिक लागत वहन करने में कठिनाई महसूस कर सकती हैं।

इसका परिणाम यह हो सकता है कि कंपनियां विदेशी फ्रेशर्स या शुरुआती स्तर के कर्मचारियों के बजाय अनुभवी और अत्यधिक विशिष्ट कौशल रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दें।

H-1B एक्सटेंशन और L-1 पर भी अतिरिक्त बोझ

मामला केवल नई H-1B अर्जी तक सीमित नहीं है। 9 सितंबर से कुछ बड़ी कंपनियों पर H-1B और L-1 एक्सटेंशन के संबंध में अतिरिक्त शुल्क लागू होने की बात सामने आई है।

ऐसी कंपनियां जिनके 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी H-1B या L-1 जैसे वीजा पर कार्यरत हैं, उन्हें प्रति H-1B एक्सटेंशन $4,000 और प्रति L-1 एक्सटेंशन $4,500 का सरचार्ज देना पड़ सकता है।

इसका असर उन कंपनियों पर अधिक हो सकता है जिनका बिजनेस मॉडल अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कर्मचारियों पर काफी निर्भर है।

भारतीय IT कंपनियों पर सीधा असर

भारत की प्रमुख आईटी कंपनियां लंबे समय से अमेरिकी बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। TCS, Infosys, Wipro और HCL जैसी कंपनियां तथा अन्य टेक्नोलॉजी सर्विस प्रोवाइडर्स भारत से प्रशिक्षित इंजीनियरों और टेक्निकल प्रोफेशनल्स को अमेरिकी ग्राहकों के प्रोजेक्ट्स पर तैनात करते रहे हैं।

यदि वीजा से जुड़ी लागत लगातार बढ़ती है, तो कंपनियों के लिए अमेरिका में कर्मचारियों को लंबे समय तक तैनात रखना महंगा हो सकता है। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत बढ़ने के साथ-साथ कंपनियों की लाभप्रदता पर भी दबाव पड़ सकता है।

अमेरिका में स्थानीय नियुक्तियों को मिल सकता है बढ़ावा

महंगी H-1B स्पॉन्सरशिप कंपनियों को स्थानीय स्तर पर भर्ती बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकती है। अमेरिकी नागरिकों और ग्रीन कार्ड धारकों को नियुक्त करने से कंपनियां वीजा संबंधी अतिरिक्त खर्च और प्रशासनिक जटिलताओं से बच सकती हैं।

इससे भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिकी नौकरी बाजार में प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है। खासकर सामान्य सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटी सपोर्ट और अन्य ऐसी भूमिकाओं में जहां स्थानीय उम्मीदवार आसानी से उपलब्ध हों, कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से बच सकती हैं।

ऑफशोरिंग और रिमोट वर्क को मिल सकता है बढ़ावा

वीजा की बढ़ती लागत का एक संभावित परिणाम ऑफशोरिंग में वृद्धि भी हो सकता है। कंपनियां अमेरिकी क्लाइंट लोकेशन पर बड़ी टीम रखने के बजाय भारत जैसे देशों से प्रोजेक्ट संचालित करने पर अधिक जोर दे सकती हैं।

भारत में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध हैं और यहां परिचालन लागत भी अमेरिका की तुलना में कम है। इसलिए कंपनियां कुछ कार्यों को भारत या अन्य कम लागत वाले बाजारों में स्थानांतरित कर सकती हैं।

इससे एक तरफ अमेरिका में ऑन-साइट अवसर कम हो सकते हैं, लेकिन दूसरी तरफ भारत में रिमोट और ऑफशोर टेक्नोलॉजी नौकरियों की मांग बढ़ने की संभावना भी बन सकती है।

भारतीय छात्रों के लिए बढ़ सकती है चिंता

अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए भी प्रस्तावित बदलाव महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी अमेरिकी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने के बाद OPT के माध्यम से काम करने का अवसर प्राप्त करते हैं।

OPT छात्रों को अपनी पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक कार्य अनुभव हासिल करने का मौका देता है। कई छात्र इसी अवधि के दौरान अमेरिकी कंपनियों में नौकरी करते हैं और आगे चलकर H-1B वीजा के लिए प्रयास करते हैं।

यदि H-1B स्पॉन्सरशिप कंपनियों के लिए अत्यधिक महंगी हो जाती है, तो छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद स्थायी रोजगार हासिल करना कठिन हो सकता है।

OPT पर भी $100,000 शुल्क का प्रस्ताव

H-1B के अलावा OPT को लेकर भी अलग से चिंता सामने आई है। विदेशी स्नातकों के लिए उपलब्ध पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट OPT पर $100,000 का अतिरिक्त शुल्क लगाने पर विचार किया जा रहा है।

यदि इस तरह का शुल्क लागू होता है, तो अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए शिक्षा के बाद रोजगार का रास्ता काफी कठिन हो सकता है।

भारतीय छात्रों के लिए इसका महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए बड़ी रकम खर्च करने वाले विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के बाद काम करके अनुभव हासिल करने और शिक्षा ऋण चुकाने की उम्मीद रहती है।

शिक्षा ऋण चुकाना हो सकता है मुश्किल

अमेरिका में उच्च शिक्षा की लागत काफी अधिक हो सकती है। अनेक भारतीय विद्यार्थी फीस, रहने और अन्य खर्चों के लिए परिवार की बचत के साथ-साथ शिक्षा ऋण का भी सहारा लेते हैं।

यदि डिग्री पूरी करने के बाद उन्हें OPT या H-1B के जरिए रोजगार का अवसर नहीं मिलता, तो उनके सामने आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों को भविष्य के रोजगार अवसरों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना पड़ सकता है।

छोटी कंपनियों पर ज्यादा असर

बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास वीजा संबंधी अतिरिक्त लागत उठाने की क्षमता अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। इसके विपरीत छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए एक कर्मचारी पर लाखों रुपये के बराबर अतिरिक्त शुल्क देना मुश्किल हो सकता है।

ऐसी कंपनियां विदेशी छात्रों को नौकरी देने और H-1B स्पॉन्सरशिप से दूरी बना सकती हैं। इसका सीधा असर उन भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है जो पढ़ाई के बाद शुरुआती स्तर की नौकरियों से अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं।

केवल हाई-स्किल भूमिकाओं को प्राथमिकता?

यदि कंपनियों को H-1B के लिए भारी खर्च करना पड़े, तो वे संभवतः केवल उन पदों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना चाहेंगी जिनके लिए विशेष तकनीकी विशेषज्ञता जरूरी है।

इसका अर्थ यह हो सकता है कि अत्यधिक विशिष्ट AI, साइबर सिक्योरिटी, एडवांस्ड इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और अन्य हाई-स्किल भूमिकाओं में अवसर बने रहें, जबकि सामान्य आईटी भूमिकाओं में स्पॉन्सरशिप कम हो सकती है।

वेतन और भर्ती रणनीति पर असर

नई लागत की भरपाई के लिए कंपनियां अपनी भर्ती रणनीति में बदलाव कर सकती हैं। कुछ कंपनियां कर्मचारियों के वेतन, बोनस या अन्य लाभों को लेकर अलग नीति अपना सकती हैं, जबकि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की संख्या सीमित कर सकती हैं।

हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम नियम किस रूप में लागू होते हैं और कंपनियां अतिरिक्त लागत का भार किस तरह संभालती हैं।

भारत-अमेरिका टेक संबंधों पर असर

भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी और कारोबारी संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी सेवाएं प्रदान करती हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय टेक्नोलॉजी टैलेंट एक महत्वपूर्ण संसाधन रहा है।

इसलिए H-1B और अन्य वर्क वीजा में बड़े बदलाव केवल भारतीय प्रोफेशनल्स को प्रभावित नहीं करेंगे, बल्कि दोनों देशों की टेक इंडस्ट्री और प्रतिभा के आवागमन पर भी असर डाल सकते हैं।

अंतिम नियम का इंतजार जरूरी

फिलहाल प्रस्तावित शुल्क और नियम अंतिम नहीं हैं। 30 दिनों की सार्वजनिक टिप्पणी प्रक्रिया के बाद प्रशासन प्रस्ताव में बदलाव कर सकता है। इसलिए छात्रों, कंपनियों और संभावित H-1B आवेदकों को अंतिम नियम जारी होने तक स्थिति पर नजर रखनी होगी।

यदि प्रस्ताव अपने मौजूदा स्वरूप में लागू होता है, तो अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में लागत का एक नया और बेहद महंगा दौर शुरू हो सकता है। वहीं, यदि नियमों में बदलाव किया जाता है, तो भारतीय छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए संभावित प्रभाव अलग हो सकता है।

निष्कर्ष

H-1B और OPT से जुड़े प्रस्तावित भारी शुल्क ने भारतीय आईटी उद्योग और अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नई H-1B अर्जी पर प्रस्तावित $103,265 शुल्क और OPT से जुड़ा संभावित $100,000 शुल्क विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती को महंगा बना सकता है।

भारतीय आईटी कंपनियों के लिए इससे अमेरिका में ऑन-साइट कर्मचारियों की तैनाती की लागत बढ़ सकती है और ऑफशोरिंग तथा रिमोट वर्क को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद अमेरिका में नौकरी हासिल करना और H-1B स्पॉन्सरशिप प्राप्त करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। इसलिए वास्तविक प्रभाव का आकलन अंतिम नियम जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि प्रस्तावित बदलाव भारतीय छात्रों, आईटी कंपनियों और अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे टेक प्रोफेशनल्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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