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करौली शंकर जी का स्पष्ट संदेश—किसी भी कीमत पर लोकतंत्र मजबूत होना चाहिए

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Published On: 25 August 2026
करौली
— ‘One Nation, One Election’ Should Strengthen Democracy and National Progress: Karoli Shankar Ji

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करौली शंकर जी का स्पष्ट संदेश—किसी भी कीमत पर लोकतंत्र मजबूत होना चाहिए

संवाददाता :अभिषेक द्विवेदी

‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर हरिद्वार में संत समागम, करौली शंकर जी ने राजनीतिक लाभ से ऊपर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की बात कही

अनूपपुर। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के मुद्दे को लेकर हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम, ज्वालापुर स्थित श्री जी वाटिका में संत समागम का आयोजन किया गया। समागम में विभिन्न अखाड़ों के वरिष्ठ संतों के साथ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वामी रामदेव सहित कई गणमान्य व्यक्तियों और संतों ने हिस्सा लिया।

समागम में श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के महामंडलेश्वर करौली शंकर जी महाराज ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के समर्थन में अपना दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि चुनाव व्यवस्था से जुड़े किसी भी विषय को केवल राजनीतिक दलों के फायदे या नुकसान के नजरिए से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, लोकतंत्र की मजबूती और देश की प्रगति को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए।

धर्मगद्दी और राजगद्दी का संवाद सकारात्मक संदेश

करौली शंकर जी महाराज ने कहा कि भारत में धर्मगद्दी और राजगद्दी के बीच राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन और विचार-विमर्श की परंपरा रही है।

उन्होंने कहा कि संत समाज और सरकार का राष्ट्रीय महत्व के विषय पर एक मंच पर चिंतन करना देश और दुनिया के लिए सकारात्मक संदेश है। उनके अनुसार, देश के महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और विचार-विमर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करने में सहायक हो सकता है।

राजनीतिक लाभ से ऊपर राष्ट्रहित

‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर उठ रही आशंकाओं पर करौली शंकर जी ने कहा कि इस विषय को किसी राजनीतिक दल के हित या चुनावी लाभ के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और क्षेत्र हैं, लेकिन राष्ट्र एक है। ऐसे में पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने की व्यवस्था रही है। इसलिए मौजूदा समय में भी इस व्यवस्था को लेकर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जा सकता है।

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चुनावी खर्च की बचत से ज्यादा जरूरी देश की प्रगति

करौली शंकर जी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की चर्चा को केवल चुनावी खर्च में होने वाली संभावित बचत तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि देश आगे बढ़े, लोकतंत्र मजबूत हो और देश सुरक्षित रहे। उनके अनुसार, चुनावी व्यवस्था में बदलाव पर विचार करते समय इसके व्यापक प्रभाव और देश के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।

उन्होंने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को देश के लिए सार्थक और जरूरी कदम बताया।

एक साथ चुनाव का मतलब एक ही पार्टी को वोट नहीं

एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने की स्थिति में क्या इससे किसी एक राजनीतिक दल को हर स्तर पर फायदा हो सकता है, इस आशंका पर भी करौली शंकर जी ने अपनी बात रखी।

उन्होंने भारतीय मतदाताओं की राजनीतिक समझ और विवेक का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता अलग-अलग स्तर के चुनावों में अलग-अलग निर्णय लेने में सक्षम है।

उन्होंने दिल्ली के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि एक साथ चुनाव होने का यह अर्थ नहीं है कि मतदाता लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में एक ही राजनीतिक दल को वोट देगा। मतदाता अपने विवेक के आधार पर अलग-अलग चुनावों में अलग निर्णय ले सकता है।

राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान पर भी सुझाव

अपने संबोधन के अंत में करौली शंकर जी ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान से जुड़े विषय पर भी सुझाव रखा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के अपमान के दोषी पाए जाने वाले लोगों के मताधिकार पर भी कार्रवाई किए जाने के विषय पर विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए इस विषय पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता बताई।

लोकतंत्र की मजबूती को बताया प्राथमिकता

करौली शंकर जी के संबोधन का मुख्य संदेश रहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को केवल राजनीतिक दलों के फायदे-नुकसान की कसौटी पर नहीं परखा जाना चाहिए।

उनके अनुसार, इस विषय पर विचार करते समय देश की प्रगति, लोकतंत्र की मजबूती, राष्ट्रीय सुरक्षा और मतदाता के विवेक जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और चुनाव व्यवस्था से जुड़े किसी भी निर्णय में राष्ट्रहित को केंद्र में रखा जाना चाहिए।

हरिद्वार संत समागम बना राष्ट्रीय विमर्श का मंच

हरिद्वार में आयोजित यह संत समागम ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय पर संत समाज के दृष्टिकोण को सामने लाने वाला मंच बना।

समागम में संतों और गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में राष्ट्रीय विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। करौली शंकर जी ने अपने संबोधन में राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के नजरिए से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर विचार करने की अपील की।

उन्होंने मतदाता की स्वतंत्र सोच और लोकतांत्रिक निर्णय क्षमता पर भी भरोसा जताया और कहा कि एक साथ चुनाव होने के बावजूद मतदाता अलग-अलग स्तरों पर अपने विवेक से मतदान कर सकता है।

कार्यक्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, संत समागम का उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर व्यापक विमर्श को आगे बढ़ाना और विभिन्न क्षेत्रों के विचारों को सामने रखना रहा।

उक्त जानकारी करौली शंकर धाम कानपुर से जुड़े दरबार के तंत्र दीक्षित भक्त हनी चौरसिया एवं राजेश सिंह ने संयुक्त रूप से दी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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