—Advertisement—

बिल्डिंग भारत संपर्क नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट में 2 राष्ट्रीय विजेताओं का ऐलान

Author Picture
Published On: 24 August 2026
बिल्डिंग

—Advertisement—

बिल्डिंग भारत संपर्क नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट में राष्ट्रीय विजेताओं का ऐलान

• भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य को मिले नए इनोवेटर्स

विजयनगर, कर्नाटक | 24 अगस्त 2026: भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर का भविष्य इस अगस्त सिर्फ कागज़ों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत में दिखाई दिया। बिल्डिंग भारत संपर्क नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट में देशभर से चुनी गई 14 फाइनलिस्ट टीमों ने अपने नवाचारों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि कक्षा और प्रयोगशाला में जन्म लेने वाला विचार वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। प्रतियोगिता के समापन पर दो टीमों ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया।

एमजीआर यूनिवर्सिटी, चेन्नई की टीम वैभव, जिसमें वैभव पुरुषोत्तम और विष्णु मणिकंदन शामिल हैं, को उनके सेफ्टी मॉनिटरिंग सिस्टम के लिए राष्ट्रीय विजेता घोषित किया गया। वहीं मुथूट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, एर्नाकुलम, केरल की सिमेट्रिस टेक टीम—जिसमें प्रत्युषा कृष्णा वी.पी., लक्ष्मी प्रिया बी., मीनाक्षी जी. और मनहा मुनीज़ शामिल हैं—ने अपने नवाचार सेफ़ ट्रैक के लिए राष्ट्रीय खिताब हासिल किया।

ये टीमें किसी एक प्रतियोगिता से सीधे राष्ट्रीय मंच तक नहीं पहुंचीं। वे बिल्डिंग भारत संपर्क इनोवेशन जर्नी से उभरकर सामने आईं सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं में शामिल थीं। इस यात्रा के दौरान आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास में आयोजित बूट कैंप और हैकाथॉन के जरिए इन विचारों को लगातार मार्गदर्शन, चुनौती और विशेषज्ञों की समीक्षा से गुजरना पड़ा।

नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट के लिए इन टीमों ने अपने विचारों को जेएसडब्ल्यू विजयनगर, टोरनागल्लू, कर्नाटक स्थित भारत के सबसे बड़े एकीकृत स्टील टाउनशिप में से एक, में वास्तविक औद्योगिक वातावरण के सामने प्रस्तुत किया। यहां उनके नवाचारों की असली परीक्षा हुई—उद्योग की वास्तविक जरूरतों और चुनौतियों के बीच।

अपने अधिकांश अकादमिक जीवन में भारत के सिविल इंजीनियरिंग छात्र इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं का समाधान कक्षाओं, परीक्षाओं और प्रयोगशालाओं में करते हैं, जहां वास्तविक दुनिया की जटिलता और बड़े पैमाने की चुनौतियों का अनुभव सीमित होता है। नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट ने इस सोच को बदलने का प्रयास किया। यह केवल एक कैंपस प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि इस बात की परीक्षा थी कि कॉलेज की प्रयोगशाला में जन्मा और बिल्डिंग भारत संपर्क इनोवेशन बूट कैंप इन सिविल इंजीनियरिंग के माध्यम से विकसित हुआ कोई विचार वास्तव में उस दुनिया में अपनी जगह बना सकता है या नहीं, जिसे वह बदलना चाहता है।

इस पहल में अटल इनोवेशन मिशन (AIM), नीति आयोग की भागीदारी इन नवाचारों को प्री-इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप और स्टार्टअप के अवसरों तक संरचित पहुंच प्रदान करती है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में सिविल इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर इनोवेशन कोई हाशिए का क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत के विकास की एक महत्वपूर्ण आधारशिला है।

बिल्डिंग भारत संपर्क नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है—भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर का अगला अध्याय केवल बड़े प्रोजेक्ट्स से नहीं, बल्कि उन युवा इंजीनियरों के नए विचारों से भी लिखा जाएगा, जो आज समस्याओं को पहचान रहे हैं और कल के समाधान तैयार कर रहे हैं।

भारत सड़क नेटवर्क, बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और शहरी विकास के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा, भवनों की सुरक्षा, सुगम पहुंच, टिकाऊ निर्माण तथा ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियां अभी भी हमारे सामने हैं। भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के अगले चरण को नवाचार से संचालित होना होगा। हमें ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने की आवश्यकता है, जो सिविल इंजीनियरों को नई और क्रांतिकारी तकनीकों तथा टिकाऊ समाधानों के साथ प्रयोग करने, उनका पायलट परीक्षण करने, उन्हें प्रमाणित करने और बड़े स्तर पर लागू करने में सक्षम बनाए। हमें पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर देश के हर हिस्से के लिए अधिक सुरक्षित, स्मार्ट, मजबूत, टिकाऊ और समावेशी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना होगा।”

