—Advertisement—

Indore High Court News: किराएदार की अपील खारिज, मकान मालिक को अपनी पसंद की जगह चुनने का अलग कारण बताने की जरूरत नहीं

Author Picture
Published On: 21 August 2026
INDORE
— इंदौर हाईकोर्ट का अहम फैसला: बेटे की पढ़ाई या परिवार के इलाज के लिए मकान मालिक की जरूरत वास्तविक

—Advertisement—

Indore High Court News: किराएदार की अपील खारिज, मकान मालिक को अपनी पसंद की जगह चुनने का अलग कारण बताने की जरूरत नहीं

Indore High Court News: इंदौर हाईकोर्ट ने मकान मालिक और किराएदार के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मकान मालिक यह साबित कर देता है कि उसे अपने बेटे की पढ़ाई या परिवार के किसी सदस्य के बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहर में रहने की वास्तविक जरूरत है, तो उसे यह अलग से साबित करने की आवश्यकता नहीं है कि उसने रहने के लिए वही शहर क्यों चुना।

कोर्ट ने माना कि अपने परिवार की वास्तविक जरूरतों के लिए कौन-सी जगह सबसे उपयुक्त है, इसका फैसला मकान मालिक और उसका परिवार स्वयं बेहतर तरीके से कर सकते हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने किराएदार की सेकंड अपील को खारिज करते हुए निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा।

बेटे की पढ़ाई के लिए मकान खाली कराने की मांग

मामला इंदौर के खजराना क्षेत्र की खिजराबाद कॉलोनी स्थित एक मकान से जुड़ा है। मकान मालिक ने किराएदार से मकान खाली कराने की मांग की थी। मकान मालिक की ओर से दलील दी गई कि उसे अपने बेटे की पढ़ाई के लिए इंदौर में रहने की जरूरत है।

मामले की सुनवाई के दौरान मकान मालिक ने अपने बेटे के कंपनी सेक्रेटरी (CS) कोर्स से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि बेटे की पढ़ाई के दौरान परिवार के लिए इंदौर में रहना सुविधाजनक और आवश्यक है।

किराएदार की ओर से इस जरूरत पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया गया कि मकान मालिक ने यह पर्याप्त रूप से नहीं बताया कि पढ़ाई के लिए इंदौर में रहना ही क्यों जरूरी है और दूसरे शहर में रहने का विकल्प क्यों नहीं चुना जा सकता।

Indore हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब मकान मालिक अपनी वास्तविक आवश्यकता को दस्तावेजों और परिस्थितियों के आधार पर साबित कर देता है, तो उसके बाद यह तय करना कि परिवार के लिए कौन-सी जगह बेहतर है, मकान मालिक का व्यक्तिगत निर्णय है।

कोर्ट ने माना कि किसी व्यक्ति की वास्तविक जरूरत का आकलन करते समय यह नहीं कहा जा सकता कि उसे अपनी पसंद के शहर में रहने के लिए अतिरिक्त औचित्य भी साबित करना होगा। यदि मकान मालिक और उसका परिवार यह तय करते हैं कि किसी विशेष शहर में रहना उनके लिए सुविधाजनक है, तो अदालत को सामान्य तौर पर उस व्यक्तिगत निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, बशर्ते जरूरत वास्तविक और प्रमाणित हो।

हाईकोर्ट ने इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय अदालत के निर्णय को सही माना।

23 साल से किराए पर था मकान

यह विवाद खजराना क्षेत्र की खिजराबाद कॉलोनी के प्लॉट नंबर 36-बी स्थित मकान का है। मकान मालिक के मुताबिक, उसने 18 जनवरी 2003 को यह मकान 1,100 रुपये मासिक किराए पर दिया था। उसी दिन मकान मालिक और किराएदार के बीच किराए का समझौता भी किया गया था।

समय बीतने के साथ दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ता गया। मकान मालिक ने आरोप लगाया कि किराएदार नियमित रूप से किराए का भुगतान नहीं कर रहा था। इसके अलावा मकान में बिजली के कथित अवैध इस्तेमाल का मामला भी सामने आया।

बिजली चोरी के मामले से भी बढ़ी परेशानी

मकान में बिजली के अवैध इस्तेमाल के कारण बिजली चोरी का प्रकरण दर्ज होने की बात भी सामने आई। चूंकि बिजली कनेक्शन मकान मालिक के नाम पर था, इसलिए इस मामले का असर मकान मालिक पर भी पड़ा।

मकान मालिक ने अदालत के सामने इन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि किराएदार के साथ विवाद और मकान से जुड़ी परेशानियों के अलावा उसे अपने परिवार की जरूरतों के लिए भी संपत्ति की आवश्यकता है।

निचली अदालतों ने भी मकान मालिक के पक्ष में दिया फैसला

मामले की सुनवाई पहले ट्रायल कोर्ट में हुई थी। ट्रायल कोर्ट ने मकान मालिक की जरूरत को वास्तविक मानते हुए उसके पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद किराएदार ने प्रथम अपीलीय अदालत का रुख किया, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।

दोनों अदालतों के फैसले के बाद किराएदार ने हाईकोर्ट में सेकंड अपील दायर की। किराएदार की ओर से मकान मालिक की आवश्यकता और इंदौर में रहने के फैसले पर सवाल उठाए गए।

हालांकि, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और निचली अदालतों के निष्कर्षों का परीक्षण करने के बाद अपील खारिज कर दी।

परिवार की जरूरत तय करने का अधिकार मकान मालिक का

Indore हाईकोर्ट की टिप्पणी का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मकान मालिक को अपनी वास्तविक जरूरत साबित करनी होती है, लेकिन जरूरत पूरी करने के लिए वह कौन-सी जगह चुनेगा, इसका विस्तृत औचित्य हर मामले में अलग से साबित करना आवश्यक नहीं है।

अदालत ने माना कि किसी व्यक्ति के बच्चे की शिक्षा, परिवार के सदस्य का इलाज या अन्य वास्तविक पारिवारिक आवश्यकता कहां बेहतर तरीके से पूरी हो सकती है, इसका निर्णय परिवार स्वयं कर सकता है।

इस फैसले से यह संदेश मिलता है कि किराएदारी विवादों में केवल इस आधार पर मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता को खारिज नहीं किया जा सकता कि उसने किसी विशेष शहर या स्थान को क्यों चुना। यदि उसकी आवश्यकता वास्तविक है और वह उसे प्रमाणित करने में सफल है, तो अदालत उसके व्यक्तिगत निर्णय का सम्मान कर सकती है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने किराएदार की सेकंड अपील खारिज करते हुए निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला मकान मालिकों की वास्तविक आवश्यकता और किराएदारों के अधिकारों के बीच संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp