Indore में जमीन विवाद के बीच फर्जी कोर्ट आदेश का मामला, वरिष्ठ अधिकारी के नाम से तैयार हुआ कथित आदेश
Indore । शहर में जमीन विवाद से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। खजराना क्षेत्र की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं अपर आयुक्त तरुण भटनागर की अदालत के नाम से कथित तौर पर फर्जी आदेश तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला तब सामने आया, जब रविवार को हाईकोर्ट में हुई अर्जेंट सुनवाई के दौरान यह आदेश पेश किया गया। आदेश सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
प्रारंभिक जांच में संबंधित आदेश के फर्जी होने की बात सामने आने के बाद अब पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फर्जी आदेश तैयार करने, उसे संबंधित पक्षों तक पहुंचाने और हाईकोर्ट में पेश किए जाने के पीछे किन लोगों की भूमिका रही, इसकी पड़ताल की जा रही है। मामले में कई बड़े नामों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है।
खजराना की जमीन को लेकर विवाद
जानकारी के अनुसार पूरा मामला खजराना क्षेत्र स्थित एक जमीन से जुड़ा है। यह जमीन सर्वे नंबर 388/2/14 में बताई जा रही है, जिसका क्षेत्रफल करीब 5 हजार वर्गफीट यानी लगभग 0.047 हेक्टेयर है।
इस जमीन को लेकर पुष्परतन रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अंकित जैन की कंपनी और राजीव अग्निहोत्री के बीच सौदे को लेकर विवाद चल रहा है। बताया गया है कि राजीव अग्निहोत्री ने उक्त जमीन को पुष्परतन कंपनी को बेचने का सौदा किया था। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया और मामला मध्यस्थता की प्रक्रिया तक पहुंच गया।
जमीन पर लक्ष्मीबाई नाम की महिला के झोपड़ी बनाकर रहने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में जमीन के स्वामित्व, सौदे और कब्जे से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को लेकर विवाद बना हुआ है।
फर्जी आदेश सामने आने से बढ़ी गंभीरता
जमीन विवाद के बीच रविवार को हाईकोर्ट में हुई अर्जेंट सुनवाई के दौरान एक आदेश पेश किया गया। यह आदेश वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं अपर आयुक्त तरुण भटनागर की अदालत से संबंधित बताया गया।
आदेश पेश होने के बाद इसकी वास्तविकता को लेकर सवाल उठे। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक कार्यालय में दस्तावेज की जांच कराई गई। जांच के दौरान आदेश के फर्जी होने की बात सामने आने के बाद अधिकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह कथित फर्जी आदेश किसने तैयार किया और इसे तैयार करने के पीछे उद्देश्य क्या था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि दस्तावेज को वास्तविक आदेश के रूप में किस स्तर पर इस्तेमाल किया गया।
हाईकोर्ट में पेश किए जाने के बाद खुला मामला
बताया जा रहा है कि यदि यह आदेश हाईकोर्ट के समक्ष पेश नहीं होता तो संभवत: इसकी वास्तविकता पर तत्काल सवाल नहीं उठते। अर्जेंट सुनवाई के दौरान आदेश सामने आने के बाद संबंधित प्रशासनिक कार्यालय से इसकी पुष्टि किए जाने की स्थिति बनी।
जांच में आदेश के फर्जी पाए जाने के बाद मामला गंभीर हो गया है। अब दस्तावेज की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। इसमें यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आदेश तैयार करने में किन दस्तावेजों या जानकारियों का इस्तेमाल किया गया और इसे किस माध्यम से संबंधित पक्ष तक पहुंचाया गया।
कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में
मामले में जमीन विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के अलावा अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित फर्जी आदेश तैयार करने वाला व्यक्ति कौन था, उसे तैयार करने के लिए प्रशासनिक दस्तावेजों या न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित जानकारी कहां से प्राप्त की गई और आदेश को हाईकोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही इससे जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।
जमीन पर महिला के रहने की भी जानकारी
विवादित जमीन पर लक्ष्मीबाई नाम की महिला झोपड़ी बनाकर रह रही है। जमीन को लेकर चल रहे सौदे और विवाद के बीच महिला के कब्जे का मुद्दा भी सामने आया है। ऐसे में मामले में जमीन के सौदे के साथ-साथ कब्जे और संबंधित अधिकारों से जुड़े पहलुओं की भी जांच आवश्यक हो गई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विवादित जमीन खजराना के सर्वे नंबर 388/2/14 में स्थित है और इसका क्षेत्रफल करीब 5 हजार वर्गफीट बताया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू
कथित फर्जी आदेश सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित दस्तावेजों की जांच के साथ यह भी देखा जा रहा है कि आदेश में किन तथ्यों का उल्लेख किया गया था और वह वास्तविक न्यायिक प्रक्रिया से कितना अलग था।
मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होने की संभावना है। यदि जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
हाईप्रोफाइल मामला होने से बढ़ी नजर
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक ओर यह खजराना की जमीन से जुड़े विवाद से संबंधित है, वहीं दूसरी ओर इसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के नाम से कथित फर्जी आदेश तैयार किए जाने का आरोप सामने आया है।
फिलहाल मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जमीन के सौदे से लेकर मध्यस्थता प्रक्रिया, विवादित जमीन पर कब्जे और कथित फर्जी आदेश के हाईकोर्ट में पेश होने तक की पूरी कड़ी को जांच में शामिल किया जा सकता है।
प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित फर्जी आदेश की तैयारी और इस्तेमाल के पीछे कौन लोग थे तथा इसका वास्तविक उद्देश्य क्या था। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में जिम्मेदार लोगों और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
