‘धागों का त्योहार’ में भाई-बहन के प्रेम और देशभक्ति का भाव
राखी के पावन पर्व को समर्पित भावपूर्ण रचना‘
रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अटूट रिश्ते का पर्व है। इसी पवित्र भावना को कवि डॉ. भेरूसिंह चौहान ‘तरंग’ ने अपनी रचना ‘धागों का त्योहार’ में सरल और सहज शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। कविता में राखी के रंग-बिरंगे धागों के साथ भाई-बहन के प्रेम, जिम्मेदारी, विश्वास और देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान को भी स्थान दिया गया है।
कवि ने राखी को केवल एक त्योहार के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे प्रेम और सुरक्षा के अमर बंधन का प्रतीक बताया है। कविता की शुरुआती पंक्तियां ही पाठक को त्योहार के उल्लास और पारिवारिक प्रेम से जोड़ देती हैं।
रंग-बिरंगी राखियों से सजा बाजार
रक्षाबंधन आते ही बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज जाते हैं। बहनों में भाई की कलाई पर प्रेम का धागा बांधने का उत्साह दिखाई देता है। कवि ने इसी दृश्य को आधार बनाते हुए राखी के वातावरण का सुंदर चित्रण किया है।
राखी का धागा देखने में भले ही साधारण हो, लेकिन उसके पीछे भावनाओं की गहराई बहुत बड़ी होती है। यह धागा भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने का संदेश देता है।
कविता में राखी को ‘अमर-प्रेम का बंधन’ कहा गया है। यह भाव बताता है कि भाई-बहन का रिश्ता समय और परिस्थितियों से परे होता है।
संकट में बहन के साथ खड़ा भाई
कविता में भाई के उस दायित्व को भी रेखांकित किया गया है, जो वह अपनी बहन के प्रति निभाता है। जब भी बहन के जीवन में कोई संकट आता है, भाई उसके पास पहुंचने का प्रयास करता है।
यह भावना भारतीय पारिवारिक संस्कारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भाई केवल राखी के दिन बहन के साथ नहीं होता, बल्कि उसके जीवन के सुख-दुख में सहभागी बनने का संकल्प भी रखता है।
कवि के अनुसार, भाई अपने दिए हुए वचन को निभाता है और बहन के जीवन में खुशियों की बगिया महकाने का प्रयास करता है। इस तरह कविता में राखी का धागा जिम्मेदारी और भरोसे से जुड़ जाता है।
राखी की पारंपरिक रस्मों का सुंदर चित्रण
रचना में रक्षाबंधन के पारंपरिक स्वरूप को भी बेहद सहज तरीके से प्रस्तुत किया गया है। बहन सज-धजकर भाई के घर आती है और पूजा की थाली तैयार करती है।
कुमकुम, अक्षत और श्रीफल से सजी थाली भारतीय संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों का प्रतीक बनती है। बहन भाई को आसन पर बैठाकर मंगल तिलक लगाती है और उसकी कलाई पर राखी बांधती है।
इसके बाद आरती की जाती है और भाई बहन को उपहार देता है। इन छोटी-छोटी रस्मों के माध्यम से कवि ने रक्षाबंधन की आत्मीयता और पारिवारिक उल्लास को जीवंत कर दिया है।
राखी के धागे में छिपा भावनाओं का संसार
राखी केवल सूत या धागे से बनी वस्तु नहीं है। उसके साथ बहन की शुभकामनाएं और भाई के प्रति विश्वास जुड़ा होता है। यही कारण है कि एक छोटा-सा धागा भी भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है।
कविता में बार-बार आने वाली पंक्ति भाई-बहन के प्रेम को और अधिक मजबूती देती है। यह दोहराव रचना को गीतात्मकता प्रदान करता है और पाठक के मन में मुख्य भाव को गहराई से स्थापित करता है।
परिवार से देश की सीमा तक पहुंचती भावना
कविता का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष इसका देशभक्ति से जुड़ना है। कवि ने रक्षाबंधन के भाव को केवल परिवार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे देश की सीमाओं तक पहुंचाया है।
सीमा पर तैनात सैनिक भी किसी के भाई, बेटे और परिवार के सदस्य होते हैं। वे अपने परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। त्योहारों के अवसर पर जब पूरा देश अपने परिवार के साथ खुशियां मनाता है, तब सैनिक सीमा पर अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं।
कवि ने सैनिक के त्याग और कर्तव्य को विशेष महत्व दिया है। सर्दी, गर्मी और बरसात जैसी कठिन परिस्थितियों में भी सैनिक देश की रक्षा के लिए सीमा पर डटा रहता है।
सैनिकों के प्रति सम्मान का संदेश
कविता का अंतिम हिस्सा पाठक को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि रक्षाबंधन की भावना केवल अपने भाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। देश की रक्षा करने वाले हर सैनिक को भी सम्मान और स्नेह मिलना चाहिए।
सैनिकों की बहनें भी रक्षाबंधन पर अपने भाइयों की सलामती की कामना करती हैं। कई सैनिक ऐसे होते हैं, जो त्योहार के दिन अपने परिवार से दूर रहते हैं। उनके लिए देश की सुरक्षा ही सर्वोच्च कर्तव्य होती है।
कवि ने सैनिक की भावना को इस रूप में प्रस्तुत किया है कि वह जहां भी हो, अपनी बहन के लिए खुशियों की कामना करता है। यह भाव कविता को संवेदनशील और देशभक्ति से ओतप्रोत बना देता है।
सरल भाषा में गहरी भावनाएं
‘धागों का त्योहार’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरल और सहज भाषा है। कविता में कठिन शब्दों का अधिक प्रयोग नहीं किया गया है। इसी कारण इसका भाव सीधे पाठक के मन तक पहुंचता है।
कवि ने पारिवारिक प्रेम, भाई का दायित्व, बहन का स्नेह और सैनिक का त्याग जैसे विषयों को सामान्य बोलचाल के शब्दों में प्रस्तुत किया है। गीतात्मक शैली के कारण रचना को पढ़ते समय लय और भाव दोनों का अनुभव होता है।
डॉ.भेरूसिंह चौहान “तरंग”
४ रोहिदास मार्ग,झाबुआ
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