India Russia Trade 2026: पुतिन का भारत को बड़ा भरोसा, बढ़ेगी उर्वरक सप्लाई; जयशंकर से मुलाकात में अहम संकेत
India Russia Fertiliser Supply: भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्तों में एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। ऊर्जा कारोबार के बाद अब उर्वरक यानी खाद की आपूर्ति दोनों देशों के बीच सहयोग का अहम हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई मुलाकात में भारतीय कृषि क्षेत्र की जरूरतों और रूस से उर्वरकों की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
रूस की ओर से संकेत दिया गया है कि वह भारत की बढ़ती कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए खनिज उर्वरकों की आपूर्ति जारी रखने और आवश्यकता के अनुसार इसे बढ़ाने के लिए तैयार है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाद की पर्याप्त उपलब्धता फसल उत्पादन और किसानों की लागत दोनों को प्रभावित करती है।
किसानों के लिए क्यों अहम है रूस का भरोसा?
भारत में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की मांग खेती के मौसम के साथ तेजी से बढ़ती है। घरेलू उत्पादन के साथ भारत को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरकों का आयात भी करना पड़ता है। ऐसे में रूस जैसे बड़े आपूर्तिकर्ता से स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
Russia पिछले कुछ वर्षों में भारत के प्रमुख उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हुआ है। खासकर वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच रूस से आने वाली खाद भारत की जरूरतों को पूरा करने में मदद करती रही है।
पुतिन की ओर से उर्वरकों की आपूर्ति बढ़ाने की इच्छा जताए जाने से भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए आने वाले समय में सप्लाई व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है।
भारत-रूस व्यापार में खाद की बढ़ती भूमिका
भारत और रूस के बीच व्यापार लंबे समय से मुख्य रूप से ऊर्जा क्षेत्र पर केंद्रित रहा है। रूस से भारत बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। हालांकि, अब दोनों देश व्यापार के दूसरे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
उर्वरक इस विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। भारत की कृषि जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं और किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। रूस के पास खनिज संसाधनों और उर्वरक उत्पादन की मजबूत क्षमता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच यह सहयोग लंबे समय तक चलने वाली आपूर्ति व्यवस्था में बदल सकता है।
पहले भी हो चुकी है दीर्घकालिक सप्लाई पर चर्चा
भारत और रूस के बीच उर्वरकों की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। दिसंबर 2025 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों देशों के बीच उर्वरकों की नियमित और दीर्घकालिक आपूर्ति को मजबूत करने पर बातचीत हुई थी।
दोनों देशों की कोशिश केवल तत्काल जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है। भविष्य में संयुक्त उपक्रम और लंबी अवधि के समझौतों के जरिए उर्वरक आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
उर्वरक सहयोग ऐसे समय में बढ़ रहा है जब भारत और रूस अपने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार 2021 में करीब 13 अरब डॉलर था, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 60 अरब डॉलर पहुंच गया।
हालांकि, व्यापार में इतनी तेजी के बावजूद भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ा है। भारत रूस से ऊर्जा और अन्य वस्तुओं का आयात बड़ी मात्रा में करता है, जबकि रूस को भारत का निर्यात अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में नई दिल्ली व्यापार को अधिक संतुलित बनाने पर जोर दे रही है।
दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसके लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने तथा भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी काम किया जा रहा है।
ऊर्जा और खाद से आगे बढ़ेगा व्यापार
भारत-रूस संबंधों में ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है, लेकिन दोनों देश अब व्यापार का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। कृषि उत्पाद, मशीनरी, धातु, औद्योगिक सामान और वन उत्पाद जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
भारत Russia को दवाइयां, कृषि उत्पाद, मशीनरी और विभिन्न औद्योगिक वस्तुओं का निर्यात करता है। ऐसे में उर्वरकों के बदले भारत से रूस को अन्य उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर व्यापार संतुलन सुधारने की कोशिश भी की जा सकती है।
भारत को सस्ती और स्थिर खाद की उम्मीद
उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर किसानों और सरकार के बजट पर पड़ता है। यदि रूस से भारत को नियमित और पर्याप्त मात्रा में खाद मिलती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक आने वाली आपूर्ति संबंधी दिक्कतों से निपटने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, रूस की ओर से आपूर्ति बढ़ाने के संकेत का मतलब यह नहीं है कि खाद की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, परिवहन लागत, मुद्रा विनिमय दर और सरकारी सब्सिडी जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। फिर भी स्थिर आपूर्ति किसानों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है।
जयशंकर-पुतिन मुलाकात से आगे की राह
एस. जयशंकर और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात में उर्वरक के साथ दोनों देशों के व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी बैठकों और संभावित भारत-रूस शिखर वार्ता से जुड़े संदेश भी पुतिन तक पहुंचाए।
आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों में व्यापार, ऊर्जा, खाद, भुगतान व्यवस्था और निवेश जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
कुल मिलाकर, रूस की ओर से भारत को उर्वरक सप्लाई बढ़ाने का भरोसा किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। यदि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते और व्यापार विस्तार की योजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो भारत-रूस साझेदारी ऊर्जा से आगे बढ़कर कृषि, उर्वरक और व्यापक आर्थिक सहयोग की दिशा में एक नया आधार तैयार कर सकती है।