श्री प्रतीक देशमुख, प्रोग्राम लीड, अटल इनोवेशन मिशन, इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री एसोसिएशन (इंडिया) के लिए यह प्रतियोगिता केवल एक उपलब्धि या पड़ाव नहीं है, बल्कि यह इस बात की नई परिकल्पना प्रस्तुत करती है कि भारत की युवा सिविल इंजीनियरिंग प्रतिभा क्या हासिल कर सकती है।

“अब सवाल यह नहीं है कि भारत के युवा सिविल इंजीनियरों के पास नए विचार हैं या नहीं। यह बात वे स्पष्ट रूप से साबित कर चुके हैं। असली चुनौती यह है कि क्या हम ऐसे प्लेटफॉर्म, मेंटरशिप और इंडस्ट्री से जुड़ने के अवसर तैयार कर सकते हैं, जो इन विचारों को प्रतियोगिता के मंच से आगे वास्तविक दुनिया तक पहुंचने में सक्षम बनाएं। हम चाहते हैं कि युवा इंजीनियर केवल किसी समस्या की पहचान करने तक सीमित न रहें, बल्कि उसका समाधान तैयार करें और अंततः प्रतिभागियों से आगे बढ़कर इनोवेटर, फाउंडर और निर्माणकर्ता बनें। यह यात्रा विकसित भारत 2047 से अलग नहीं है—बल्कि उस लक्ष्य को हासिल करने की बुनियादी शर्त है।”

डॉ. राजनीश दासगुप्ता, ट्रस्टी एवं डायरेक्टर जनरल, इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री एसोसिएशन (इंडिया) तथा नेशनल डायरेक्टर, बिल्डिंग भारत संपर्क “विजयनगर में हमारा मानना है कि किसी विचार का वास्तविक मूल्य तब सामने आता है, जब उसे वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के सामने परखा जाता है। भारत के लिए निर्माण करने के लिए ऐसे विचारों की आवश्यकता है, जो बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकें और वास्तविक चुनौतियों का सामना कर सकें। 14 युवा टीमों को एक सक्रिय औद्योगिक वातावरण में लाने से उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग के पैमाने, जटिलता और व्यावहारिक आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला। यही Building Bharat Sampaark को सार्थक बनाता है—नवाचार से भरे विचारों और भारत के भविष्य के निर्माण की वास्तविकताओं के बीच एक सेतु तैयार करना। हमें गर्व है कि विजयनगर इस यात्रा का हिस्सा बन सका।”

श्री पी.के. मुरुगन, प्रेसिडेंट, जेएसडब्ल्यू स्टील विजयनगर एंड सेलम वर्क्स नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट की मेजबानी जेएसडब्ल्यू विजयनगर में किया जाना एक सोचा-समझा निर्णय था। टीमों को भारत के सबसे उन्नत औद्योगिक इकोसिस्टम में से एक को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। उन्होंने स्टील और सीमेंट निर्माण, खनन एवं अयस्क संचालन, ऑटोमेशन तथा बड़े पैमाने की निर्माण तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। साथ ही, उन्होंने उन टिकाऊ और पर्यावरणीय मानकों को भी समझा, जिनके आधार पर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग संचालित होता है।

यह उनके लिए केवल औद्योगिक दौरा नहीं था—उद्योग ही उनकी कक्षा बन गया। इस अनुभव को हम्पी की ऐतिहासिक यात्रा के साथ जोड़ा गया। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हम्पी के खंडहरों और तुंगभद्रा नदी के घाटों ने भारतीय इंजीनियरिंग की प्राचीन विरासत की एक अलग ही तस्वीर प्रस्तुत की। जल प्रबंधन, संरचनात्मक डिजाइन और आधुनिक उपकरणों के बिना विकसित की गई सामग्री एवं निर्माण तकनीकों ने यह दिखाया कि भारत में इंजीनियरिंग और नवाचार की परंपरा कितनी गहरी और समृद्ध रही है।

इस संयोजन के पीछे एक स्पष्ट उद्देश्य था—भारत के भविष्य का निर्माण करने वाली नई पीढ़ी को पहले उस उद्योग को समझना होगा, जो इस भविष्य का निर्माण करेगा, और साथ ही उस सभ्यतागत गहराई को भी समझना होगा, जिसने भारत में सदियों पहले ऐसे निर्माण किए, जिनकी मिसाल आज भी कायम है।

राष्ट्रीय विजेता टीमों के लिए यह खिताब किसी मंजिल का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है—पुरस्कार से प्रोटोटाइप तक और प्रोटोटाइप से वास्तविक दुनिया के समाधान तक पहुंचने वाली यात्रा की शुरुआत।

और यही वह बदलाव है, जिसे बिल्डिंग भारत संपर्क नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट संभव बनाने के लिए तैयार किया गया था—युवा इंजीनियरों के विचारों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रखना, बल्कि उन्हें भारत के वास्तविक इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य के समाधान में बदलने का अवसर देना।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp