Katni CSP Neha Pachisia Suspended: करोड़ों की जमीन हड़पने के आरोप में बड़ी कार्रवाई, CM मोहन यादव ने दिए निलंबन के निर्देश
धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में FIR के बाद एक्शन, CSP कार्यालय और स्टाफ कक्ष सील
कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। जमीन की खरीदी में कथित धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और पद के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लिया और उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है।
इससे पहले कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला दर्ज होने के अगले ही दिन शुक्रवार सुबह पुलिस की टीम CSP कार्यालय पहुंची और कार्यालय के साथ स्टाफ कक्ष को भी सील कर दिया। माना जा रहा है कि कार्यालय में रखे दस्तावेज और रिकॉर्ड जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जमीन सौदे में गड़बड़ी का आरोप
मामले में आरोप है कि करोड़ों रुपए कीमत की जमीन को बेहद कम कीमत पर खरीदने की प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया गया। सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक यह जमीन हत्या के एक आरोपी के परिवार से जुड़ी बताई जा रही है। आरोप है कि पुलिसिया दबाव का इस्तेमाल कर जमीन का सौदा कराया गया।
पुलिस जांच में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य गंभीर पहलुओं को शामिल किया गया है। नेहा पच्चीसिया के साथ मारूफ अहमद और क्षितिज राज के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है।
हत्या के मामले से भी जुड़ा है विवाद
यह मामला केवल जमीन सौदे तक सीमित नहीं है। नेहा पच्चीसिया पहले से ही कुठला थाना क्षेत्र के एक हत्या मामले की जांच में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में थीं। आरोप था कि हत्या के मामले में तय समय के भीतर चालान पेश नहीं किया गया, जिससे आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिलने की स्थिति बनी।
इसी मामले के दौरान आरोपी पक्ष की जमीन को कम कीमत पर खरीदवाने और पुलिस कार्रवाई में कथित लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए थे। इन शिकायतों के बाद जांच को कटनी से बाहर स्थानांतरित कर जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपा गया था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिया संज्ञान
मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को नेहा पच्चीसिया को निलंबित करने और मामले की निष्पक्ष एवं गंभीर जांच कराने के निर्देश दिए।
सरकार का यह कदम पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों पर सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जमीन सौदे में किन लोगों की भूमिका थी और क्या सरकारी पद का गलत इस्तेमाल किया गया।
CSP कार्यालय को किया गया सील
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने शुक्रवार सुबह CSP कार्यालय पहुंचकर कार्यालय और स्टाफ कक्ष को सील कर दिया। इस कार्रवाई को जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संभावना है कि कार्यालय में जमीन सौदे, हत्या मामले और अन्य संबंधित मामलों से जुड़े दस्तावेज, फाइलें या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड हो सकते हैं। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों की पड़ताल कर सकती है।
कई पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की चर्चा
मामले में रंगनाथ नगर थाना प्रभारी अरुण पाल सिंह, एसआई सौरभ सोनी, CSP के रीडर, गनमैन और चालक पर भी कार्रवाई की चर्चा सामने आई है। हालांकि इन सभी के निलंबन को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
इससे पहले भी नेहा पच्चीसिया के आधिकारिक वाहन चालक को निलंबित किया जा चुका था और CSP से कई थानों का प्रभार वापस ले लिया गया था।
पहले भी लग चुके थे वसूली के आरोप
नेहा पच्चीसिया पर इससे पहले एक ट्रांसपोर्टर से कथित तौर पर 30 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप भी लगा था। शिकायत के बाद उनकी भूमिका की जांच शुरू की गई थी और विभागीय स्तर पर कार्रवाई भी हुई थी।
इन सभी मामलों को देखते हुए अब जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी संबंधित रिकॉर्ड और पुराने प्रकरणों की भी समीक्षा कर सकते हैं।
गिरफ्तारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
शुक्रवार दोपहर तक मामले में गिरफ्तारी को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग और राज्य सरकार दोनों स्तर पर निगरानी की जा रही है।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों पर लगे सभी आरोप जांच के अधीन हैं। एफआईआर में दर्ज आरोपों की पुष्टि साक्ष्य, दस्तावेज और पूछताछ के आधार पर की जाएगी।
अगर जांच में जमीन सौदे में पुलिस पद के दुरुपयोग, धमकी, धोखाधड़ी या आपराधिक षड्यंत्र की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
कटनी का यह मामला पुलिस महकमे में जवाबदेही और अधिकारियों द्वारा पद के इस्तेमाल को लेकर बड़ी बहस का विषय बन गया है। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच और उसके निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
