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Indore सच्चा जैनी वही, जिसके घर में जैनत्व के सिद्धांतों का पूर्ण पालन हो: मुनि सुधा सागर

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Published On: 25 August 2026
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Indore जैनत्व के सिद्धांतों को लेकर मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने इंदौर की धर्मसभा में रात्रि भोजन, जीवों के प्रति करुणा और बुरी आदतों से बचने का संदेश दिया।
राजेश जैन दद्दू, इंदौर

सच्चा जैनी वह है जिसके घर में जैनत्व के सिद्धांतों का पूर्णतः पालन होता हो

Indore। जैनत्व के सिद्धांत केवल कहने या मानने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन और घर के संस्कारों में उतारना आवश्यक है। आज हजारों जैन घरों में एक भी घर ऐसा दिखाई नहीं देता, जहां जैनत्व के सिद्धांतों का पूर्णतः पालन होता हो। सच्चा जैनी वही है, जिसका घर ऐसा हो जैसा जिनवाणी में उल्लेख है और घर में रहने वाले लोग भी जैनत्व के संस्कारों से समृद्ध हों। घर में रात्रि भोजन पूर्णतः निषेध हो, जो खुद भी रात्रि भोजन न करें और मेहमानों को भी न कराएं, वही सच्चा जैन घर और जैनी है।

यह खरी-खरी बातें मंगलवार को सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान एवं विद्या सुधा देशना मंडप में आयोजित धर्मसभा में श्रमण संस्कृति के महाश्रमण मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहीं।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री ने तंज करते हुए कहा कि जैन होकर भी जिस घर के लोग रात्रि भोजन करते हों, उस मकान पर ‘निशाचर भवन’ लिखवा देना चाहिए।

जैनत्व के सिद्धांत और जीवों के सुख की भावना

सुधा वाणी

मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति जिन कष्टों, बीमारियों और परेशानियों से आज दुखी है, प्रभु वैसे दुख और बीमारी किसी अन्य जीव को न हो। सभी जीव जगत सुखी रहें, प्रतिदिन ऐसी भावना भाएं तो तुम्हारे दुख भी दूर हो जाएंगे और तुम्हारी विशुद्धि भी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति में अगर व्यसन आदि कोई बुरी आदत हो तो उसे छोड़ दे और जो छोड़ नहीं सकते, वे एक नियम ले लें कि बुराई को छुपाकर करूंगा, उजागर नहीं करूंगा, ताकि जो बुराई और पाप मेरे अंदर हैं, वह अंदर ही रहें और दूसरा व्यक्ति उस बुरी आदत से प्रभावित होकर वैसा न करने लगे।

पाप प्रवृत्ति को कोरोना की तरह मानें

मुनि सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि तुम्हारी पाप प्रवृत्ति हो तो उसको कोरोना मानना, ताकि तुम्हारी आदत से दूसरे संक्रमित या प्रभावित न हों। उन्होंने धर्मसभा में उपस्थित समाजजनों को जीवन में जैनत्व के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने और अपने आचरण से दूसरों को भी धर्म के मार्ग पर प्रेरित करने का संदेश दिया।

धर्मसभा का संचालन अनुराग जैन ने किया। इस अवसर पर आलोक, आकाश कोल, अक्षय कासलीवाल, धर्मेन्द्र सिनकेम, आनंद, नवीन गोधा, डॉ. जैनेन्द्र जैन और कमल जैन चेलेंजर आदि समाजजन उपस्थित थे।

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